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स्वास्थ

मोबाइल देखते-देखते सिरदर्द क्यों होता है? स्क्रीन के साथ ये आदतें भी हैं जिम्मेदार

आज के डिजिटल दौर में मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर के बिना कामकाज की कल्पना करना मुश्किल है। पढ़ाई से लेकर ऑफिस के काम और मनोरंजन तक, दिन का बड़ा हिस्सा स्क्रीन के सामने गुजरता है। लगातार स्क्रीन देखने के बाद सिरदर्द या आंखों में भारीपन महसूस होना आम बात है, लेकिन इसके पीछे सिर्फ स्क्रीन ही जिम्मेदार हो, यह जरूरी नहीं है। हमारी नींद, खान-पान, पानी पीने की आदत और बैठने का तरीका भी सिरदर्द को प्रभावित कर सकता है।

सीनियर कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट और यूनिट हेड डॉ. नेहा पंडिता के अनुसार, लंबे समय तक स्क्रीन के इस्तेमाल के साथ अगर शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिलता, तो सिरदर्द और मानसिक थकान जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं। इसलिए स्क्रीन टाइम के साथ रोजमर्रा की आदतों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

लगातार स्क्रीन देखने से क्यों हो सकता है सिरदर्द?

लंबे समय तक मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन पर लगातार नजर टिकाए रखने से आंखों पर दबाव पड़ सकता है। स्क्रीन देखते समय हम सामान्य से कम पलकें झपकाते हैं, जिससे आंखों में सूखापन, जलन और थकान महसूस हो सकती है। स्क्रीन की तेज रोशनी या ग्लेयर भी कुछ लोगों में असहजता और सिरदर्द की वजह बन सकता है।

गलत पॉश्चर भी बढ़ा सकता है परेशानी

मोबाइल को लगातार नीचे करके देखने या लैपटॉप पर झुककर काम करने की आदत गर्दन और कंधों पर अतिरिक्त दबाव डालती है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति में रहने से मांसपेशियों में तनाव पैदा हो सकता है, जिसका असर सिरदर्द के रूप में दिखाई दे सकता है।

माइग्रेन से परेशान लोगों को ज्यादा सावधानी

जिन लोगों को माइग्रेन की शिकायत रहती है, उनके लिए तेज रोशनी और लंबे समय तक स्क्रीन देखना संभावित ट्रिगर हो सकता है। हालांकि स्क्रीन के साथ-साथ तनाव, नींद की कमी, पर्याप्त पानी न पीना और लंबे समय तक भूखे रहना भी माइग्रेन की समस्या को बढ़ा सकता है।

रात में मोबाइल चलाने से नींद पर असर

बिस्तर पर जाने के बाद लंबे समय तक फोन पर वीडियो देखना या सोशल मीडिया स्क्रॉल करना नींद के समय को कम कर सकता है। नींद पूरी न होने पर अगले दिन थकान, चिड़चिड़ापन, ध्यान लगाने में परेशानी और मानसिक सुस्ती महसूस हो सकती है। इसलिए सोने से पहले स्क्रीन से दूरी बनाना बेहतर आदत हो सकती है।

क्या ज्यादा स्क्रीन टाइम से याददाश्त कमजोर होती है?

सामान्य स्क्रीन इस्तेमाल को सीधे तौर पर दिमाग को नुकसान पहुंचने या याददाश्त कमजोर होने से जोड़ना सही नहीं माना जाता। हालांकि लगातार नोटिफिकेशन, बार-बार काम बदलना और देर रात तक स्क्रीन इस्तेमाल करने से मानसिक थकान बढ़ सकती है। ऐसे में व्यक्ति को लग सकता है कि उसकी याददाश्त कमजोर हो रही है, जबकि असल समस्या ध्यान और एकाग्रता में कमी हो सकती है।

स्क्रीन इस्तेमाल करते समय इन बातों का रखें ध्यान
लंबे समय तक लगातार स्क्रीन देखने से बचें और बीच-बीच में छोटे ब्रेक लें।
पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें और भोजन समय पर करें।
मोबाइल या लैपटॉप इस्तेमाल करते समय गर्दन को ज्यादा झुकाने से बचें।
स्क्रीन पर पड़ने वाली तेज रोशनी और ग्लेयर को कम करने की कोशिश करें।
सोने से पहले कुछ समय फोन और दूसरी स्क्रीन से दूरी रखें।
अगर स्क्रीन देखने के बाद बार-बार सिरदर्द होता है, तो इसके पैटर्न और संभावित कारणों पर ध्यान दें।

इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

अगर सिरदर्द अचानक बहुत तेज हो, लगातार बढ़ रहा हो या उसके साथ कमजोरी, शरीर के किसी हिस्से में सुन्नपन, भ्रम, दौरे, बेहोशी, बोलने में परेशानी या नजर में गंभीर बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

कुल मिलाकर, सिरदर्द को केवल स्क्रीन टाइम से जोड़ना सही नहीं होगा। स्क्रीन के साथ हमारी नींद, तनाव, खान-पान, पानी की मात्रा और बैठने का तरीका भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए स्क्रीन कम करने के साथ-साथ स्वस्थ दिनचर्या बनाए रखना भी जरूरी है।

नोट: यह लेख उपलब्ध मेडिकल जानकारी और विशेषज्ञ की बताई गई बातों के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी गंभीर या लगातार बनी रहने वाली समस्या में डॉक्टर से सलाह लें।

(साभार)

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