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कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने भारत की वर्तमान स्थिति पर अमेरिका की खामोशी पर उठाया सवाल, जानिए क्या कहा ?

आकाश ज्ञान वाटिका, 3 अप्रैल 2021, शनिवार। विदेश में और विदेशी विशेषज्ञों के सामने देश को बदनाम करने के आदी हो चुके राहुल गाँधी एक बार फिर अपने बयानों से निशाने पर हैं। अब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने भारत की वर्तमान स्थिति पर अमेरिका की खामोशी पर सवाल उठाया है। पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर निकोलस बर्न्स के साथ आनलाइन इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि भाजपा ने देश की सभी संस्थाओं पर कब्जा कर लिया है। अगर अमेरिका लोकतंत्र के सिद्धांतों में यकीन करता है तो वह चुप क्यों है? राहुल गांधी ने बर्न्स के साथ बातचीत में विदेश नीति से लेकर घरेलू राजनीति, चीन के साथ तनाव और किसान आंदोलन पर अपने विचार व्यक्त किए।

राहुल गाँधी अपने बयानों को लेकर निशाने पर आ गए हैं। भाजपा नेताओं ने उनपर जमकर निशाना साधा है। पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने उनकी आलोचना करते हुए कहा है कि आपका रोना धोना काम नहीं आने वाला है। आप कितने काबिल हैं दुनिया इससे वाकिफ है। दुनिया इस बात को समझती है कि आप रोना लोकतंत्र के लिए नहीं बल्कि अपनी पार्टी की नाकामी को लेकर है। पात्रा ने यह भी कहा कि राहुल बिल्कुल अपनी पार्टी के नेता मणिशंकर अय्यर की तरह रो रहे हैं, जिन्होंने पाकिस्तान से कहा था’आप को मोदी को हटाना होगा’! कांग्रेस पार्टी जब बंगाल में हारेगी तो इसकी शिकायत राहुल गांधी अमेरिका से करेंगे।

कर्नाटक के भाजपा नेता सीटी रवि ने कहा कि भारत में आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 88 साल के मेट्रो मैन ई श्रीधरन नए भारत के निर्माण की दिशा में काम कर रहे हैं। लेकिन 50 साल का युवा और प्रधानमंत्री पद का आकांक्षी राहुल गांधी पूरे विश्व में भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने में व्यस्त है। वहीं अमित मालवीय ने कहा कि ऐसे समय में जब प्रधानमंत्री, राष्ट्रीय अध्यक्ष, गृह मंत्री और भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेता चुनावी राज्यों में चुनाव प्रचार कर रहे हैं, तब राहुल गांधी अमेरिका के प्रोफेसरों के साथ वीडियो कॉल करने और बचकाना बयान देने में व्यस्त हैं … हारने के बाद, वह लोकतंत्र की खामी का हवाला देंगे और लोगों को दोषी ठहराएंगे।

पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर निकोलस बर्न्स से बातचीत के दौरान चीन को लेकर राहुल गाँधी ने कहा कि वार्ता की आड़ में चीन, भारत की जमीन पर कब्जा कर रहा है। उनके सैनिक हमारे क्षेत्र में हैं, लेकिन मीडिया में इस मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं हो रही है। वे ऐसा करने में इसलिए कामयाब हो रहे हैं क्योंकि वे भारत को कमजोर और अंदरूनी तौर पर बंटा हुआ देख रहे हैं। उससे मुकाबले के लिए भारत  को मजबूत और एकजुट होने की जरूरत है। ये समय की मांग है। राहुल ने इस दौरान कहा कि चीन ने दुनिया की प्रोडक्शन की लड़ाई जीत ली है। उन्हें नहीं लगता कि भारत और अमेरिका उसे चुनौती दे पा रहे हैं। उससे मुकाबले के लिए अमेरिका और भारत दोनों को एक आर्थिक रणनीति बनाने की जरूरत है।

नए कृषि कानूनों पर किसानों के विरोध को लेकर राहुल गाँधी ने कहा कि कृषि क्षेत्र में सुधार की जरूरत है, लेकिन इससे जुड़े लोगों से बातचीत किए बिना नहीं किया जा सकता। आप कृषि क्षेत्र की नींव पर हमला नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस की सरकार थी, तो लगातार फीडबैक लिया जाता था। अब यह बंद हो गया है। इस वजह से किसानों के पास सड़क परा उतरने के अलावा कोई रास्ता नहीं है।

राहुल ने इस दौरान असम में भाजपा उम्मीदवार की कार में मिले ईवीएम का मुद्दा उठाया और कहा कि नेशनल मीडिया में इसे लेकर कुछ नहीं किया। इससे देश के संस्थागत ढांचे पर पूरी तरह कब्जे का पता चलता है। बता दें कि चुनाव आयोग ने लापरवाही बरतने पर पीठासीन अधिकारी और चुनाव आयोग के तीन अन्य अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। साथ ही संबंधित सीट पर फिर से मतदान की घोषणा कर दी है। राहुल ने कहा कि इन सबके बीच अमेरिकी सरकार की तरफ से कोई टिप्पणी नहीं आई है। अगर अमेरिका, भारत का लोकतांत्रिक साझेदार है तो फिर वह भारत घटित हो रही इन घटनाओं पर क्यों आवाज नहीं उठाता। गौरतलब है कि राहुल गांधी पहले भी विशेषज्ञों से बातचीत में ऐसी बात करते रहे हैं। उन्होंने कई बार संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव में होने ठीक से काम न करने की बात कही है। बातचीत के दौरान यह पूछे जाने पर कि क्या भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने के मौजूदा प्रयास काम करेंगे? राहुल गांधी ने कहा कि वे कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह आसान होगा। भारत और पाकिस्तान के लिए एक बिंदु से आगे जाना मुश्किल है।

राहुल ने इस दौरान आरोप लगाए कि भाजपा ने देश के अहम संवैधानिक संस्थाओं को कब्जे में ले लिया है। उन्होंने कहा भाजपा आर्थिक तौर पर और मजबूत हुई है और मीडिया से भी उसको समर्थन मिल रहा है। यही वजह है कि कांग्रेस ही नहीं बीएसपी, एसपी, एनसीपी जैसी पार्टियां चुनाव नहीं जीत पा रही हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ने के लिए संस्थागत ढांचे की जरूरत पड़ती है। ये संस्थाएं निष्पक्ष लोकतंत्र के लिए जरूरी है, लेकिन भाजपा इनपर पूरी तरह हावी हो गई है। इससे विपक्षी पार्टियों को नुकसान हो रहा है। इन चिंताजनक हालातों के बावजूद अमेरिका की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका सचमुच में स्वतंत्रता और लोकतंत्र में यकीन करता है तो उसे खामोश नहीं रहना चाहिए।

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Ghanshyam Chandra

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