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भारतीय नौसेना – एक साहसिक व चुनौतीपूर्ण भविष्य

नौसेना दिवस—2013
के उपलक्ष में ‘मातृ—भूमि के प्रहरी’ जॉबाज नौ—सैनिकों को
शत्—शत् नमन।

 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान, भारतीय नौसेना ने जिस अद्म्य साहस व वीरता का परिचय देकर पाकिस्तानी नौसेना मुख्यालय,        कराची पर हमला करने के साथ-साथ विशाखापटनम समुद्रीय क्षेत्र में पाकिस्तानी पनडुब्बी को समुद्र में डूबो दिया। उन साहसिक          क्षणों की याद व शहीद नौसैनिकों की याद में ‘नौसेना दिवस’ 4 दिसम्बर को मनाया जाता है।

भारतीय नौसेना (इण्डियन नेवी), भारतीय सशस्त्र सेनाओ का एक प्रमुख अंग है, जो देश की समुद्री सीमाओं को सुरक्षित रखने के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत व बचाव कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरान्त भी प्रारम्भिक कुछ वर्षो तक भारतीय नौसेना में कई ब्रिटिश अधिकारी कार्यरत थे। 22 अप्रैल 1958 में भारतीय नौसेना केा वाइस एडमिरल रामदास कटारी के रूप में प्रथम भारतीय अधिकारी, नौसेना प्रमुख (चीफ आफ नेवल स्टाफ) के रूप में मिले। तब से आज तक भारतीय नौसेना ने भारतीय तटों की सुरक्षा के साथ-साथ आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में सराहनीय व साहसीय कार्य किये हैं। भारतीय नौसेना का सामना सर्वप्रथम पुर्तगीज नौसेना के साथ गोवा को पुर्तगीज से मुक्त कराने के दौरान हुआ। यद्यपि 1962 का युद्ध मुख्य रूप से उत्तरी हिमालयी क्षेत्र से लड़ा गया, परन्तु इस दौरान में भारतीय नौसेना का रक्षक कवच व निगरानी काफी अहम थी। 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान भारतीय नौसेना ने पश्चिमी व पूर्वी पाकिस्तान पर अपनी ताकत दिखाकर पाकिस्तानी सेना के इरादे नाकाम कर दिये। एडमिरल एस.एम. नन्दा के नेतृत्व में भारतीय नौसेना ने सफलतापूर्वक पश्चिमी व पूर्वी पाकिस्तान पर अपने जॉबांज नौसैनिकों के माध्यम से कड़ा अवरोध खड़ा कर दिया। इस दौरान एडमिरल नन्दा के कार्यकाल में भारतीय नौसेना में बड़ा बदलाव आया तथा ताकत में काफी इजाफा हुआ। 3 व 4 दिसम्बर 1971 की मध्यरात्रि को विशाखापटनम के समुद्री क्षेत्र में पाकिस्तान की पनडुब्बी गाजी को भारतीय युद्ध पोत आइएनएस राजपूत द्वारा समुद्र में डुबा दी गई। 4 दिसम्बर 1971 को ‘आपरेशन ट्रिडेन्ट’ के दौरान भारतीय नौसेना द्वारा पाकिस्तानी नौसेना मुख्यालय कराची पर ताबड़तोड़ हमला कर उनके युद्धपोतों को डुबा दिया गया। ‘आपरेशन ट्रिडेन्ट’ के तुरन्त बाद ‘आपरेशन पाइथन’ की शुरूआत 8 दिसम्बर 1971 को हुई। जिससे पाकिस्तानी नौसेना की ताकत का पतन और अधिक हो गया। इसके अतिरिक्त ‘आपरेशन कैक्टस’ के माध्यम से भारतीय नौसेना पोत गोदावरी तथा भारतीय नौसेना कमांडोज द्वारा समुद्री लुटेरों के चंगुल से बन्धक जहाज को छुड़ाकर, लुटेरों को पकडने में सफलता हॉसिल की। सन् 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भी भारतीय नौसेना की भूमिका अहम रही। ‘आपरेशन तलवार’ में पश्चिमी व पूर्वी नौसेना बेड़ों के युद्धपोतों को अरब सागर पर तैनात कर दिया गया, जिससे पाकिस्तानी नौसेना के मनसूबे नाकाम हो गये तथा भारत के समद्री व्यापार के रास्तों पर भी पाकिस्तानी नौसेना का कोई प्रभाव नहीं पड़ सका। इसके साथ ही भारतीय नौसेना के वायु विंग द्वारा मैरीन कमांडोज को भारतीय थल सेना के सहयोग के लिए उतारा गया। सन् 2001-2002 में भारतीय सेना के संयुक्त अभ्यास ‘आपरेशन पोखरन’ के दौरान एक दर्जन से भी ज्यादा नौसेना युद्धपोतों को उत्तरी अरब सागर में तैनात कर भारतीय नौसेना ने अपनी ताकत का आगाज किया। भारतीय नौसेना की भूमिका, प्राकृतिक आपदा के समय, हमेशा ही काफी महत्वपूर्ण, साहसिक व सराहनीय रही है। बाढ़, सुनामी, चक्रवात के दौरान भी अपनी जान की प्रवाह किये बगैर, कई पीड़ि़तों को बचाकर उन्हें सहायता प्रदान की। सन् 2004 में हिन्द महासागर में आये सुनामी के दौरान भारतीय तटीय क्षेत्र व मालदीव के प्रभावित क्षेत्रों में राहत व बचाव कार्य किये। इस दौरान भारतीय नौसेना द्वारा आन्ध्र प्रदेश व तमिलनाडु में आपरेशन मलाड, अंडमान निकोबार में ‘आपरेशन सी वेव्स’ व इंडोनेशिया मे ‘आपरेशन गम्भीर’ के माध्यम से नौसेना द्वारा दो दर्जन से ज्यादा युद्ध पोतों, दर्जनों हैलीकाप्टर व पांच हजार से भी ज्यादा नौसैनिकों को राहत व बचाव कार्य में लगाया गया। यह सबसे लम्बा व तेजी गति से चला राहत व बचाव कार्य था जिसमें नौसेना बचाव दल व पोंत 12 घंटे के अन्दर ही प्रभावित पड़ोसी देशों तक पहुँच गये। ‘आपरेशन सुकून’ के माध्यम से लेबनान से 2286 भारतीयों तथा 69 नेपालियों को लाया। इसके अतिरिक्त भी भारतीय नौसेना द्वारा देश व विदेशों में कई राहत व बचाव कार्यो में महत्वपूर्ण भमिका निभाई गयी। आज भी भारतीय नौसेना के जॉबांजों के दिलों में सुरक्षा, देश-प्रेम, मानवता का जो मिश्रण घुला है वह हम सबके लिए प्रेरणादायी है। भारतवर्ष अनेकता में एकता का प्रतीक है। इसी गुण को आत्मसात कर भारतीय नौसेना ने भी अनेकता में एकता के मंत्र को सुरक्षित रखा है। बड़ा गर्व होता है इन नौसैनिकों पर जो शीतल व पवित्र समुद्र के जल में स्थित पोत में एक साथ भारत के कोने-कोने से आकर रहते हुए अपना कर्तव्य पालन करते है। ‘हम सब एक हैं; लक्ष्य हमारा एक है’, यही शिक्षा देते हैं हमें नौसैनिक।

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Ghanshyam Chandra

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