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उत्तराखण्ड

राष्ट्रीय वस्त्र मंत्रियों के सम्मेलन में शामिल हुए कृषि मंत्री गणेश जोशी

राष्ट्रीय वस्त्र सम्मेलन में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रतिनिधि के रूप में किया प्रतिभाग

देहरादून/गुवाहाटी। प्रदेश के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने असम के गुवाहाटी में भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय वस्त्र मंत्रियों के राष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रतिनिधि के रूप में केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह के साथ प्रतिभाग किया। भारतीय वस्त्र विकास, विरासत और नवाचार का ताना-बाना विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में देशभर से मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग विशेषज्ञ एवं वस्त्र क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ विभिन्न राज्यों द्वारा लगाए गए स्टालों का अवलोकन भी किया। सम्मेलन के पहले दिन नीतिगत सुधार, नवाचार, निवेश संभावनाओं और रोजगार सृजन जैसे अहम विषयों पर चर्चा हुई। उत्तराखण्ड से प्राप्त प्रस्तावों पर केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय ने सकारात्मक आश्वासन दिया है।

बैठक में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने राष्ट्रीय मंच पर उत्तराखंड के वस्त्र, हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र की व्यापक संभावनाओं को प्रस्तुत किया। उन्होंने केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय को सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि उत्तराखंड और असम जैसे हिमालयी एवं पूर्वाेत्तर राज्य साझा चुनौतियों और अवसरों से जुड़े हुए हैं। कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया और वोकल फॉर लोकल विजन तथा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड अपने पारंपरिक वस्त्र उद्योग को आधुनिक स्वरूप देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य में लगभग 12 हजार बुनकर एवं 26 हजार हस्तशिल्पी इस क्षेत्र से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। उत्तराखंड में प्रतिवर्ष लगभग 4,616 कुंटल ऊन का उत्पादन होता है और मेरिनो व अंगोरा ऊन के लिए राज्य की जलवायु अत्यंत अनुकूल है।

मंत्री जोशी ने प्राकृतिक रेशों पर जोर देते हुए कहा कि बिच्छू घास (हिमालयन नेटल) और औद्योगिक भांग के रेशों से वस्त्र निर्माण में उत्तराखंड अग्रणी भूमिका निभा रहा है, जो सस्टेनेबल फैशन का भविष्य है। उन्होंने कहा कि राज्य में उच्च गुणवत्ता वाले बाइवोल्टाइन सिल्क का उत्पादन हो रहा है, जो आयातित रेशम का मजबूत विकल्प बन रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद के माध्यम से कारीगरों को डिजाइन, प्रशिक्षण और विपणन सहयोग दिया जा रहा है। महिला स्वयं सहायता समूहों को कौशल विकास से जोड़ा गया है तथा ई-मार्टप्लेस, हिमाद्रि एम्पोरियम और विभिन्न मेलों के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य के 29 उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है, जिनमें 10 हथकरघा एवं हस्तशिल्प उत्पाद शामिल हैं।

रेशम क्षेत्र की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखंड ने रेशम कीट बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल की है। वर्ष 2025-26 में 7.585 लाख डीएफएल्स का उत्पादन किया गया, जिससे विशेषकर महिला कीटपालकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और वे लखपति दीदी बनी हैं। पौड़ी के यमकेश्वर में एसपीवी मॉडल पर स्थापित रेशम क्लस्टर को उन्होंने अन्य पर्वतीय राज्यों के लिए आदर्श बताया।

सम्मेलन के दौरान कृषि मंत्री गणेश जोशी ने केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के समक्ष पहाड़ी राज्यों के लिए मिनी टेक्सटाइल पार्क नीति, ऊन प्रसंस्करण हेतु विशेष पैकेज, बिच्छू घास व हेम्प को राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन में शामिल करने, हथकरघा-हस्तशिल्प उत्पादों पर ट्रांसपोर्ट सब्सिडी तथा उत्तराखंड में निफ्ट के एक्सटेंशन सेंटर की स्थापना सहित पांच महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे।

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Ghanshyam Chandra

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