Breaking News :
>>डिमटा बैंड के पास NH-707A का एक बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त, दोनों तरफ से यातायात पूरी तरह ठप>>‘हैवान’ का पहला गाना ‘मेरे हीरो है वो’ हुआ रिलीज>>रायपुर की 16 ग्राम पंचायतों में मजबूत होगा कचरा प्रबंधन, पर्यावरण सखियों को मिला नया वाहन>>सफाई कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान को लेकर बैठक, वेतन वृद्धि और स्वास्थ्य सुविधाओं पर जोर>>वन, वन्यजीव और समुदायों की रक्षा को अपने करियर की सफलता का पैमाना बनाएं- उपराष्ट्रपति>>एमडीडीए की ऑनलाइन मानचित्र प्रणाली होगी और अधिक पारदर्शी>>सोमेश्वर में जन मिलन कार्यक्रम, कई ग्रामीणों ने थामा भाजपा का दामन>>अंकिता भंडारी हत्याकांड में आरोपियों को फिर झटका, सभी की जमानत याचिकाएं खारिज>>एसजीआरआरयू के दीक्षारंभ का भव्य समापन, रेन डांस पर जमकर थिरके छात्र-छात्राएं>>ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे ठप: भल्लेगांव बागवान के पास पहाड़ी से भारी मलबा गिरने से बंद हुआ मार्ग>>मुख्य सचिव ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के दिए निर्देश>>भारत ने श्रीलंका को पहले टेस्ट मैच में 165 रन से हराया>>सलेड़ी -खेरोला से खड़की-नौकुचियाताल(भीमताल) बाईपास मोटर मार्ग के निर्माण कार्य का शुभारम्भ>>जापानी तकनीक का लाभ छोटे किसानों तक पहुंचाएं, कृषि लागत घटाकर उत्पादकता बढ़ाएं: शिवराज सिंह चौहान>>रेलटेल के शेयरों में 6% का उछाल, ₹290 के पार पहुंचा भाव>>बॉक्स ऑफिस पर ‘आवारापन 2’ का जलवा, 100 करोड़ के पार हुई फिल्म की कमाई>>देहरादून में पुलिस और बदमाश के बीच हुई मुठभेड़, पैर में गोली लगने के बाद आरोपी गिरफ्तार>>हर महीने के पहले मंगलवार को होगी समन्वय बैठक, जिलों की समस्याओं का तेजी से होगा समाधान>>केदारनाथ यात्रा व्यवस्थाओं पर सरकार की पैनी नजर, प्रभारी सचिव डॉ. आर. राजेश ने की वर्चुअल समीक्षा>>सीमाद्वार जलभराव पर डीएम सख्त, 24 घंटे में सफाई और डिवाटरिंग के निर्देश
उत्तराखण्ड

वन, वन्यजीव और समुदायों की रक्षा को अपने करियर की सफलता का पैमाना बनाएं- उपराष्ट्रपति

देहरादून में IFS प्रशिक्षुओं को उपराष्ट्रपति का संदेश, बोले- ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना से करें सेवा

देहरादून। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए) में भारतीय वन सेवा (IFS) के 2025-27 बैच के परिवीक्षार्थियों और प्रशिक्षण ले रहे रॉयल भूटान वन सेवा के अधिकारियों को संबोधित किया। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से पर्यावरण संरक्षण, विकास और जनहित के बीच संतुलन बनाते हुए देश के सतत भविष्य के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने प्रशिक्षु अधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विकसित भारत@2047 की दिशा में आगे बढ़ते हुए आने वाले दशकों में इन्हीं अधिकारियों के कंधों पर देश के वनों, वन्यजीवों, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं प्रबंधन की अहम जिम्मेदारी होगी। उन्होंने कहा कि भारत की पारिस्थितिक सुरक्षा मजबूत करने और वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने में भारतीय वन सेवा की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

विकास और संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं

सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण को एक-दूसरे का विरोधी नहीं माना जाना चाहिए। दोनों के बीच संतुलन कायम करते हुए पारिस्थितिक सुरक्षा, स्थानीय लोगों की आजीविका, वर्तमान जरूरतों और आने वाली पीढ़ियों के हितों को ध्यान में रखना जरूरी है।

उन्होंने अधिकारियों से व्यक्तिगत उपलब्धियों के बजाय टीम की सफलता पर ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि निरंतर सामूहिक प्रयास ही मजबूत संस्थानों और राष्ट्रों की नींव तैयार करते हैं। उपराष्ट्रपति ने जंगलों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के साथ पीढ़ियों से सामंजस्य बनाकर रहने वाले स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान को भी सम्मान देने की जरूरत बताई।

‘सत्यनिष्ठा से कोई समझौता नहीं’

लोक सेवा में ईमानदारी और सत्यनिष्ठा को सर्वोच्च महत्व देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सत्यनिष्ठा से किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से कठिन परिस्थितियों में संविधान, कानून, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और व्यापक जनहित को निर्णय का आधार बनाने की अपील की।

उन्होंने अधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार प्रभावी और बेहतर कार्यप्रणालियों को अपनाने के लिए भी प्रेरित किया।

वन प्रबंधन में तकनीक को अपनाने पर जोर

उपराष्ट्रपति ने कहा कि आधुनिक तकनीक वानिकी क्षेत्र को नई दिशा दे रही है। उन्होंने नई पीढ़ी के वन अधिकारियों से रिमोट सेंसिंग, जीआईएस, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा आधारित प्रणालियों का इस्तेमाल क्षेत्रीय अनुभव, विवेकपूर्ण निर्णय क्षमता और जनसंवेदनशीलता के साथ करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि भारत के सतत भविष्य के लिए आधुनिक वैज्ञानिक वानिकी और देश के पारंपरिक एवं सभ्यतागत ज्ञान को एक-दूसरे का पूरक बनाना होगा।

वन सेवाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना सकारात्मक बदलाव

उपराष्ट्रपति ने वन सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा बैच में करीब 17 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो सकारात्मक बदलाव और नारी शक्ति की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि वे अपने करियर की सफलता का आकलन केवल पद और जिम्मेदारियों से न करें। उनकी वास्तविक उपलब्धि इस बात से तय होनी चाहिए कि उन्होंने कितने जंगलों को पुनर्जीवित किया, कितने वन्यजीवों का संरक्षण किया, कितने समुदायों का विश्वास जीता और आने वाली पीढ़ियों के लिए कैसी विरासत छोड़ी।

उपराष्ट्रपति ने अधिकारियों से राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान करते हुए कहा कि “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ काम करना ही लोक सेवा का मूल उद्देश्य होना चाहिए।

कार्यक्रम में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त), मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, आईजीएनएफए के निदेशक डॉ. राजेंद्र प्रसाद, कोर्स निदेशक श्रीमती अजीता लोंगजाम समेत अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

Loading

error: Content is protected !!