रंगवाली पिछौड़ा

कुमाऊँनी संस्कृति और नारी-सम्मान का प्रतीक

साभार : शोभा पाँडे “शोभन”
देहरादून
रंगवाली पिछौड़ा, रंगवाली पिछौडा,
बहुत पवित्र परिधान हमारा।
कुमाऊँनी संस्कारों की पहचान पिछौड़ा,
रंगवाली पिछौड़ा, रंगवाली पिछौड़ा।
चंद राजाओं ने परंपरा चलाई,
राजाघरानों, साहों, ब्राह्मणों तक पहुँचाई।
ऐपण, संस्कृति, सभ्यता की शान पिछौड़ा।
बहुत पवित्र परिधान हमारा।
रंगवाली पिछौडा, रंगवाली पिछौड़ा।

पिछौड़ा पहनने के कुछ नियम भी होते,
कन्यादान के बाद ही, दुल्हन को पहनाते।
शंखध्वनि, शकुनाखर, मंत्रोच्चार होता,
पहली बार पिछौड़ा तभी पहनाया जाता।
रंगवाली पिछौड़ा, रंगवाली पिछौड़ा,
बहुत पवित्र परिधान हमारा।
वैवाहिक गौरव, अखंड सुहाग का प्रतीक है,
“कुसुमी पिछौड़ा” के नाम से भी प्रख्यात है।
सुहागिनियों का श्रृंगार है पिछौड़ा,
दुर्गा,नंदा माता का आशीर्वाद है पिछौड़ा।
बहुत पवित्र परिधान है हमारा।
रंगवाली पिछौडा, रंगवाली पिछौड़ा।
लाल रंग, पीले रंग से रंगाया जाता,
स्वस्तिक,सूर्य,चंद्र,शंख,घंटी से सजाया जाता।
समृद्धि, विजय, ऊर्जा, शुभता दर्शाता,
जीवन में दिव्यता, शांति, आनंद उपजाता।
रंगवाली पिछौडा, रंगवाली पिछौड़ा।
बहुत पवित्र परिधान हमारा।
पिछौड़ा पहनने की शैली, वर्तमान में भ्रष्ट है,
पारंपरिक संस्कार,संस्कृति सब,मनमानी से त्रस्त है।
कोई भी, कहीं भी, कैसे पहन लेता पिछौड़ा,
मर्यादा की सीमाओं से हटता पिछौड़ा।
रंगवाली पिछौड़ा रंगवाली पिछौड़ा।
बहुत पवित्र परिधान हमारा।
समय आ गया मिलकर अब, हमको संकल्प है लेना,
अमर्यादित आधुनिकता से, पिछौड़े को है बचाना।
नए लोगों को,नयी पीढ़ी को, शोभन महत्ता समझाना,
देवताओं के तुल्य है हमारा ये पिछौड़ा।
रंगवाली पिछौड़ा, रंगवाली पिछौड़ा,
बहुत पवित्र परिधान हमारा।
रंगवाली पिछौड़ा, रंगवाली पिछौड़ा।
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