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उत्तराखण्ड

अतिक्रमण की पहचान को सैटेलाइट से नक्शा मिला, भाषा की आई अड़चन

देहरादून: काठबंगला क्षेत्र में सरकारी भूमि पर किया गया अतिक्रमण किस-किस अवधि में हुआ, इसकी पहचान नहीं हो पाई। अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट करने के लिए अलग-अलग अवधि के सेटेलाइट नक्शे तो प्राप्त हो गए, मगर उर्दू भाषा वाले जिस राजस्व नक्शे के आधार पर अतिक्रमण की पहचान की जानी थी, उसे पढ़ने के लिए कोई अनुवादक मिला ही नहीं। यह स्थिति तब है, जब देहरादून में चार-चार उर्दू अनुवादकों की नियुक्ति की गई है। यह बात और है कि जिस अभिलेख कार्यालय में उर्दू के नक्शे हैं, वहां एक भी अनुवादक की तैनाती नहीं की गई है।

गंभीर यह भी कि उर्दू अनुवादक की व्यवस्था करने के लिए यूसैक निदेशक डॉ. एमपीएस बिष्ट ने अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) अरविंद कुमार पांडे को सूचित कर दिया था। अपर जिलाधिकारी ने इस पर हामी भरते हुए कहा कि उर्दू अनुवादक को उनके कार्यालय के लिए रवाना कर दिया गया है।

हालांकि यूसैक निदेशक देर शाम तक कार्यालय में इंतजार करते रहे, मगर उनके पास कोई उर्दू अनुवादक पहुंचा ही नहीं। दूसरी तरफ सेटेलाइट व राजस्व नक्शे से अतिक्रमण चिह्नित किए जाने को लेकर मंडलायुक्त शैलेष बगोली ने बैठक भी रखी है।

इस पर यूसैक निदेशक डॉ. बिष्ट का कहना है कि उनकी अपनी तैयारी पूरी थी, राजस्व नक्शे पर स्थिति साफ न होने के चलते आगे की कार्रवाई नहीं हो सकी। इस बारे में मंडलायुक्त को भी अवगत करा दिया गया है।

इसलिए जरूरी है राजस्व नक्शा

काठबंगला क्षेत्र काफी बड़ा है, जबकि अधिकारियों को यह स्पष्ट करना है कि इस क्षेत्र में सरकारी भूमि पर कब्जों की क्या स्थिति है और वह किस-किस अवधि में हुए। इसके लिए यूसैक ने वर्ष 2003 से अब तक के सेटेलाइट नक्शे मंगा लिए हैं। राजस्व नक्शे को इस नक्शे पर सुपरइंपोज करके वर्तमान में आए अंतर पता करना था।

1400 फसली वर्ष से पहले के नक्शे उर्दू में

फसली वर्ष 1400 (वर्ष 1992) से पहले जो भी बंदोबस्त (रिकॉर्ड सैटेलमेंट) हुए हैं, उनके सभी नक्शे उर्दू में है। दून में अतिक्रमण हटाने के लिए 1345 फसली वर्ष (वर्ष 1937-38) के नक्शों को ही आधार बनाया गया है। यह नक्शे सबसे उपयुक्त भी हैं। यह जानते हुए भी अभिलेख कार्यालय में उर्दू अनुवादकों की तैनाती न किया जाना अपने आप में बड़ा सवाल है।

अतिक्रमण पर नहीं चली जेसीबी

हाईकोर्ट के आदेश पर चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान की रफ्तार धीमी पड़ गई है। पिछले एक सप्ताह से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी तरह से ठप है। स्थिति यह है कि शहर में चिह्नित 6754 अतिक्रमण में से सिर्फ 3321 पर ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हो पाई है।

कांवड़ यात्रा और बारिश के चलते पिछले एक सप्ताह से अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई धीमी गति से चल रही है। हालांकि, अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश हर दिन टास्क फोर्स को अतिक्रमण हटाओ अभियान में तेजी लाने के निर्देश दे रहे हैं। मगर, अपर मुख्य सचिव के इस आदेश का असर देखने को नहीं मिल रहा है।

इससे अतिक्रमण हटाओ अभियान अब पूरी तरह से औपचारिक नजर आने लगा है। इससे अतिक्रमण की जद में आये लोगों में भी अब नाराजगी दिखने लगी है। जिन लोगों के अतिक्रमण हटाए गए हैं, वह अब पूरे शहर में चिह्नित अतिक्रमण हटाने के पक्ष में हैं, लेकिन कार्रवाई सुस्त पड़ने  से लोग सवाल उठाने लगे हैं।

हालांकि टास्क फोर्स के अफसरों का कहना है कि बारिश और कांवड़ यात्रा से अभियान प्रभावित हुआ है। जल्द अभियान की रफ्तार तेज हो जाएगी। इधर, गुरुवार को अभियान में जुटी टीम ने शहर के तीन जोन में 124 अतिक्रमण पर लाल निशान लगाए गए हैं।

एस्टीमेट एक बार में करें प्रस्तुत 

अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने कहा कि शहर की सौंदर्यीकरण योजना के लिए एक बार ही एस्टीमेट दें। उन्होंने लोनिवि, एमडीडीए, सिंचाई आदि विभागों को निर्देश दिए कि एस्टीमेट में होने वाले कामों का विवरण स्पष्ट दिया जाए। ताकि संशय की स्थिति न रहे। इसमें किसी भी तरह की ढील बर्दास्त नहीं होगी।

सड़कों पर गड्ढों को करें सुरक्षित 

अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने शहर की सड़कों पर बने गड््ढों को भरने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने लोक निर्माण विभाग को सख्त हिदायत दी कि यदि गड््ढों की वजह से कोई दुर्घटना होती तो ऐसे में मामलों में सीधी जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

नेशविला रोड पर फिर हुआ विवाद 

नेशविला रोड पर पिलर लगाने को विवाद हो गया। कांग्रेस भवन के पीछे पूर्व में चिह्नित जगह पर पिलर लगाने पहुंची टास्क फोर्स की टीम का स्थानीय व्यापारियों ने विरोध किया है। हालांकि टीम में शामिल सदस्यों ने लाल निशान के अनुरूप ही पिलर लगाने की बात कही।

इस दौरान कांग्रेस महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा ने मौके पर पहुंचकर सही जगह पिलर लगाने की मांग की। इसके बाद टीम ने लाल निशान से बाहर पिलर लगाते हुए कार्रवाई शुरू की।

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Ghanshyam Chandra

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