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मोदी सरकार ने उठाया एक और बड़ा कदम, दुष्कर्म पीड़ितों को मिलेगा जल्द न्याय

नई दिल्ली। दुष्कर्म पीड़िताओं को जल्द न्याय दिलाने के लिए फोरेंसिक जांच की गति बढ़ाने के इंतजाम हो रहे हैं। ऐसे मामलों की जल्द फोरेंसिक जांच के लिए चंडीगढ़ में विशेष लैब स्थापित हो रही है जहां सिर्फ दुष्कर्म मामलों की ही जांच होगी। इसके अलावा चाक चौबंद जांच सुनिश्चित करने के लिए विशेष फोरेंसिक जांच किट भी तैयार हो रही है जिसमें हर तरह की जांच की लिस्ट के साथ उस जांच के लिए जरूरी चीजें होंगी। ये विशेष जांच किट अस्पतालों में बांटी जाएगी ताकि दुष्कर्म पीडि़ता की एक जगह एक साथ सारी जांचें हो जाएं और एकत्रित सैंपल जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेज दिये जाएं।

– फोरेंसिक जांच के लिए हो रहे हैं विशेष इंतजाम

– चंडीगढ़ में बन रही है डेडिकेटेड लैब

– विशेष फोरेंसिक जांच किट तैयार करने की भी हो रही है कवायद

दुष्कर्म के मामले कई बार फोरेंसिक जांच रिपोर्ट में देरी या ठीक जांच न होने के कारण अटक जाते हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि सरकार दुष्कर्म के मामलों की त्वरित और पुख्ता फोरेंसिक जांच सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है, ताकि फोरेंसिक रिपोर्ट समय पर आये और मामले से जुड़े महत्वपूर्ण मेडिकल सबूत नष्ट न हों। इसके लिए निर्भया फंड से चंडीगढ़ में एक विशेष फोरेंसिक लैब स्थापित की जा रही है जिसमें सिर्फ दुष्कर्म के मामलों की ही जांच होगी। इसके लिए 99.76 करोड़ रुपये जारी हो चुके हैं।

सूत्रों का कहना है कि लैब का काफी काम पूरा हो चुका है और स्थिति का जायजा लेने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी जल्दी ही चंडीगढ़ का दौरा करेंगी। अत्याधुनिक उपकरणों से लैस इस लैब में यौन उत्पीड़न के लंबित मामलों की डीएनए एनालिसिस होगी। इस लैब की क्षमता वर्ष में करीब 20000 केसों की जांच करने की होगी। अभी चंडीगढ़ में जो फोरेंसिक लैब है उसमें साल में लगभग 1500 केसों की ही जांच हो पाती है इसके अलावा वहां सिर्फ दुष्कर्म के केसों की जांच नहीं होती। वहां हर तरह के केसों की जांच होती है।
फिलहाल देश भर में चंडीगढ़, गुवाहाटी, कोलकाता, हैदराबाद, पुणे और भोपाल में कुल छह केन्द्रीय फोरेंसिक लैब हैं। इसके अलावा प्रत्येक राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश में एक एक लैब है जहां हर तरह के केस जांच के लिए जाते हैं। लेकिन ये पर्याप्त नहीं हैं।

मंत्रालय के अधिकारी बताते हैं कि कई बार देर होने के कारण जांच सैंपल नष्ट होने का खतरा होता है। साथ ही रिपोर्ट में देरी के कारण मामला अटका रहता है इससे पीडि़ता को न्याय मिलने में देरी होती है। इसीलिए विशेष लैब स्थापित की जा रही हैं।

शुरुआत मे चंडीगढ़ में लैब बन रही है इसके बाद देश के अन्य हिस्सों में कुछ और विशेष लैब स्थापित होंगी। इसके अलावा दुष्कर्म पीडि़ताओं की जांच के लिए विशेष फोरेंसिक जांच किट तैयार करने पर काम चल रहा है। ये किट सभी अस्पतालों में भेजे जाने का विचार है जिससे कि पीडि़ता की इसी किट के मुताबिक एक साथ सारी जांच हो जाएगी। उसे बार-बार जांच के लिए जाने की जरूरत नहीं होगी और न ही किसी जांच के छूटने या उसमें लापरवाही की गुंजाइश रहेगी। हालांकि अभी किट का निश्चित प्रारूप तय नहीं है, लेकिन इस पर तेजी से काम हो रहा है।

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Ghanshyam Chandra

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