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समस्त देशवासियों को नौसेना दिवस की हार्दिक शुभकामनायें

समस्त देशवासियों को नौसेना दिवस की हार्दिक शुभकामनायें

NAVY DAY

भारत की समुन्द्री सीमा की सुरक्षा का जिम्मा भारतीय नौसेना के कंधों पर है जो वह हमेशा बड़े ही जिम्मेदारी के साथ निभाते आ रही है। वैसे तो नौसेना  की शुरूवात 5 सितंबर 1612 को हुई थी, जब ईस्ट इंडिया कंपनी के युद्धपोतों का पहला बेड़ा सूरत बंदरगाह पर पहुँचा था और 1934 में ‘‘रॉयल इंडियन नेवी’’ की स्थापना हुई थी, लेकिन हर साल चार दिसंबर को ‘‘भारतीय नौसेना दिवस’’ मनाए जाने की वजह इसके गौरवमयी इतिहास से जुड़ी हुई है। भारतीय नौसेना दिवस का सम्बन्ध सन् 1971 के भारत-पाक युद्ध से है, जिसमें भारत ने पाकिस्तान पर न केवल विजय हाॅसिल की थी, बल्कि पूर्वी पाकिस्तान को आजाद कराकर अलग राष्ट्र ‘बांग्लादेश’ का दर्जा दिलाया था। भारतीय नौसेना अपने इस गौरवमयी इतिहास की याद में प्रत्येक साल चार दिसंबर को नौसेना दिवस मनाती है। आईएनएस ‘विक्रांत’ भारतीय नौसेना पहला विमानवाहक युद्धपोत था, जिसे 1961 में सेना में शामिल किया गया था। बाद में आईएनएस ‘विराट’ को 1986 में शामिल किया गया, जो भारत का दूसरा विमानवाहक पोत बन गया। आज भारतीय नौसेना के पास एक बेड़े में पनडुब्बियां, विध्वंसक युद्धपोत, फ्रिगेट जहाज, कॉर्वेट जहाज, प्रशिक्षण पोत, महासागरीय एवं तटीय माइनस्वीपर और अन्य कई प्रकार के पोत हैं। इसके अलावा भारतीय नौसेना की उड्डयन सेवा कोच्चि में आईएनएस ‘गरुड़’ के शामिल होने के साथ शुरू हुई। इसके बाद कोयम्बटूर में जेट विमानों की मरम्मत व रखरखाव के लिए आईएनएस ‘हंस’ को शामिल किया गया। भारतीय नौसेना ने जल सीमा में कई बड़ी कार्रवाइयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिनमें प्रमुख है जब 1961 में नौसेना ने गोवा को पुर्तगालियों से स्वतंत्र करने में थल सेना की मदद की। इसके अलावा 1971 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ा तो नौसेना ने अपनी उपयोगिता साबित की। भारतीय नौसेना ने देश की सीमा रक्षा के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा शांति कायम करने की विभिन्न कार्यवाहियों में भारतीय थल सेना सहित भाग लिया। सोमालिया में संयुक्त राष्ट्र संघ की कार्रवाई इसी का एक हिस्सा थी। देश के अपने स्वयं के पोत निर्माण की दिशा में आरंभिक कदम उठाते हुए भारतीय रक्षा मंत्रालय ने बंबई (मुंबई) के मजगांव बंदरगाह को 1960 में और कलकत्ता (कोलकाता) के गार्डन रीच वर्कशॉप (जीआरएसई) को अपने अधिकार में लिया। वर्तमान में भारतीय नौसेना का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है और यह मुख्य नौसेना अधिकारी ‘एडमिरल’ के नियंत्रण में होता है। भारतीय नौ सेना तीन क्षेत्रों की कमान (पश्चिम में मुंबई, पूर्व में विशाखापत्तनम और दक्षिण में कोच्चि) के तहत तैनात की गई है, जिसमें से प्रत्येक का नियंत्रण एक फ्लैग अधिकारी द्वारा किया जाता है।
4 दिसंबर, 2016 को देश भर में ‘नौसेना दिवस’ (NAVY DAY) मनाया गया। पूरे सप्ताह तक विभिन्न कार्यक्रम किये जाते हंै इसलिए इसे Navy Week केरूप में मनाया जाता है। यह दिवस वर्ष 1971 की लड़ाई में भारतीय नौसेना की पाकिस्तानी नौसेना पर विजय की स्मृति में मनाया जाता है।

4 दिसंबर, 1971 को भारतीय नौसेना ने ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के तहत कराची हार्बर को पूरी तरह तबाह कर दिया था। इस ऑपरेशन में भारतीय नौसेना ने पहली बार एंटी-शिप मिसाइल का इस्तेमाल किया था।

इस ऑपरेशन के तुरंत बाद ‘ऑपरेशन पॉयथन’ लांच किया गया। जिसमें पाकिस्तान नौसेना को काफी नुकसान हुआ था।
नौसेना दिवस (NAVY DAY) प्रत्येक वर्ष 4 दिसम्बर को मनाया जाता है। यह 1971 की जंग में भारतीय नौसेना की पाकिस्तानी नौसेना पर जीत की याद में मनाया जाता है।

3 दिसंबर को भारतीय सेना पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में पाक सेना के खिलाफ जंग की शुरुआत कर चुकी थी। वहीं, ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के तहत 4 दिसंबर, 1971 को भारतीय नौसेना ने कराची नौसैनिक अड्डे पर भी हमला बोल दिया था। इस यु्द्ध में पहली बार जहाज पर मार करने वाली एंटी शिप मिसाइल से हमला किया गया था। नौसेना ने पाकिस्तान के तीन जहाज नष्ट कर दिए थे। इसमें भारतीय नौसेना का आई.एन.एस. खुकरी भी पानी में डूब गया था। नौसेना प्रमुख एडमिरल एस.एम. नंदा के नेतृत्व में ऑपरेशन ट्राइडेंट का प्लान बनाया गया था। इस टास्क की जिम्मेदारी 25वीं स्क्वॉर्डन कमांडर बबरू भान यादव को दी गई थी। 4 दिसंबर, 1971 को नौसेना ने कराची स्थित पाकिस्तान नौसेना हेडक्वार्टर पर पहला हमला किया था। एम्यूनिशन सप्लाई शिप समेत कई जहाज नेस्तनाबूद कर दिए गए थे। इस दौरान पाक के ऑयल टैंकर भी तबाह हो गए। भारतीय नौसैनिक बेड़े को कराची से 250 किमी की दूरी पर रोका गया और शाम होने तक 150 किमी और पास चले जाने का आदेश दिया गया। हमला करने के बाद सुबह होने से पहले तेजी से बेड़े को 150 किमी वापस आ जाने को कहा गया, ताकि बेड़ा पाकिस्तानी बमवर्षकों की पहुंच से दूर हो जाए। हमला भी रूस की ओसा मिसाइल बोट से किया किया। ऑपरेशन ट्राइडेंट के तहत पहले हमला निपट, निर्घट और वीर मिसाइल बोट्स ने किया। सभी बोट्स चार-चार मिसाइलों से लैस थीं। बबरू भान यादव खुद निपट बोट पर मौजूद थे। पहले पी.एन.एस. खैबर, उसके बाद पीएनएस चैलेंजर और पीएनएस मुहाफिज को मिसाइल से बर्बाद कर पानी में डुबो दिया।

WE SALUTE INDIAN NAVAL PERSONNEL

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Ghanshyam Chandra

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