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मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने ‘हिमालय-बचाओ पाॅलिथीन हटाओ’’ कार्यक्रम में किया प्रतिभाग

देहरादून 09 सितम्बर, 2019 (सू.ब्यूरो) मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सोमवार को नगर निगम देहरादून में हिन्दुस्तान समाचार पत्र द्वारा आयोजित ‘‘हिमालय-बचाओ पाॅलिथीन हटाओ ’’कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने हिमालय संरक्षण पर आधारित भाषण प्रतियोगिता में राज्य एवं जनपद स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि हिमालय के संरक्षण की पहली जिम्मेदारी उत्तराखण्ड की है उत्तराखण्ड से निकलने वाली गंगा और यमुना से देश की 65 प्रतिशत सिंचाई होती है। इसीलिए हिमालय को वाटर टाॅवर भी कहा जाता है। पर्यावरण और जल संरक्षण के लिए बृहद स्तर पर वृक्षारोपण करना जरूरी है। वृक्षों के संरक्षण के लिए विश्वेश्वर दत्त सकलानी, कल्याण सिंह रावत, गौरा देवी, सुन्दरलाल बहुगुणा ने अनेक प्रयास किये। वृक्षों व प्रकृति के प्रति हमारा स्वाभाविक लगाव रहा है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण व पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रधानमंत्री जी ने मन की बात में जो जिक्र किया है। जन सहयोग व जागरूकता से ही इस दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि बच्चे अपनी जिम्मेदारियों को समझते हैं किसी भी अभियान को तभी सफलता मिलती है, जब हम उसकी शुरूआत स्वयं से करते हैं।

मेयर श्री सुनील उनियाल गामा ने कहा कि हिन्दुस्तान समाचार पत्र हिमालय के संरक्षण व पाॅलिथीन मुक्ति के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार व जन चेतना के माध्यम से सराहनीय कार्य कर रहा है। इस कार्यक्रम में बच्चों की सहभागिता से बच्चों में प्र्यावरण संरक्षण के प्रति चेतना का और अधिक संचार होगा। उन्होंने कहा कि नगर निगम के माध्यम से देहरादून में प्लास्टिक मुक्त करने का संकल्प लिया गया है।
इस अवसर पर बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष श्री मोहन प्रसाद थपलियाल, हिन्दुस्तान के स्थानीय संपादक श्री गिरीश गुरूरानी आदि कई गणमान्य प्रकृति प्रेमी जन उपस्थित रहे।

