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देहरादून में सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रभावी व स्वैच्छिक रूप से अंकुश लगाने के लिए नगर निगम स्तर पर चल रहा है अभियान

वार्ड ५६ (धर्मपुर – नेहरू कॉलोनी) में चलाया प्लास्टिक के खिलाफ अभियान

आकाश ज्ञान वाटिका। बुधवार, १८ सितम्बर। पॉलीएथिलीन या पॉलीथीन सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला प्लास्टिक है। वर्तमान में इसका वार्षिक वैश्विक उत्पादन लगभग आठ करोड़ टन है। इसका मुख्य उपयोग पैकेजिंग जैसे कि प्लास्टिक के थैले, प्लास्टिक फिल्में, पतली परत, बोतल व अन्य पात्र बनाने में होता है।

प्लास्टिक से बनी वस्तुओं का जमीन या जल में इकट्ठा होना प्लास्टिक प्रदूषण कहलाता है जिससे वन्य जन्तुओं, मानव – जीवन के साथ साथ पर्यावरण पर भी बुरा प्रभाव पडता है। विभिन्न स्वरूपों में मिलने वाली पॉलीथिन पर्यावरण को काफी नुकसान पहुँचा रही है। यदि इस पर समय रहते रोक नहीं लग पाई तो इसके पर्यावरण को भयानक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। पॉलीथिन के प्रयोग से सांस और त्वचा संबंधी रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे कैंसर का भी खतरा बढ़ रहा है। नष्ट न होने के कारण यह भूमि की उर्वरा शक्ति को खत्म कर रही है। यदि इसे कई सालों तक भी जमीन में दबाए रखा जाए यह तब भी नहीं गलती है। पॉलीथिन गिरते भूजल स्तर की एक बड़ी वजह साबित हो रही है। यदि हम पॉलीथिन को जलाते हैं तो इससे निकले वाला धुआँ ओजोन परत को नुकसान पहुँचाता जो ग्लोबल वार्मिंग का बड़ा कारण है। पॉलीथिन का कचरा जलाने से कार्बन डाईआक्साइड, कार्बन मोनोआक्साइड एवं डाईआक्सींस जैसी विषैली गैस उत्सर्जित होती हैं। इनसे साँस, त्वचा आदि की बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है। सीवर जाम होने का सबसे बड़ा कारण पॉलीथिन है।
अतः पर्यावरण को दूषित होने से बचाने के लिए कपड़ा, जूट, कैनवास, नायलान और कागज के बैग का इस्तेमाल सबसे अच्छा विकल्प है।

एक बार इस्तेमाल कर फेंके दिए जाने वाले अर्थात सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगाने के लिए सरकार ने युद्ध स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। केंद्र सरकार द्वारा अपने प्रत्येक मंत्रालय को इसकी जिम्मेदारी सौंप दी गई है। रेलवे मंत्रालय ने दो अक्टूबर से सिंगल यूज प्लास्टिक पर पाबंदी लगाने का फैसला किया है। वहीं भूतल परिवहन मंत्रालय ने भी देश भर के राजमार्गों के आसपास जमा प्लास्टिक को इकट्ठा करने का अभियान शुरू कर दिया है। सभी मंत्रालयों में सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पाबंदी लगेगी। इस कचरे का इस्तेमाल सीमेंट के भट्ठों और सड़कों को बनाने में किया जाएगा।

उत्तराखण्ड की राजधानी, देहरादून में सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रभावी व स्वैच्छिक रूप से अंकुश लगाने के लिए नगर निगम हर स्तर पर कार्यक्रम चला रहा है। इस क्रम में नगर निगम देहरादून ने एक अनोखी पहल करते, हुए शाम पाँच बजे से सात बजे तक प्लास्टिक दान अभियान की शुरुआत की है।
यह अभियान पार्षदों ने अपने-अपने क्षेत्रों में कार्मिकों व आम जान सहभागिता के माध्यम से चलाया है। इस दौरान लोगों ने घरों में प्रयोग होने वाले सिंग यूज प्लास्टिक (पॉलीथिन, प्लेट, कप, गिलास आदि) को दान स्वरूप दिया। पहले दिन के अभियान में कुल 40 किलो प्लास्टिक एकत्रित किया गया। यह अभियान इसी तरह रोजाना 20 सितंबर तक चलेगा। महापौर सुनील उनियाल गामा ने कहा कि अभियान के दौरान लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। ताकि वह स्वैच्छिक रूप से प्लास्टिक का परित्याग कर सकें।

नगर नगम देहरादून के वार्ड ५६ के पार्षद अमित भण्डारी ने भी नगर निगम के कुछ कर्मचारियों एवं क्षेत्रवासियों के साथ मिलकर प्लास्टिक के खिलाफ अभियान चलाया।

वार्ड ५६ के पार्षद अमित भंडारी ने कहा, “प्लास्टिक एक ऐसा पदार्थ है जिसके कारण प्रदूषण फैलता है। इसका बढ़ता उपयोग चिंता का विषय है, अतः इसे जड़ से खत्म किया जाना अति आवश्यक है। इसलिए प्लास्टिक के उपयोग को बंद करने के उद्देश्य से नगर निगम, देहरादून द्वारा अपने वार्ड में आज बुधवार, १८ सितम्बर को प्लास्टिक, पॉलिथीन, स्वैच्छिकदान एवं प्लास्टिक को खत्म करने हेतु एक कार्यक्रम संचालित कर सभी दुकानों व घरों में जाकर प्लास्टिक/पॉलिथीन के उपयोग न करने की अपील व शपथ दिलाई। इस मुहिम में नगर निगम से एस एन सनवाल, सतेंद्र, मोहन काला, बजरंग दल के विजय मिश्रा, संजय बहादुर सिंह एवं समस्त सफाई कर्मचारियों के साथ साथ क्षेत्रवासियों ने सहयोग दिया।”
????????प्लास्टिक नही हमे जीवन चाहिए।। आइए साथ मिलकर देहरादून को स्वच्छ बनाये????????

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Ghanshyam Chandra

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