Breaking News :
>>अवैध प्लॉटिंग पर एमडीडीए का शिकंजा, झाझरा में पांच बीघा अनधिकृत प्लॉटिंग ध्वस्त>>देहरादून में कुष्ठ रोग मुक्त लाभार्थियों की हुई निःशुल्क स्वास्थ्य जांच>>एसआईआर को लेकर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक>>मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जन्मदिन पर यमकेश्वर शिव मंदिर में होगा रुद्राभिषेक व यज्ञ>>वजन घटाने के लिए कर रहे हैं इंटरमिटेंट फास्टिंग? पहले जान लें इसके फायदे और नुकसान>>बांग्लादेश में अवामी लीग के 7 बड़े नेताओं को फांसी की सजा>>तमिलनाडु में सीएम विजय की टिप्पणी को लेकर विवाद, डीएमके के ए राजा समेत तीन नेताओं पर केस>>पटना में छात्रों का प्रदर्शन, अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे अभ्यर्थी>>मुख्यमंत्री धामी ने की चारधाम यात्रा-2026 की व्यवस्थाओं की समीक्षा>>पुरानी पेंशन प्रकरण को लेकर मातृ-शिशु एवं कल्याण संगठन का शिष्टमंडल मुख्यमंत्री से मिला>>मंत्री राम सिंह कैड़ा ने किया सड़क निर्माण कार्य का शुभारंभ, ग्रामीणों ने फूल-मालाओं से किया स्वागत>>‘रामायण’ का पहला गाना ‘जय जय राम’ हुआ रिलीज, रणबीर-साई की जोड़ी ने जीता दर्शकों का दिल>>IND VS AFG- वरुण चक्रवर्ती चोटिल होने के कारण अफगानिस्तान सीरीज से बाहर>>राष्ट्रीय इंजीनियर दिवस पर पीएम मोदी ने विश्वेश्वरैया को दी श्रद्धांजलि, इंजीनियरों के योगदान को सराहा>>कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की श्री केदारनाथ धाम यात्रा व्यवस्थाओं की समीक्षा>>राज्य सरकार कर रही खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने का काम -रेखा आर्या>>चारधाम यात्रा के दूसरे चरण का आगाज आज, 50.50 लाख से अधिक श्रद्धालु कर चुके दर्शन>>हिमालय केवल भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक चेतना का महत्वपूर्ण आधार है-मुख्यमंत्री>>युवाओं की भागीदारी से साकार होगा विकसित भारत-2047 का संकल्प: डॉ धन सिंह रावत>>प्रधानमंत्री के जन्मदिवस पर होंगे विभिन्न कार्यक्रम आयोजित, विभागीय स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी किया जाएगा सम्मानित-रेखा आर्या
ताज़ा खबरेंदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन स्थित विश्व भारती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में हुए शामिल

आकाश ज्ञान वाटिका, 19 फरवरी 2021, शुक्रवार। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज विश्व भारती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विश्वभारती के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए गुरुदेव रबिंद्रनाथ टैगोर और विश्व भारती विश्वविद्यालय के महत्व को लेकर बात की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में विश्व भारती विश्वविद्यालय को देश के शिक्षा संस्थाओं का नेतृत्व करना चाहिए। इस दौरान उन्होंने बंगाल के महत्व पर भी बात की।

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि भारत जो है, जो मानवता, जो आत्मीयता, जो विश्व कल्याण की भावना हमारे रक्त के कण-कण में है। उसका एहसास बाकी देशों को कराने के लिए विश्व भारती को देश की शिक्षा संस्थाओं का नेतृत्व करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मेरा आग्रह है, अगले 25 वर्षों के लिए विश्व भारती के विद्यार्थी मिलकर एक विजन डॉक्यूमेंट बनाएं। वर्ष 2047 में, जब भारत अपनी आजादी के 100 वर्ष का समारोह बनाएगा, तब तक विश्व भारती के 25 सबसे बड़े लक्ष्य क्या होंगे, ये इस विजन डॉक्यूमेंट में रखे जा सकते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि बंगाल ने अतीत में भारत के समृद्ध ज्ञान-विज्ञान को आगे बढ़ाने में देश को नेतृत्व दिया। उन्होंने कहा कि बंगाल, एक भारत, श्रेष्ठ भारत की प्रेरणा स्थली भी रहा है और कर्मस्थली भी रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि हम इस वर्ष अपनी आजादी के 75वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि विश्व भारती के प्रत्येक विद्यार्थी की तरफ से देश को सबसे बड़ा उपहार होगा कि भारत की छवि को और निखारने के लिए आप ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक करें।

इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि हाल ही में सरकार ने देश और दुनिया के लाखों Journals की फ्री एक्सेस अपने Scholars को देने का फैसला किया है। इस साल बजट में भी रिसर्च के लिए नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के माध्यम से आने वाले 5 साल में 50 हज़ार करोड़ रुपए खर्च करने का प्रस्ताव रखा है।