संसार की अधिकांश ऊँची पर्वत चोटियाँ हिमालय में ही स्थित हैं। विश्व के 100 सर्वोच्च शिखरों में हिमालय की अनेक चोटियाँ हैं। विश्व का सर्वोच्च शिखर माउंट एवरेस्ट हिमालय का ही एक शिखर है। हिमालय में 100 से ज्यादा पर्वत शिखर हैं जो 7200 मीटर से ऊँचे हैं। हिमालय के कुछ प्रमुख शिखरों में सबसे महत्वपूर्ण सागरमाथा हिमाल, अन्नपूर्णा, शिवशंकर, गणेय, लांगतंग, मानसलू, रॊलवालिंग, जुगल, गौरीशंकर, कुंभू, धौलागिरी और कंचनजंघा है।
हिमालय श्रेणी में 15 हजार से ज्यादा हिमनद हैं जो 12 हजार वर्ग किलॊमीटर में फैले हुए हैं। 72 किलोमीटर लंबा सियाचिन हिमनद विश्व का दूसरा सबसे लंबा हिमनद है। हिमालय की कुछ प्रमुख नदियों में शामिल हैं – सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र और यांगतेज।
भू-निर्माण के सिद्धांतों के अनुसार यह भारत-आस्ट्रेलिया प्लेटों से एशियाई प्लेट को टकराने से बना है।
हिमालय में कुछ महत्त्वपूर्ण धार्मिक स्थल भी है। इनमें हरिद्वार, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गोमुख, देव प्रयाग, ऋषिकेश, कैलाश, मानसरोवर तथा अमरनाथ प्रमुख हैं।
हिमालय पर्वत विविध प्राकृतिक, आर्थिक और पर्यावरणीय कारणों से महत्वपूर्ण है। हिमालय पर्वत का महत्व न केवल इसके आसपास के देशों के लिये हैं बल्कि पूरे विश्व के लिये हैं क्योंकि यह ध्रुवीय क्षेत्रों के बाद पृथ्वी पर सबसे बड़ा हिमाच्छादित क्षेत्र है जो विश्व जलवायु को भी प्रभावित करता है।
उत्तरी भारत का मैदान या सिन्धु-गंगा-ब्रह्मपुत्र का मैदान हिमालय से लाये गये जलोढ़ निक्षेपों से निर्मित है। हिमालय का सबसे बड़ा महत्व दक्षिणी एशिया के क्षेत्रों के लिये हैं जहाँ की जलवायु के लिये यह एक महत्वपूर्ण नियंत्रक कारक के रूप में कार्य करता है। हिमालय की विशाल पर्वत शृंखलायें साइबेरियाई शीतल वायुराशियों को रोक कर भारतीय उपमहाद्वीप को जाड़ों में आधिक ठण्ढा होने से बचाती हैं। यह पर्वत श्रेणियाँ मानसूनी पवनों के मार्ग में अवरोध उत्पान करके इस क्षेत्र में पर्वतीय वर्षा कराती हैं जिस पर इस क्षेत्र का पर्यावरण और अर्थव्यवस्था काफ़ी हद तक निर्भर हैं।
हिमालय की उपस्थिति ही वह कारण है जिसकी वजह से भारतीय उपमहाद्वीप के उन क्षेत्रों में भी उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु पायी जाती है जो कर्क रेखा के उत्तर में स्थित हैं, अन्यथा इन क्षेत्रों में अक्षांशीय स्थिति के अनुसार समशीतोष्ण कटिबंधीय जलवायु मिलनी चाहिए थी। हिमालय की वर्ष-पर्यंत हिमाच्छादित श्रेणियाँ और इनके हिमनद सदावाहिनी नदियों के स्रोत हैं जिनसे भारत, पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश को महत्वपूर्ण जल संसाधन उपलब्ध होते हैं।
वन संसाधनों के रूप में शीतोष्ण कटिबंधीय मुलायम लकड़ी वाली वनस्पति और शंक्वाकार वनों के स्रोत के रूप में जिसका काफ़ी आर्थिक महत्व है।
अन्य विविध वनोपजें जैसे औषधीय पौधे, इत्यादि की प्राप्ति। चरागाह के रूप में हिमालय का महत्व है क्योंकि इसकी घाटियों में नर्म घास वाले क्षेत्र पाए जाते हैं। इन्हें पश्चिमी हिमालय में मर्ग और कुमायूँ क्षेत्र में बुग्याल तथा पयाल के नाम से जाना जाता है।
फूलों की घाटी यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल जैवविविधता स्थल है। जैवविविधता भण्डार के रूप में हिमालय पर्वत काफ़ी महत्वपूर्ण है। कुछ जैव विविधता के प्रमुख क्षेत्र के रूप में फूलों की घाटी तथा अरुणाचल का पूर्वी हिमालय क्षेत्र हैं।
हिमालय के हिमनदों को आज जलवायु परिवर्तन के प्रमुख संकेतक के रूप में भी देखा जा रहा है।
हिमालय क्षेत्र का दक्षिण एशिया के लिये हमेशा से सामरिक महत्व रहा है क्योंकि यह एक प्राकृतिक अवरोध है जो इसके उत्तर से सैन्य आक्रमणों को अल्पसंभाव्य बनाता है।

‘हिन्दुस्तान’ समाचार ने एक सितंबर २०१९ से ‘हिमालय बचाओ, पॉलीथिन हटाओ अभियान’ शुरू किया था। अभियान के प्रति प्रदेश के लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। प्रदेश भर से अनेकों लोगों ने हिमालय को बचाने हेतु शपथ ली। ‘हिन्दुस्तान हिमालय बचाओ-पॉलीथिन हटाओ’ अभियान के तहत आयोजित राज्यस्तरीय भाषण प्रतियोगिता में केवि हाथीबड़कला, देहरादून के अभिलाष सिंह ने बाजी मारी। द्वितीय स्थान पर अल्मोड़ा से अवंतिका भंडारी और तृतीय स्थान पर गार्गी नौड़ियाल रहीं। प्रतियोगिता के विजेताओं को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने पुरस्कृत किया। राज्यस्तर के तीन विजेताओं और उनके अभिभावकों को 21 से 27 हजार रुपये तक के पुरस्कार दिए गए। जिला स्तर पर प्रथम रहे प्रतिभागियों को भी आकर्षक पुरस्कार से नवाजा गया।

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Ghanshyam Chandra

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