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उत्तराखण्ड

बीकेटीसी में ‘कामचलाऊ’ नहीं, ‘फुलटाइम अफसर’ की नियुक्ति करे सरकार- विकेश नेगी

रुद्रप्रयाग के डीएम जिला संभालेंगे या बीकेटीसी

समिति में कई रिक्त पद, सीईओ तय नहीं कर पा रही सरकार

देहरादून। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति का मामला अभी अधर में लटका है। चारधाम यात्रा को देखते हुए सरकार ने इस पद की अतिरिक्त जिम्मेदारी रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा को सौंपी है। सवाल उठ रहे हैं कि जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग को संभालेंगे या बीकेटीसी का कार्यभार। इसके बावजूद समिति में कई अहम पद अब भी रिक्त है। सोशल एक्टिविस्ट एडवोकेट विकेश नेगी का कहना है कि राज्य सरकार के पास अफसरों की फौज है। ऐसे में बीकेटीसी में ‘कामचलाऊ’ व्यवस्था करना समझ से परे है। उन्होंने कहा मेरी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मांग है कि बीकेटीसी जैसी महत्वपूर्ण संस्था में सरकार को सीईओ पद पर किसी राजपत्रित अधिकारी (वरिष्ठ पीसीएस या कनिष्ठ आईएएस) की पूर्णकालिक नियुक्ति करनी चाहिए।

सामाजिक कार्यकर्ता व अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने कहा कि विशाल मिश्रा के पास अब दोहरी जिम्मेदारी है, रुद्रप्रयाग की कलेक्टरी और बीकेटीसी का सीईओ। केदारनाथ धाम रुद्रप्रयाग में स्थित है, जहां इस समय सबसे अधिक यात्री पहुंच रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या एक अधिकारी दोनों पदों को प्रभावी ढंग से संभाल पाएंगे, खासकर जब बदरीनाथ चमोली जिले में है। कई अधिकारी इस पद पर तैनाती से कतराते दिख रहे हैं। बीकेटीसी में केवल सीईओ पद ही नहीं, एडिशनल सीईओ, डिप्टी सीईओ, कार्याधिकारी (केदारनाथ) जैसे कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद भी रिक्त हैं। वहीं, मंदिर एक्ट में संशोधन कर उपाध्यक्ष के दो पद सृजित किए और पार्टी नेताओं को नियुक्त किया, लेकिन प्रशासनिक रिक्तियों को भरने में गंभीरता नहीं दिख रही।

सामाजिक कार्यकर्ता व अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने सूचना अधिकार के तहत बीकेटीसी बोर्ड की 9 जुलाई 2025 की बैठक के प्रस्तावों की जानकारी ली। बोर्ड ने सीईओ की अर्हताओं में संशोधन का प्रस्ताव पारित किया, जिसमें 2023 की सेवा नियमावली में निर्धारित प्रथम श्रेणी राजपत्रित अधिकारी की अनिवार्यता को “एकांगी” और “अनुकूल नहीं” बताते हुए हटाने की बात कही गई। बोर्ड ने तर्क दिया कि पहले 1985 की नियमावली में केवल स्नातक डिग्री पर्याप्त थी।

सामाजिक कार्यकर्ता व अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने कहा कि देश के अन्य प्रमुख श्राइन बोर्डों में आईएएस अधिकारियों को सीईओ बनाया जाता है ताकि प्रबंधन चुस्त-दुरुस्त रहे। उन्होंने बीकेटीसी बोर्ड पर आरोप लगाया कि वह इन धामों में मात्र स्नातक डिग्रीधारी को सीईओ बनाना चाहता है, जो प्रशासनिक गड़बड़ी पैदा कर सकता है। उन्होंने विरोध की चेतावनी भी दी। बोर्ड ने एक अन्य प्रस्ताव में विशेष पूजाओं के लिए न्यूनतम 11 लाख रुपये की दर निर्धारित करने की बात कही, जिसे नेगी ने धार्मिक स्थलों में व्यावसायिकता बढ़ावा देने वाला बताया।

सामाजिक कार्यकर्ता व अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने कहा कि चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में बीकेटीसी जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में पूर्णकालिक, योग्य और अनुभवी प्रशासनिक नेतृत्व की कमी चिंताजनक है। शासन सूत्रों के अनुसार नए सीईओ की नियुक्ति की कवायद चल रही है, जिसमें इस बार पीसीएस अधिकारी को तैनात किए जाने की संभावना है। धामों की पवित्रता, श्रद्धालुओं की सुविधा और कुशल प्रबंधन को बनाए रखने के लिए शासन को जल्द स्थायी और योग्य समाधान निकालना होगा, ताकि आस्था के इन केंद्रों की व्यवस्था पर कोई आंच न आए।

गौरतलब है कि चारधाम यात्रा 19 अप्रैल से शुरू हो रही है। इसके बावजूद बीकेटीसी में सीईओ पद को लेकर उठे विवाद और प्रशासनिक रिक्तियों ने सुविधाओं और व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्ष 2024 में शासन ने मंडी समिति के सचिव विजय प्रसाद थपलियाल को बीकेटीसी का सीईओ बनाकर कई को चौंका दिया था। सेवा नियमावली 2023 के अनुसार सीईओ पद के लिए प्रथम श्रेणी राजपत्रित अधिकारी (वरिष्ठ पीसीएस या कनिष्ठ आईएएस) की अर्हता अनिवार्य थी, लेकिन थपलियाल द्वितीय श्रेणी के अधिकारी भी नहीं थे। उनके कार्यकाल में केदारनाथ रूप छड़ी को बिना समिति की पूर्ण स्वीकृति के महाराष्ट्र के नांदेड़ ले जाने, पुजारियों की अनधिकृत नियुक्ति, हेली सेवा भुगतान और अन्य मुद्दों पर आरोप लगे।सरकार ने मार्च 2026 में थपलियाल की प्रतिनियुक्ति समाप्त कर उन्हें मूल विभाग कृषि उत्पादन मंडी समिति, देहरादून वापस भेज दिया।

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Ghanshyam Chandra

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