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बिज़नेस

ई-कार एक्सपोर्ट में भारत की बड़ी छलांग, पहली तिमाही में विदेश भेजे 10,802 वाहन

भारत से इलेक्ट्रिक कारों का निर्यात 18 गुना बढ़ा, यूरोप बना सबसे बड़ा बाजार

नई दिल्ली। भारत का इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग अब घरेलू बाजार के साथ-साथ विदेशी बाजार में भी तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में देश से इलेक्ट्रिक कारों के निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस दौरान भारत ने करीब 36.9 करोड़ डॉलर मूल्य की इलेक्ट्रिक कारें विदेश भेजीं, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 18 गुना ज्यादा है।

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में भारत से कुल 10,802 इलेक्ट्रिक कारों का निर्यात हुआ। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा महज 1,309 वाहनों का था। यूरोपीय देश भारतीय इलेक्ट्रिक कारों के लिए प्रमुख बाजार बनकर सामने आए हैं।

स्पेन सबसे बड़ा खरीदार

भारतीय इलेक्ट्रिक कारों की विदेशी मांग में स्पेन सबसे आगे रहा। पहली तिमाही में स्पेन को करीब 4,000 इलेक्ट्रिक वाहन निर्यात किए गए, जिनकी कीमत लगभग 14.64 करोड़ डॉलर रही। वहीं ब्रिटेन को 2,646 इलेक्ट्रिक वाहनों की आपूर्ति की गई।

यह आंकड़े संकेत देते हैं कि भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता यूरोपीय बाजार में तेजी से अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं।

अघोषित विदेशी संपत्ति बताने का मौका

वहीं, सरकार ने अघोषित विदेशी संपत्ति और आय रखने वाले पात्र करदाताओं के लिए भी एक नई व्यवस्था लागू की है। आयकर विभाग की विदेशी संपत्ति प्रकटीकरण योजना 16 अगस्त 2026 से प्रभावी हो गई है।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के मुताबिक, पात्र करदाता 31 दिसंबर 2026 तक ऑनलाइन माध्यम से अपनी अघोषित विदेशी संपत्ति और आय की जानकारी दे सकते हैं। इसके लिए घोषित राशि पर 30 फीसदी टैक्स और उतनी ही राशि का जुर्माना लगाया जाएगा।

60 फीसदी तक हो सकती है कुल देनदारी

योजना के तहत टैक्स और जुर्माना दोनों को मिलाकर कुल देनदारी 60 फीसदी तक पहुंच सकती है। विदेशी संपत्ति का बाजार मूल्य 31 मार्च 2026 की स्थिति के आधार पर निर्धारित किया जाएगा।

उदाहरण के तौर पर, अगर किसी व्यक्ति के पास 60 लाख रुपये की अघोषित विदेशी संपत्ति और 20 लाख रुपये की अघोषित विदेशी आय है, तो कुल घोषित राशि 80 लाख रुपये मानी जाएगी। इस पर 30 फीसदी टैक्स और 30 फीसदी जुर्माने को मिलाकर कुल 48 लाख रुपये की देनदारी बन सकती है।

किन लोगों को मिल सकता है लाभ?

यह व्यवस्था खास तौर पर उन पात्र करदाताओं के लिए लाई गई है, जिन्होंने पहले अपनी विदेशी संपत्ति या विदेश से होने वाली आय की जानकारी आयकर विभाग को नहीं दी थी। इसके दायरे में पात्रता के अनुसार छात्र, आईटी प्रोफेशनल और नौकरीपेशा एनआरआई जैसे करदाता भी आ सकते हैं।

योजना में विदेशी संपत्ति की घोषित राशि को दोबारा आय में शामिल नहीं किया जाएगा और उस पर काला धन कानून लागू नहीं होने की बात कही गई है। संपत्ति की राशि और पात्रता के आधार पर अलग-अलग श्रेणियां निर्धारित की गई हैं, जिनमें 1 करोड़ रुपये और 5 करोड़ रुपये तक की संपत्तियों से जुड़ी श्रेणियां शामिल हैं।

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