Breaking News :
>>मुख्यमंत्री धामी ने किया ओहो रेडियो 89.2 एफएम का शुभारंभ>>सूबे में खुलेगी सहकारी बैंक की 34 नई शाखाएं- डाॅ. धन सिंह रावत>>मतदाताओं के दस्तावेजों का हो तय समय पर सत्यापन- सीईओ>>ग्राम खैनूरी की क्षतिग्रस्त सड़क का मुख्यमंत्री ने लिया तत्काल संज्ञान>>लो बीपी में ज्यादा नमक खाना सही या गलत? जानिए क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट्स>>12 सितंबर को लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत, 11 सितंबर तक करें आवेदन>>2036 ओलंपिक मेजबानी का संकल्प लेकर कावड़ उठाएंगी रेखा आर्या>>कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का शानदार प्रदर्शन, 39 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहा देश>>सावन का पहला सोमवार आज, शिव मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब>>बारिश के साथ बढ़ा डेंगू का खतरा, 40 अस्पतालों में 1,662 बेड किए गए आरक्षित>>बारिश से चारधाम यात्रा प्रभावित, भूस्खलन से यमुनोत्री-गंगोत्री हाईवे कई जगह बंद>>अब जनता बनाएगी एमडीडीए की नई पहचान, मैस्कॉट डिज़ाइन पर मिलेगा ₹50 हजार का इनाम>>कांवड़ यात्रा के दौरान ईंधन एवं रसोई गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश>>करोड़ों की जमीन हड़पने की साजिश का आरोपी सहारनपुर से गिरफ्तार, दून पुलिस की बड़ी कार्रवाई>>डीएम डॉ. आशीष चौहान ने किया स्थलीय निरीक्षण, समयबद्ध व गुणवत्ता से कार्य पूरे करने के दिए निर्देश>>सीआईएमएस कॉलेज में गूँजा नशा मुक्त भारत का संकल्प, युवाओं ने लिया नशे से दूर रहने का प्रण>>देहरादून को मिलेगी नई पहचान, राष्ट्रपति उद्यान का निर्माण अंतिम चरण में>>अब सीधे अफसरों के सामने रखिए अपनी बात, एमडीडीए में हर महीने दो बार लगेगा ‘समाधान दिवस’>>राजस्व वसूली में ढिलाई पर बरतेगी सख्ती, डीएम ने दी कड़ी चेतावनी>>डीएवी (पीजी) कॉलेज में 100 फीट ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज का लोकार्पण
उत्तराखण्डताज़ा खबरेंधार्मिक

उत्तराखंड की सांस्कृतिक, धार्मिक व लोक-परम्पराओं पर आधारित बाल-पर्व, “फूलदेई” प्रकृति व मानव के बीच स्नेह का प्रतीक है

[box type=”shadow” ][/box]

आकाश ज्ञान वाटिका, 13 मार्च 2021, शनिवार, देहरादून। देवभूमि उत्तराखण्ड न केवल प्राकृतिक सम्पदाओं व सौन्दर्य का भंडारण है बल्कि अपनी विशेष प्राकृतिक विरासतों व यहॉं के वासियों के सरल, सौम्य स्वभाव व धार्मिक प्रवृति के लिए भी विशेष रूप से जाना है। देवभूमि उत्तराखण्ड, अपनी कला, संस्कृति व रहन-सहन के लिए देश ही नहीं विदेशों में भी एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। देवी-देवताओं, ऋषि-मुनियों ने भी देवभूमि को अपने वास व तप के लिए उपयुक्त समझा। प्राकृतिक छटा व मनोहारी सौन्दर्य को देखते ही ऐसा लगता है कि ‘पृथ्वी में यदि कहीं स्वर्ग है तो वह यही है।’

