बदलते मौसम में बच्चों को बीमारियों से बचाने के लिए रखें खास ध्यान, खानपान से लेकर साफ-सफाई तक जरूरी

देशभर में इन दिनों बदलते मौसम का दौर जारी है, जिसके कारण तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। कभी तेज गर्मी तो कभी अचानक ठंड और बारिश का यह मिजाज सबसे ज्यादा छोटे बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कमजोर इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) के चलते बच्चे इस मौसम में बहुत जल्दी सर्दी, खांसी, बुखार, गले में खराश और वायरल संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं।
बच्चों की सेहत को सुरक्षित रखने के लिए बाल रोग विशेषज्ञों ने माता-पिता को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। आइए जानते हैं बदलते मौसम में बच्चों की देखभाल से जुड़ी वो 5 अहम बातें, जो हर पेरेंट्स के लिए जानना बेहद जरूरी हैं:
1. खानपान और डाइट पर रखें विशेष नजर
बच्चों की इम्यूनिटी मजबूत करने के लिए उन्हें संतुलित और पौष्टिक आहार देना बेहद जरूरी है। उनकी डेली डाइट में ताजे मौसमी फल, हरी सब्जियां, दालें और दूध जरूर शामिल करें। बच्चों को बाहर का जंक फूड या खुला हुआ अस्वच्छ खाना देने से पूरी तरह बचें।
2. सही कपड़ों का चयन और तापमान का तालमेल
बदलते मौसम में सुबह-शाम की ठंड और दोपहर की गर्मी में अंतर आ जाता है। बच्चों को लेयरिंग (परतों में) कपड़े पहनाएं ताकि तापमान के घटने-बढ़ने पर उनके कपड़ों को आसानी से कम या ज्यादा किया जा सके। बहुत ज्यादा या बहुत कम कपड़े पहनाने दोनों से ही सेहत बिगड़ सकती है।
3. हाइड्रेशन और साफ-सफाई का रखें ख्याल
मौसम कोई भी हो, शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) नहीं होनी चाहिए। बच्चों को समय-समय पर पानी पीने के लिए प्रेरित करें। इसके अलावा, खाना खाने से पहले और बाहर से आने के बाद बच्चों को साबुन से हाथ धोने की अच्छी आदत डालें। उनके खिलौनों और इस्तेमाल की अन्य चीजों को भी समय-समय पर साफ करते रहें।
4. पर्याप्त नींद और खेलकूद
शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बच्चों की पूरी नींद बहुत जरूरी है। उनके सोने और उठने का एक निश्चित समय तय करें। साथ ही, उन्हें रोजाना शारीरिक गतिविधियों (फिजिकल एक्टिविटी) के लिए प्रेरित करें, हालांकि बहुत ज्यादा खराब मौसम या प्रदूषण होने पर उन्हें इंडोर गेम्स (घर के अंदर) खेलने की ही सलाह दी जाती है।
5. इन गंभीर लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
अगर किसी बच्चे को लगातार तेज बुखार, खांसी, गले में दर्द, सांस लेने में तकलीफ या असामान्य सुस्ती महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। छोटे बच्चों में बीमारी के लक्षण बहुत तेजी से गंभीर हो सकते हैं। सांस लेने में कठिनाई या होंठ नीले पड़ने जैसे आपातकाल में बिना देर किए तुरंत अस्पताल जाएं और अपनी मर्जी से बच्चे को कोई भी एंटीबायोटिक या मेडिकल स्टोर की दवा बिल्कुल न दें।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि बच्चों का समय पर टीकाकरण करवाएं और किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लंबे समय तक बने रहने पर तुरंत नजदीकी बाल रोग विशेषज्ञ (Paediatrician) से सलाह लें।
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