पीएम मोदी ने कहा कि विश्व भारती तो अपने आप में ज्ञान का वो उन्मुक्त समंदर है, जिसकी नींव ही अनुभव आधारित शिक्षा के लिए रखी गयी थी। ज्ञान की Creativity की कोई सीमा नहीं होती है, इसी सोच के साथ गुरुदेव ने इस महान विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि सफलता और असफलता हमारा वर्तमान और भविष्य तय नहीं करती। हो सकता है आपको किसी फैसले के बाद जैसा सोचा था वैसा परिणाम न मिले, लेकिन आपको फैसला लेने में डरना नहीं चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि गुरुदेव टैगोर ने विश्वभारती में जो व्यवस्थाएं विकसित कीं, जो पद्धतियां विकसित कीं, वो भारत की शिक्षा व्यवस्था को परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्त करने, उन्हें आधुनिक बनाने का एक माध्यम थीं।

जिस प्रकार सत्ता में रहते हुए संयम और संवेदनशील रहना पड़ता है, रहना जरूरी होता है, उसी प्रकार हर विद्वान को, हर जानकार को भी उनके प्रति जिम्मेदार रहना पड़ता है जिनके पास वो शक्ति है। आपका ज्ञान सिर्फ आपका नहीं, बल्कि समाज की, देश की हर एक भावी पीढ़ियों की भी वो धरोहर है। आपका ज्ञान अपकी स्किल एक समाज, एक राष्ट्र को गौरवान्वित भी कर सकती है।

विश्व भारती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि गुरुदेव रबिन्द्रनाथ टैगोर ने जो अद्भुत धरोहर मां भारती को सौंपी हैं, उसका हिस्सा बनना, आप सभी साथियों से जुड़ना, मेरे लिए प्रेरक भी है और आनंददायक भी है। पीएम मोदी ने कहा कि इस बार तो कुछ समय के अंतराल पर मुझे दूसरी बार ये मौका मिला है। दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आपके जीवन के इस महत्वपूर्ण अवसर पर आप सभी युवा साथियों को, माता पिता को और गुरुजनों को मैं बहुत बहुत बधाई और अनेक अनेक शुभकामनाएं देता हूं।

छात्रों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आप सिर्फ एक विश्वविद्यालय का ही हिस्सा नहीं हैं, बल्कि एक जीवंत परंपरा का हिस्सा भी हैं। उन्होंने कहा कि गुरुदेव अगर विश्व भारती को सिर्फ एक यूनिवर्सिटी के रूप में देखना चाहते, तो वो इसे ग्लोबल यूनिवर्सिटी या कोई और नाम दे सकते थे, लेकिन उन्होंने इसे विश्व भारती विश्वविद्यालय नाम दिया। पीएम मोदी ने कहा कि गुरुदेव टैगोर के लिए विश्व भारती सिर्फ ज्ञान देने वाली एक संस्था मात्र नहीं थी। ये एक प्रयास है भारतीय संस्कृति के शीर्षस्थ लक्ष्य तक पहुंचने का। उन्होंने कहा कि गुरुदेव कहते थे – हे श्रमिक साथियों, जानकर साथियों, हे समाजसेवियों, हे संतों, समाज के सभी जागरूक साथियों। आइये समाज की मुक्ति के लिए मिलकर प्रयास करें।

पीएम नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विश्वभारती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ भी इस समारोह में उपस्थित हैं।

पश्चिम बंगाल के शांति निकेतन स्थित विश्व भारती एक ऐसा विश्वविद्यालय है, जहां प्राचीन भारत की आत्मा बसती है। विश्व भारती की स्थापना 1921 में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने की थी। यह देश का सबसे पुराना केंद्रीय विश्वविद्यालय है। यहां आज भी खुले आकाश तले पेड़ों की छांव में कक्षाएं लगती हैं। इस विश्वविद्यालय में आज भी गुरुकुल व्यवस्था की तरह ही खुले आकाश तले पेड़ों की छांव में कक्षाएं लगती हैं। इसका मतलब यह नहीं कि विश्वविद्यालय कंप्यूटरीकृत ऑनलाइन शिक्षा के इस युग में पिछड़ा होगा। विश्व भारती विश्वविद्यालय भारत का केंद्रीय विश्वविद्यालय ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय महत्व का संस्थान भी घोषित है। परिसर में हर ओर भारतीय सांस्कृतिक विरासत की अनूठी झलक दिखाई देती है। शांति निकेतन में विश्वभारती विश्वविद्यालय की शुरुआत एक आश्रम के तौर पर गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर (ठाकुर) के पिता महर्षि देवेंद्रनाथ टैगोर ने 1863 में एक आश्रम की स्थापना की थी। बाद में रवींद्रनाथ टैगोर ने इस विश्वविद्यालय को स्थापित किया। 1901 में केवल 5 छात्रों के साथ गुरुदेव रबींद्रनाथ टैगोर ने इसकी शुरुआत की थी। 1921 में इसे राष्ट्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला। विश्वभारती को 1951 में केंद्रीय विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा मिला था। यह एकमात्र केंद्रीय विवि है, जिसके कुलाधिपति देश के प्रधानमंत्री होते हैं।

Loading

Ghanshyam Chandra

AKASH GYAN VATIKA (www.akashgyanvatika.com) is one of the leading and fastest growing web News Portal which provides latest information about the Political, Social Activities, Environmental, entertainment, sports, General Awareness etc. I, GHANSHYAM CHANDRA, EDITOR, AKASH GYAN VATIKA provide News and Articles about the abovementioned subject and also provide latest/current state/national/international News on various subject.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!