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खेल-जगत

उत्तराखंड का ये सपना हुआ पूरा, आठ माह की कोशिश से खत्म हुआ 18 साल का सूखा

देहरादून: अपने खेल में सूबे का प्रतिनिधित्व करना हर खिलाड़ी का सपना होता है। राज्य गठन के बाद प्रदेश के क्रिकेटरों ने भी उत्तराखंड की टीम से रणजी ट्रॉफी खेलने का सपना देखा। वर्ष 2002 में जब बीसीसीआइ ने नवोदित झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड को मान्यता देने का मन बनाया, तब सूबे की क्रिकेट एसोसिएशनों की खींचतान के चलते यह मसला अटक गया। अब कहीं जाकर एसोसिएशनों की यह खींचातान समाप्त होती नजर आ रही है। यह खेल मंत्री अरविंद पांडेय के ही अथक प्रयास रहे कि जो काम 18 वर्ष से नहीं हो पाया, वह आठ माह में ही पूरा हो गया। चाहे वह एसोसिएशनों के साथ एक राय बनाना हो अथवा बीसीसीआइ के दरवाजे पर लगातार दस्तक देना, खेल मंत्री की इस विषय में विशेष रुचि व सक्रियता के चलते अब उत्तराखंड की क्रिकेट प्रतिभाओं का अपने प्रदेश से खेलने का सपना साकार होने जा रहा है।

राज्य गठन के बाद उत्तराखंड के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा राष्ट्रीय स्तर पर दिखाने का अवसर मिला। अन्य खेलों में तो इन प्रतिभाओं ने अपना लोहा भी मनवाया लेकिन क्रिकेट में ऐसा नहीं हुआ। वर्ष 2002 में एसोसिएशनों के आपसी झगड़े के चलते यह उम्मीद धराशायी हो गई। सभी क्रिकेट एसोसिएशन खुद की मान्यता के लिए एक-दूसरे की टांग खींचती रही। वर्ष 2011 में इस दिशा में सकारात्मक प्रयास हुआ। सभी एसोसिएशनों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया लेकिन सरकार को इसमें सफलता नहीं मिली।

साल 2016 में उत्तराखंड को बीसीसीआइ से मान्यता देने का विषय एफलिएशन कमेटी के सुपुर्द किया गया। इस समिति के दो सदस्य यानी आंशुमान गायकवाड़ और प्रकाश दीक्षित ने उत्तराखंड की क्रिकेट एसोसिएशनों से वार्ता कर उन्हें एक मंच पर आने की सलाह भी दी। बावजूद इसके एसोसिएशन तैयार नहीं हुई। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत की मुख्यमंत्री के रूप में ताजपोशी के बाद एक बार फिर उम्मीदें जगी। कारण मुख्यमंत्री स्वयं एक क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़े थे। मुख्यमंत्री ने बीते वर्ष नवंबर में इसका जिम्मा खेल मंत्री अरविंद पांडे को सौंपा। उन्होंने सभी एसोसिएशनों को एक मंच पर लाने के प्रयास शुरू किए। इनसे बैठकें भी हुई लेकिन हर बार कोई न कोई इससे कन्नी काट जाता। बावजूद इसके खेल मंत्री ने हिम्मत नहीं हारी।

फरवरी 2018 में उन्होंने बीसीसीआइ की प्रशासक समिति के अध्यक्ष विनोद राय को उत्तराखंड को मान्यता देने के संबंध में पत्र लिखा। इसके बाद वे लगातार बीसीसीआइ के संपर्क में रहे। बीते रोज भी उन्होंने बीसीसीआइ अध्यक्ष विनोद राय से मुलाकात की। इसके बाद सभी एसोसिएशनों के पदाधिकारियों ने बीसीसीआइ के सामने कंसेंसस कमेटी में शामिल होने पर सहमति जताई। इसके बाद सोमवार को बीसीसीआइ ने कमेटी के गठन संबंधी आदेश जारी कर दिए।

18 का आंकड़ा रहा शुभ 

उत्तराखंड क्रिकेट के लिए 18 का आंकड़ा काफी शुभ रहा है। देखा जाए तो राज्य गठन के 18 वें वर्ष यानी वर्ष 2018 में उत्तराखंड को 18 जून को ही बीसीसीआइ से मान्यता मिली है। इसी वर्ष यानी 2018 में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में अफगानिस्तान और बांग्लादेश के बीच पहला अंतर्राष्ट्रीय मैच भी हुआ।

एसोसिएशनों पर भी कसेगी नकेल 

खेल मंत्री अरविंद पांडे ने साफ किया है कि भले ही कंसेंसस कमेटी में चार एसोसिएशनें हैं लेकिन सब पर नजर रखी जाएगी। सभी एसोसिएशन के रिकॉर्ड तलब किए गए हैं। उन्होंने कहा कि जो अच्छा काम करेगा उसका पूरा सहयोग किया जाएगा। जिसने गलत रिपोर्ट दी है और गलत काम किया है उसको कमेटी से हटाया भी जाएगा और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।

नई दिल्ली में इन लोगों ने रखा था बीसीसीआइ के सामने अपना पक्ष 

दिल्ली में बीसीसीआइ अध्यक्ष से मुलाकात के दौरान प्रदेश की चार एसोसिएशन के पंद्रह सदस्यों ने मुलाकात की। इनमें यूनाइटेड क्रिकेट एसोसिएशन के संजय गुसाईं, रोहित चौहान व अवनीश वर्मा, क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के महिम वर्मा, मनोज रावत, राजेश तिवारी व रवि वर्मा, उत्तरांचल क्रिकेट एसोसिएशन के चंद्रकांत आर्य, प्रदीप सिंह, आरएस चौहान व मोहन सिंह बोहरा, उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन के दिव्य नौटियाल, रामशरण नौटियाल, अंजू तोमर व अशोक शामिल थे।

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Ghanshyam Chandra

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