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निष्क्रिय वन पंचायतों में निर्वाचन कराकर सक्रिय करने के लिए, मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी नैनीताल सविन बंसल को दी शाबासी

आकाश ज्ञान वाटिका। हल्द्वानी, 13 फरवरी 2020 (सूचना)।

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मानव सभ्यता के प्रारम्भ से ही मनुष्य का जंगलों से गहरा रिश्ता रहा है। हवा, पानी तथा भोजन जंगलों से जुटाए जाते रहे हैं। पर्वतीय ईलाकों में जीवनयापन का मुख्य आधार खेती और पशुपालन रहा है। इन दोनों का आधार स्थानीय वनों से प्राप्त होने वाली उपज है। जलाने के लिए ईंधन की पूर्ति, खेती में प्रयुक्त होने वाले औजार, खाद हेतु पत्तियाँ, जड़ी-बूटी, जानवरों के लिए चारा और घास, घर बनाने के लिए लकड़ी के सबसे बड़े स्रोत स्थानीय वन ही रहे हैं।……………..जिलाधिकारी सविन बंसल[/box]

अल्प समय में जनपद की सभी वन पंचायतों में सरपंचो का निर्वाचन कराकर नव निर्वाचित सरपंचो को कार्यभार दिलाने की दिशा में युवा जिलाधिकारी श्री सविन बंसल की पहल एवं महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना सूबे के मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा की गयी है। जनहित के कार्यों के प्रति सजग एवं तत्पर जिलाधिकारी श्री बंसल ने विगत जून में जब जिले के जिलाधिकारी का कार्यभार संभाला तो उन्होंने पाया कि जिले में केवल 70 वन पंचायतों में ही वन पंचायत सरपंच थे। शेष वन पंचायतों में निर्वाचन प्रक्रिया न होने के चलते 415 वन पंचायते बिना सरपंचो के निष्क्रिय पड़ी थी। वन पंचायतों के महत्व को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारियों को निर्देश दिए थे कि वे तत्परता के साथ रिक्त पड़ी वन पंचायतों में प्राथमिकता के आधार पर निर्वाचन प्रक्रिया सम्पन्न कराये। जिलाधिकारी की पहल का यह असर हुआ कि चार महीने के अल्पकाल में ही जनपद की सभी 485 वन पंचायतों में सरपंचो का चुनाव सम्पन्न हुआ और सभी वन पंचायतों को निर्वाचित सरपंच मिल गये।
[box type=”shadow” ]जिलाधिकारी की इस मेहनत और कार्यकुशलता को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उन्हें शाबासी दी है और कहा है कि उत्तराखण्ड के सभी जनपदों में नैनीताल की तर्ज पर निष्क्रिय वन पंचायतों में निर्वाचन कराकर वन पंचायतों को सक्रिय किया जायेगा। [/box]
जिलाधिकारी श्री सविन बंसल ने बताया कि वन पंचायतों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर पहल प्रारंभ कर दी गयी है। पिछले पांच साल से डम्प लीसा राॅयल्टी का भुगतान भी वन पंचायतों को नहीं किया जा रहा था। उन्होंने बताया कि लगभग वर्षों के बाद डम्प लीसा राॅयल्टी में से 20 लाख का भुगतान तीस वन पंचायतों के सरपंचो को किया गया। भविष्य में भी यह भुगतान जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि वन पंचायतों को कार्यदायी संस्था के रूप में निर्माण कार्यों के लिए विधायक निधि, सांसद निधि, मनरेगा के माध्यम से कार्य आवंटित किये जायेंगे। उन्होंने बताया कि वन पंचायत सरपंच सरकार की योजनाओं के प्रचार-प्रसार के साथ ही सम्बन्धित क्षेत्रों के लोगो तक पहुॅचाने में सरकार व शासन की मदद करेंगे। वन पंचायतों में महिलाओं के लिए निर्धारित पचास प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था भी पुरजोर तरीके से बढ़ायी जायेगी। उन्होंने बताया कि आरक्षित वनों में वनाग्नि रोकने के लिए सरकारी प्रयास तो किए जाते हैं, लेकिन जो अनारक्षित वन हैं, जिनका क्षेत्रफल भी अधिक है में वनाग्नि रोकने के लिए वन पंचायते सक्रियता से कार्य करेंगी,इसके लिए उनको विशेष सुविधाएं एवं प्रशासनिक सहयोग दिया जायेगा। जायका के माध्यम से वन पंचायतों में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से कार्य कराये जायेंगे। इसके लिए जनपद की सभी वन पंचायतों में महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन भी किया जायेगा। प्रशासन वन पंचायतों के नए सिरे से सीमांकन की दिशा में भी कार्य करेगा। वनो के संवर्धन, संरक्षण, वर्षा जल संरक्षण हेतु नई कार्य योजना भी बनाकर धरातल पर कार्य किया जायेगा।

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Ghanshyam Chandra

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