उत्तराखण्ड में मौसम के चक्र के अनुरूप, समय-समय पर विविन्न त्यौहार मनाये जाते हैं। प्रत्येक त्यौहार का प्रकृति व मौसम के साथ सीधा-सीधा सम्बन्ध है। यहाँ की प्राचीन सांस्कृतिक व पारम्परिक परम्परायें मुख्य रूप से धर्म व प्रकृति में निहित है। प्रत्येक त्यौहार में प्रकृति का कुछ न कुछ महत्त्व झलकता है।
ऋतुराज बसंत हर किसी के जीवन में नई उमंग लेकर आता है। बसंत ऋतु में ही पेड़ों पर नयी नयी खूबसूरत कलियाँ और डालियों पर तरह-तरह के मनमोहक फूल खिलते हैं। ऋतुराज बसंत के इसी उल्लास व उमंग को देवभूमि के प्रत्येक घर परिवार के साथ साझा करने की एक अनुपम पारम्परिक परंपरा कुमाऊँ व गढ़वाल क्षेत्र में पुरे महीने भर निभाई जाती है, जो फूलदेई (फूल सक्रांति) से शुरू होकर बैशाखी तक अनवरत चलती रहती है। उत्तराखंड की सांस्कृतिक, धार्मिक व लोक-परम्पराओं पर आधारित बाल-पर्व प्रत्येक बर्ष चैत्र मास के प्रथम दिवस (संक्रांति) को मनाया जाने वाला, एक अति महत्वपूर्ण व बसंत ऋतु के आगमन स्वागत का पर्व है – ”फूलदेई”
कुमाऊँ और गढ़वाल के ज्यादातर इलाकों में 8 दिनों तक यह त्यौहार मनाया जाता है लेकिन टिहरी के कुछ इलाकों में एक माह तक भी इस पर्व को मनाने की परंपरा है।

[box type=”shadow” ]“फूलदेई” से एक दिन पहले शाम को बच्चे रिंगाल की टोकरी लेकर फ्यूंली, बुरांस, बासिंग, आडू, पुलम, खुबानी के फूलों को इकट्ठा करते हैं। अगले दिन सुबह नहा-धोकर वह घर-घर जाकर लोगों की सुख-समृद्धि के लिए पारंपरिक गीत गाते हुए, देहरियों में फूल बिखेरते हैं। इस अवसर पर कुमाऊँ के में घरों देहरियों में ऐपण बनाने की परंपरा भी है।

‘फूलदेई, छम्मा देई,
दैणी द्वार, भरी भकार’
घोघा माता फुल्यां फूल,
दे-दे माई दाल चौंल’

फूलदेई के दौरान घर की देहरी पर फूल डालने आये नन्हें व प्यारे बच्चों को लोग उपहार स्वरुप दाल, चावल, आटा, गुड़, घी और दक्षिणा दान करते हैं। पूरे माह में यह सब जमा किया जाता है। इसके बाद घोघा देवी की पुजा की जाती है। चावल, गुड़, तेल से मीठा भात बनाकर प्रसाद के रूप में सबको बांटा जाता है। कुछ क्षेत्रों में बच्चे घोघा की डोली बनाकर देव डोलियों की तरह घुमाते हैं। अंतिम दिन उसका पूजन किया जाता है।[/box]

आधुनिकता के इस दौर में प्रकृति व मानव के बीच स्नेह के प्रतिक त्यौहारों का महत्त्व धीरे-धीरे कम होता जा रहा है, जो शुभ संकेत नहीं है। हमें अपने पूर्वजों द्वारा प्रदत्त रीति-रिवाजों, तीज-त्यौहारों का मन से सम्मान करना चाहिए तथा जीवन के लिए इनकी जरूरत को समझते हुए आपसी भाईचारे के साथ मिलजुल कर अपने लोक-पर्वों को मानना चाहिए, तभी हमारी भावी पीढ़ी भी संस्कारवान बनेगी।

[highlight]आकाश ज्ञान वाटिका परिवार की ओर से ‘देवभूमि उत्तराखण्ड की संस्कृति का संवाहक, प्रकृति एवं मानव के बीच प्रेम व पारस्परिक सम्बंधों का प्रतीक, बाल लोक पर्व फूलदेई/फूल संक्रांति’ की समस्त सम्मानित, स्नेही जनों को हार्दिक शुभकामनायें एवं बहुत बहुत बधाई।[/highlight]

Loading

Ghanshyam Chandra

AKASH GYAN VATIKA (www.akashgyanvatika.com) is one of the leading and fastest growing web News Portal which provides latest information about the Political, Social Activities, Environmental, entertainment, sports, General Awareness etc. I, GHANSHYAM CHANDRA, EDITOR, AKASH GYAN VATIKA provide News and Articles about the abovementioned subject and also provide latest/current state/national/international News on various subject.
error: Content is protected !!