Breaking News :
>>मानसून से पहले सरकार सतर्क, पर्वतीय क्षेत्रों में पहुँचाया तीन माह का राशन>>वर्षा की कमी की स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह तैयार- गणेश जोशी>>समाज और समुदायों को बांटने का प्रयास करने वालों के खिलाफ की जाएगी कानूनी कार्रवाई- सीएम>>मानसून से पहले सरकार सतर्क, पर्वतीय क्षेत्रों में पहुंचाया तीन माह का राशन>>मुख्य सचिव ने दिए राज्य के सभी भवनों का फायर सेफ्टी ऑडिट करने के निर्देश>>28 से 30 जून तक चलेगा राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान>>भूमि प्रबंधन एवं सुधारों के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाए- मुख्य सचिव>>शिवपुरी चौकी प्रभारी विनोद कुमार शर्मा की सड़क हादसे में मौत>>‘कॉकटेल 2’ का बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन, चार दिन में पार किया 50 करोड़ का आंकड़ा>>मुख्यमंत्री धामी ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को दी श्रद्धांजलि>>जनभागीदारी से बनेगी देहरादून महायोजना-2041, एमडीडीए ने तय किया जनसुनवाई शेड्यूल>>रात्रिकालीन कार्यों को मिली सशर्त अनुमति, लापरवाही पर डीएम का सख्त रुख>>कांवड़ यात्रा की तैयारियों को लेकर जिलाधिकारी ने की व्यापक समीक्षा>>क्या किडनी स्टोन में टमाटर खाना नुकसानदायक है? जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ>>कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने किया सड़क का शिलान्यास>>मानसून से पहले तैयारियों की समीक्षा, कैबिनेट मंत्री खजान दास ने अधिकारियों को दिए निर्देश>>कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी ने विभागीय समीक्षा बैठक में योजनाओं की प्रगति का लिया जायजा>>सेलाकुई में चोरी की पांच वारदातों का खुलासा, दो शातिर चोर गिरफ्तार>>फिलीपींस के एक स्कूल में फायरिंग, तीन छात्रों की मौत, कई घायल>>फिलीपींस के एक स्कूल में फायरिंग, तीन छात्रों की मौत, कई घायल
उत्तराखंड

श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के बे्रस्ट कैंसर सर्जन ने महिला को दिया नया जीवन

महिला मरीज़ के स्तन से 12.5 किलो का टयूमर निकाला

स्तन की छोटी गांठ ने फुटबाल के आकार के ट्यूमर का लिया खतरनाक रूप

देहरादून। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के ब्रेस्ट सर्जन की कड़ी मेहनत रंग लाई। स्तन में होने वाली छोटी सी गांठ को नजरअंदाज करना किस तरह गंभीर समस्या का रूप ले सकता है, इसका एक अनोखा उदाहरण श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में देखने को मिला। अस्पताल के ब्रेस्ट सर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ. नीलकमल कुमार और उनकी टीम ने 35 वर्षीय महिला के स्तन से 12.5 किलोग्राम वजन का फुटबॉल के आकार का विशाल फायलोड्स ट्यूमर सफलतापूर्वक निकालकर मरीज़ को नया जीवन दिया है। विशेष बात यह रही कि करीब चार घंटे तक चले इस जटिल ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकों ने स्तन के उभार को सुरक्षित रखते हुए ट्यूमर को बाहर निकालने में सफलता प्राप्त की। ऑपरेशन के बाद महिला पूरी तरह स्वस्थ है और उन्हें अस्पताल से 3 दिन बाद ही छुट्टी दे दी गई है।

वरिष्ठ ब्रेस्ट एवं एंडोक्राइन सर्जन डॉ. नीलकमल कुमार ने बताया कि मेडिकल साइंस में इस बीमारी को फायलोड्स ट्यूमर कहा जाता है।यह ट्यूमर दुर्लभ की श्रेणी में आता है लेकिन श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में ऐसे टय्मर का उपचार सफलतापूर्वक किया जा रहा है। श्री मंहत इन्दिरेश अस्पताल के सुपरस्पेशलिस्ट ब्रेस्ट विभाग में कुशल एवम् अनुभवी डाॅक्टरों की टीम उपलब्ध है। यही कारण है कि अस्पताल के ब्रेस्ट विभाग में ऐसे ट्यूमर सामान्य तौर पर उपचार के लिए आते हैं जो छोटे बड़े अस्पतालों में सर्जरी/सर्जरी न होने के बाद रैकरेंस/दोबारा ट्यूमर हो जाने के बाद मरीज़ को लेकर श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के ब्रेस्ट विभाग में पहुंचते हैं।

यह स्तन का एक अत्यंत दुर्लभ ट्यूमर होता है, जो सामान्य गांठ की तुलना में अत्यंत तेजी से बढ़ जाता है। केवल ट्यूमर के आकार या प्रारंभिक जांच के आधार पर यह तय करना संभव नहीं होता कि ट्यूमर कैंसरयुक्त (मैलिग्नेंट) है या नहीं। इसकी वास्तविक प्रकृति का पता बायोप्सी जांच के बाद ही चलता है।

उन्होंने बताया कि मरीज के स्तन में शुरुआत में एक छोटी गांठ थी, जिसके लिए वह स्थानीय स्तर पर उपचार ले रही थीं। भय, संकोच और जागरूकता की कमी के कारण उन्होंने विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेने में काफी देरी कर दी। इस दौरान उन्होंने होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक उपचार भी लिया, लेकिन कोई विशेष लाभ नहीं मिला। समय बीतने के साथ गांठ का आकार तेजी से बढ़ता गया और कुछ ही सप्ताहों में वह फुटबॉल के आकार के विशाल ट्यूमर में बदल गई।

ट्यूमर के अत्यधिक बढ़ जाने के कारण मरीज को सांस लेने में कठिनाई, लगातार दर्द, सोने में परेशानी तथा दैनिक कार्यों को करने में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। इसके अलावा सामाजिक कार्यक्रमों में जाने से बचना और लोगों के बीच असहज महसूस करना भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया था। ट्यूमर के लगातार बढ़ते आकार ने मरीज को मानसिक रूप से भी गहरे तनाव और भय की स्थिति में पहुंचा दिया था। उन्हें आशंका सताने लगी थी कि कहीं यह कैंसर तो नहीं है और उनका सामान्य जीवन प्रभावित न हो जाए।

डॉ. नीलकमल कुमार ने बताया कि फायलोड्स ट्यूमर की सबसे बड़ी चुनौती इसकी पुनरावृत्ति (लोकल रैकरेंस) की संभावना होती है। यही कारण है कि ऐसे जटिल मामलों का उपचार ब्रेस्ट विशेषज्ञों की देखरेख में किया जाना चाहिए। समय पर निदान, उचित शल्य चिकित्सा और नियमित फॉलो-अप के माध्यम से पुनरावृत्ति के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है तथा मरीज को बेहतर दीर्घकालिक परिणाम प्राप्त होते हैं।

Loading

Ghanshyam Chandra

AKASH GYAN VATIKA (www.akashgyanvatika.com) is one of the leading and fastest growing web News Portal which provides latest information about the Political, Social Activities, Environmental, entertainment, sports, General Awareness etc. I, GHANSHYAM CHANDRA, EDITOR, AKASH GYAN VATIKA provide News and Articles about the abovementioned subject and also provide latest/current state/national/international News on various subject.
error: Content is protected !!