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उत्तराखण्ड

पेयजल निगम कर्मियों ने दी सात से हड़ताल की चेतावनी

देहरादून। तीन माह से वेतन न मिलने से आक्रोशित पेयजल निगम कर्मियों ने निगम मुख्यालय पर प्रदर्शन कर धरना दिया। चेतावनी दी कि अगर छह जनवरी तक लंबित वेतन का भुगतान नहीं किया जाता तो निगम कर्मचारी सात जनवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।

उत्तराखंड पेयजल निगम कर्मचारी महासंघ के बैनर तले पेयजल निगम के कर्मचारी मोहनी रोड स्थित निगम मुख्यालय पर एकत्रित हुए। वहां उन्होंने निगम प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया और एक दिवसीय धरना दिया।

इस दौरान महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष प्रवीन सिंह रावत ने कहा कि तीन माह से वेतन न मिलने के कारण कर्मचारियों की आर्थिक स्थित बिगड़ गई है। कहा कि पूर्व में पेयजल निगम को वेतन और सेंटेज के अंतर की धनराशि का भुगतान सरकार द्वारा किए जाने का शासनादेश है, लेकिन इसके उपरांत भी सरकार वेतन और पेंशन का भुगतान नहीं  कर रहा है।

जिला अध्यक्ष नवीन थापा ने कहा कि विगत तीन माह से वेतन व पेंशन न मिलने के कारण सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बच्चों का भरण-पोषण और फीस नहीं जा पा रही है। चेतावनी दी कि अगर जल्द ही उनके वेतन का पूर्ण भुगतान नहीं हुआ तो पूरे प्रदेश में कार्यबहिष्कार और इसके बाद सात से पेयजल कर्मी अनिश्चतकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।

धरने पर आरके सेनिवाल, धर्मेद्र चौधरी, कुशाल सिंह, भगवती प्रसाद, गौर सिंह फरस्वाण, प्रीतम सिंह, मीरा देवी, कमला गुसाईं सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी-अधिकारी मौजूद थे।

डिप्लोमा फार्मेसिस्टों के दोनों गुटों में बढ़ी खींचतान

प्रदेश में डिप्लोमा फार्मेसिस्टों के दो गुटों के बीच खींचतान बढ़ती जा रही है। वर्चस्व की इस जंग में अब शह और मात का खेल चल रहा है। स्वास्थ्य महानिदेशालय ने पंवार गुट को अपनी वैधानिकता सिद्ध करने के लिए तीन दिन का समय दिया है।

महानिदेशक डॉ. टीसी पंत की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि महानिदेशालय द्वारा चार सितंबर को पत्र जारी कर संघ की वैधानिकता सिद्ध करने को एक सप्ताह के भीतर अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा गया था, लेकिन अभिलेख जमा नहीं कराए गए हैं। महानिदेशक ने अब तीन दिन के भीतर अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा है।

विदित हो कि संघ का अधिवेशन पांच मई 2013 को बागेश्वर में आयोजित हुआ था। जिसका दो वर्ष का निर्धारित कार्यकाल चार मई 2015 को समाप्त हो चुका था। आरोप है कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी संघ में करीब ढाई वर्ष तक कोई चुनाव नहीं हुए।

पिछले वर्ष 14 जनवरी को दून में अधिवेशन हुआ। जिसमें सैकड़ों सदस्यों को निर्वाचन प्रक्रिया में भाग नहीं लेने दिया गया। जिस पर उन्होंने संगठन से अलग होकर एक कार्यकारिणी का गठन किया था। इसमें एसपी सेमवाल को प्रदेश अध्यक्ष व पवन पांडेय को प्रदेश महामंत्री निर्वाचित किया गया।

पहले गुट में प्रताप सिंह पंवार प्रदेश अध्यक्ष व आरएस ऐरी को प्रदेश महामंत्री बनाया गया। इसके बाद डिप्लोमा फार्मेसिस्ट संघ में दो फाड़ हो गए हैं। सेमवाल गुट का दावा है कि उन्होंने निर्धारित समयावधि में अपने अभिलेख स्वास्थ्य महानिदेशालय में जमा करा दिए हैं।

पंवार गुट द्वारा ऐसा नहीं किया गया। प्रदेश अध्यक्ष एसपी सेमवाल का कहना है कि अभिलेख जमा न कराने पर महानिदेशालय को दूसरी कार्यकारिणी को अवैध घोषित कर दिया जाना चाहिए था। उन्होंने अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी व स्वास्थ्य सचिव नितेश झा को पत्र लिखकर पंवार गुट को दोबारा समय देने पर ऐतराज जताया है।

दूसरे गुट के अध्यक्ष प्रताप सिंह पंवार का कहना है कि स्वास्थ्य महानिदेशालय का पत्र उन्हें नहीं मिला है। पत्र मिलता है तो सभी जरूरी अभिलेख निर्धारित समय में जमा करा दिए जाएंगे।

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Ghanshyam Chandra

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