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उत्तराखण्ड बाल अधिकार सरंक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समन्वय बैठक का किया गया आयोजन

आकाश ज्ञान वाटिका, १७ फरवरी २०२१, बुधवार, देहरादून (जि.सू.का.)। उत्तराखण्ड बाल अधिकार संरक्षण आयोग एवं महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के तत्वाधान में बच्चों में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति, रोकथाम एवं पुर्नवास को लेकर उत्तराखण्ड बाल अधिकार सरंक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समन्वय बैठक का आयोजन विकासभवन सभागार में किया गया। बैठक का संचालन सचिव, बाल अधिकार सरंक्षण आयोग झरना कमठान ने किया।

राज्य स्तरीय समन्वय बैठक में आयोग की अध्यक्षा श्रीमती ऊषा नेगी ने बच्चों में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति, रोकथाम एवं पुनर्वास को लेकर स्वास्थ्य शिक्षा, समाज कल्याण, पुलिस, आबकारी एवं अन्य बच्चों के हितों से जुड़ी स्वयं सेवी संस्थाओं को आपसी समन्वय बनाकर योजनाओं को धरातल पर उतारे जाने के भरसक प्रयास करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आबकारी विभाग द्वारा सामाजिक सुरक्षा एवं सड़क सुरक्षा के लिए प्राप्त सेस की धनराशि का उपयोग के सम्बन्ध में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि बच्चों में नशे की प्रवृत्ति की रोकथाम के लिए गहनता से चिन्तन करने की आवश्यकता हैं। उन्होंने सभी अधिकारियों को कहा कि बैठक में आने से पूर्व पूरा होमवर्क कर जानकारी उपलब्ध करायें तथा अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए जनजागरूकता का भी विशेष ध्यान रखें। बैठक में ड्रग्स कन्ट्रोलर द्वारा अवगत कराया गया कि सभी मेडिकल स्टोर पर सीसीटीवी लगाये गए हैं तथा प्रतिबन्धित दवाइयों के निर्माण एवं बिक्री पर प्रतिबन्ध लगाया गया है। समाज कल्याण विभाग की समीक्षा के दौरान बताया गया कि मानसिक चिकित्सालय सेलाकुई एवं वीरचन्द्र सिंह गढ़वाली आयुर्वेद चिकित्सालय श्रीनगर में नशामुक्ति केन्द्र खोले जाने के प्रस्ताव भेजे गए है। इस पर अध्यक्ष ने प्रस्ताव की प्रति आयोग को उपलब्ध कराने के साथ ही देहरादून के कोरोनेशन एवं गाँधी शताब्दी अस्पताल में कांउसिलिंग सेन्टर बनाए जाने के प्रस्ताव भी तैयार करनें को कहा। उन्होंने कहा कि बच्चों में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति एवं रोकथाम के लिए गाइडलाईन तैयार की जाएगी, जिसके लिए सभी विभागों से सहयोग की अपेक्षा की। महिला सशक्तिकरण की समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा कि बालग्रह एवं शक्ति केन्द्रों के माध्यम से नशे के सौदागरों पर निगहबानी की जाए इसे उलझाया नहीं जाए बल्कि समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि गाँव, शहर, बस्तियों में आगंनबाड़ी एवं शक्तिकेन्द्रों के माध्यम से जनजागरूकता का प्रचार-प्रसार किया जाए।

बैठक में स्वास्थ्य विभाग की चर्चा के दौरान बताया गया कि दून अस्पताल में 5 लाख की लागत से नशामुक्ति केन्द्र एवं रिहेब सेन्टर का कार्य प्रगति पर है तथा हवालबाग अल्मोड़ा में केन्द्र संचालित किया जा रहा है। पुलिस विभाग की समीक्षा के दौरान उन्होंने पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण बताते हुए सामाजिक दायित्वों का निर्वहन किए जाने पर बल दिया। बैठक में बताया गया कि आपरेशन सत्य के अन्तर्गत 223 प्राथमिकी दर्ज कर 236 लोगों को जेल भेजा गया है तथा नशे का कारोबार करने वालों का थानेवार चिन्हिकरण कर हेल्पलाईन तथा एडीपीएफ एवं एसटीएफ यूनिट के माध्यम से पैडलरों द्वारा नशे की सामग्री सप्लाई करने वालों की जानकारी जुटाई जा रही है। उन्होंने बताया कि एनसीबी के साथ आवश्यक समन्वय बनाकर इस कार्य में तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए विद्यालयों, बोर्डिंग स्कूलों के संचालकों पर शिकंजा कसते हुए ऐसे स्कूलों का औचक निरीक्षण पुलिस के सहयोग से करें। बच्चों को सही दिशा देना आवश्यक है इसके लिए अभिभावकों को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों, प्राईवेट शिक्षण संस्थानों में नशे की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिल रहा है, जिसके लिए इन शिक्षण संस्थानों की छात्र/छात्राओं के माध्यम से उनके साथ विस्तृत चर्चा कर नशे की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाए जाने हेतु आयोग 23 फरवरी को कार्यशाला आयोजित कर रहा है।

समन्वय बैठक में अपने उदगार व्यक्त करते हुए अध्यक्ष श्रीमती नेगी ने कहा कि नशामुक्ति केन्द्र नाम से पीड़ित बच्चे एवं उनके अभिभावक भी संकोच करते हैं ऐसे में इसका नाम जीवन ज्योति आश्रय का प्रस्ताव बनाया जाना उचित होगा। बैठक में पंचायतीराज विभाग द्वारा बताया गया कि ग्राम, ब्लाॅक एवं जनपद स्तर पर स्वास्थ्य कल्याण समितियों का गठन किया गया है, जिनके माध्यम से बच्चों में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर रोक लगाये जाने की प्रक्रिया चलाई जा रही है। श्रम विभाग द्वारा बताया गया कि बाल मजदूरों का पंजीकरण के आलावा बालश्रम पर अंकुश लगाये जाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस पर बैठक में श्रम विभाग को निर्देशित किया गया कि बाल श्रमिकों को उनके इच्छित व्यवसाय की रूचि को लेकर सूची तैयार की जाए तथा उसी आधार पर उनको व्यवसाय उपलब्ध कराया जाए। बैठक में महिला कल्याण विभाग को बच्चों के पुनर्वास के सम्बन्ध में चलाई जा रही योजनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की गई। इसके अतिरिक्त यह भी जानकारी ली गई कि कितने एनजीओ बच्चों के लिए कार्य कर रहे हैं। साथ ही भारत सरकार एवं राज्य सरकार से अनुदान प्राप्त कर रहे संस्थाओं का सर्वे कर उसकी सूची आयोग को उपलब्ध कराए जाने को कहा। बैठक में बताया गया कि नशे की बढ़ती प्रवृत्ति की रोकथाम एवं पुनर्वास के सम्बन्ध में आयोग द्वारा गाइडलाईन तैयार की जाएगी। इस अवसर पर बचपन बचाओ अभियान, निर्माण सहित कई अन्य स्वयंसेवी संगठनों द्वारा बच्चों के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी आयोग के पदाधिकारियेां के समक्ष प्रस्तुत की।

इस अवसर पर डाॅ० रोशनी सती, आबकारी विभाग के संयुक्त निदेशक जे.एस. गर्ब्याल, पुलिस क्षेत्राधिकारी पल्लवी त्यागी, सुरेश उनियाल, सहायक निदेशक बाल विकास डाॅ० एस.के. सिंह, जिला पंचायतीराज अधिकारी जितेन्द्र कुमार, सरोजपाल समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

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Ghanshyam Chandra

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