Breaking News :
>>अटल उत्कृष्ट विद्यालयों में शीघ्र होगी शिक्षकों की तैनाती- डा. धन सिंह रावत>>महाराज ने मुख्यमंत्री धामी को सौंपा 3,67,995 की धनराशि का चैक>>मुख्यमंत्री धामी ने सीबीएसई 12वीं की टॉपर अरीना रघुवंशी को फोन कर दी बधाई>>मुख्यमंत्री धामी से ओबीसी वेलफेयर पार्लियामेंट्री कमेटी के प्रतिनिधिमंडल ने की भेंट>>किडनी स्टोन में बीयर पीना फायदेमंद या नुकसानदायक? जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर>>मंत्री गणेश जोशी ने अनारवाला-मालसी मोटर मार्ग पर चल रहे मरम्मत एवं सुधार कार्यों का किया निरीक्षण >>‘पति पत्नी और वो दो’ की बॉक्स ऑफिस पर धीमी सुरुआत, फिल्म ने पहले दिन कमाए इतने करोड़ रुपये>>जब अफसर खुद बने मिसाल : साइकिल से दफ्तर पहुंचे बंशीधर तिवारी>>देहरादून में स्कॉर्पियो से 1.55 करोड़ रुपये की नगदी बरामद, सीक्रेट केबिन में छिपाई थी रकम>>एमडीडीए की सख्त कार्रवाई, तीन बीघा भूमि पर विकसित की जा रही अवैध प्लॉटिंग ध्वस्त>>मानकों के विपरित संचालित 96 होमस्टे के डीएम सविन बंसल ने किए पंजीकरण निरस्त>>इलेक्ट्रिक स्कूटर से उपनल मुख्यालय पहुंचे मंत्री गणेश जोशी, किया औचक निरीक्षण>>गांव, गरीब और युवाओं का विकास सरकार की प्राथमिकता- कैबिनेट मंत्री भरत सिंह>>उच्च शिक्षा विभाग में किताबों का संकट दूर करेगी ई-लाइब्रेरी- डाॅ. धन सिंह रावत>>कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ की बैठक>>‘वेलकम टू द जंगल’ का धमाकेदार टीजर रिलीज, 26 जून को सिनेमाघरों में दस्तक देगी फिल्म>>NEET-UG 2026 री-एग्जाम की तारीख घोषित, 21 जून को होगी परीक्षा>>उत्तराखंड के प्रत्येक विकासखण्ड में बनेगा एक आदर्श कृषि गांव, सीएम धामी ने दिये निर्देश>>सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में डीएम का औचक निरीक्षण, स्टांप चोरी और अवैध रजिस्ट्रियों का हुआ खुलासा>>​शिक्षा के मंदिर में अनैतिक गतिविधियां अक्षम्य, दोषियों पर होगी कठोरतम कार्रवाई- कुसुम कंडवाल
उत्तराखण्डधार्मिक

ऐतिहासिक धरोहर एवं आस्था का केन्द्र है पिनाकेश्वर(पिनाथ)

  • देवभूमि उत्तराखण्ड आज भी अपनी ऐतिहासिक व धार्मिक विरासतों के लिए प्रसिद्ध है । यहाँ पर कई ऐसे ऐतिहासिक  धार्मिक स्थल हैं जो लोगों की आस्था के  केन्द्र हैं । उन्हीं में से एक है  “पिनाकेश्वर (पिनाथ)” ।

कौसानी से कांटली गाँव लगभग नौ दस किलोमीटर दूर एक मंदिर है, ‘पिनाकेश्वर’ जिसे हम स्थानीय लोग ‘पिनाथ’ बोलते हैं। नाम से ही ज्ञात होता है कि कोई शिव मंदिर है। भौगोलिक स्थिति से देखा जाए तो समुद्र तल से करीब आठ हजार फीट की ऊंचाई पर, भटकोट पर्वतमालाओं के बीच बना यह मंदिर चंद वंशजों की देन है। मंदिर में रखे ताम्र पत्रों के अनुसार मंदिर की स्थापना सोलहवीं सदी में चंद वंश के राजा- बाज बहादुर चंद ने की।


हालांकि कौसानी से होते हुए एक सड़क गई हुई है जो आपकी गाड़ी को मंदिर से चंद किलोमीटर दूर तक पहुंचा सकती है। पर कुछ जगहें होती हैं, जहां सड़क से पहुंचा जाए तो वहां जाने का मजा ही बेकार हो जाए… ऐसी ही जगह है #पिनाथ। हम जब भी अपने गांव से मंदिर जाते हैं तो पैदल ही जाते हैं, सफर 8-10 किलोमीटर का हो जाता है। कहीं खड़ी चढ़ाई, कहीं पहाड़ से चिपके पतले रास्ते के दूसरी तरफ गहरी खाई, कहीं चीड़ के पेड़ों की सांय-सांय, तो कहीं रास्ते में बांज, बुरांस, गोंत, काफल, अखरोट आदि जैसे चौड़े पत्ते वाले पेड़ों की ठंडी छाँह।। सामने हिंमगीरियां ऐसे लगती हैं जैसे आप अपना हाथ आगे लम्बा करके पहाड़ों पर टिकी बर्फ को छू लोगे, हालांकि हिंम पर्वत तुमसे कोसों दूर होता है, लेकिन साफ पर्यावण के चलते कोसों की दूरी से देखने पर भी वो बर्फ ओढ़ी चट्टानें सामने प्रतीत होती हैं और उस ओर से अविराम चली आ रही शीतल बर्फ घुली हवाएं आपके लिए ग्लूकोज का काम करती हैं।


इन रास्तों पर चलना जिंदगी को खुलकर जीने जैसा होता है, आप आस्तिक होते हो, मन में भगवान शिव बसे होते हैं, आपको गहरी खाइयों को देखकर एक पल चक्कर आता है, और दूसरे पल आप जोर से जयकार करते हो #हर_हर_महादेव और वो पल भर पहले का डर कहीं डूब जाता है, आप उन रोमांचित पलों को यादों में समेटने के लिए तैयार हो जाते हो और आपके कदम भटकोट के पर्वतों को लांघने में व्यस्त हो जाते हैं।


हमारे पहाड़ी माओं या फिर चरवाहों के लिए ऐसी जगहें कुछ भी नहीं हैं। लेकिन अगर आप शहरी हो, और एक 10-12 किलोमीटर की पथरीली, और चुनौती पूर्ण चढ़ाई(ट्रैकिंग) करना चाहते हो तो यह समय इस प्रकार की चढ़ाई के लिए बहुत अच्छा है।बरसात में जहां रास्ता कीचड़ से चिकना/फिसलन भरा होता है वहीं गर्मियों में चीड़ के पत्तों पर आप रास्तों में फिसल सकते हैं। लेकिन अभी सर्दियों में जमीन चलने के लिए बहुत अच्छी होती है। आप अभी इस जगह आकर मंदिर भी देख सकते हैं और एक रोमांचक पैदल यात्रा को भी जी सकते हैं।
अब एक हद तक पहाड़ों में महिलाओं के लिए श्रम थोड़ा कम हुआ है पर मेरी माँ बताती हैं कि कुछ सालों पहले तक वो और उनकी साथ वाली महिलाएं रोज मंदिर वाली चोटियों के आस-पास की चोटियों में घास काटने आया करती थी। सुबह वहां पहुंचकर सबसे पहले सामने दिख रहे दूर कहीं हिंम जमे चांदी जैसे सफेद खड़े पर्वतों को प्रणाम करती थीं और फिर हम सारी महिलाएं अपने कामों में लग जाते थे। सोचकर ही मेरी हालत पस्त हो जाती है, रोज उतना चढ़ना, फिर घास काटना, और फिर उतना बड़ा हरी(कच्ची) घास का गट्ठर सिर में रखकर वापस दिन के दो-तीन बजे तक घर लौट आना। कितना मुश्किल कठोर जीवन होता होगा। इस सब के बाद भी सारी महिलाएं हंसी खुशी जीती हैं। न माथे में शिकन और न चेहरों में उदासी। मैं इस बात से कभी नहीं मुकर सकती कि पहाड़ को महिलाओं ने जीवित रखा हुआ है। मुझे उन पर गर्व है और इस मिट्टी पर जिसमें मैंने जन्म लिया ।

साभार:  श्रीमती गीता जोशी, देहरादून

Loading

Ghanshyam Chandra

AKASH GYAN VATIKA (www.akashgyanvatika.com) is one of the leading and fastest growing web News Portal which provides latest information about the Political, Social Activities, Environmental, entertainment, sports, General Awareness etc. I, GHANSHYAM CHANDRA, EDITOR, AKASH GYAN VATIKA provide News and Articles about the abovementioned subject and also provide latest/current state/national/international News on various subject.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!