हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (HIMS) जौलीग्रांट बना आईसीएमआर का क्षेत्रीय केंद्र

500 अस्पतालों के संक्रमण नियंत्रण नेटवर्क को देगा मजबूती
आकाश ज्ञान वाटिका, शुक्रवार, 21 अगस्त 2026, देहरादून। यह राष्ट्रीय परियोजना प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM) के तहत ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल पर संचालित की जाएगी। परियोजना का उद्देश्य देशभर में अस्पताल संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था को अधिक प्रभावी, वैज्ञानिक और मानकीकृत बनाना है। इसके अंतर्गत 100 जिला अस्पतालों तथा 400 निजी अस्पतालों एवं नर्सिंग होम सहित कुल 500 स्वास्थ्य संस्थानों को एक व्यापक नेटवर्क से जोड़े जाने का लक्ष्य रखा गया है।
अस्पताल संक्रमण नियंत्रण समिति की अध्यक्ष एवं परियोजना प्रमुख डॉ. गरिमा मित्तल ने बताया कि हिम्स जौलीग्रांट का क्षेत्रीय केंद्र के रूप में चयन संस्थान में संक्रमण नियंत्रण के क्षेत्र में विकसित मजबूत कार्यप्रणाली और विशेषज्ञता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि परियोजना के माध्यम से अस्पतालों को संक्रमण की निगरानी, रोकथाम और नियंत्रण के लिए आवश्यक तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
क्षेत्रीय केंद्र के रूप में हिम्स जौलीग्रांट अपने आसपास के जिला अस्पतालों, निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम को राष्ट्रीय नेटवर्क से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। संस्थान की विशेषज्ञ टीम संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों के चिकित्सकों, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ को संक्रमण नियंत्रण की आधुनिक तकनीकों, मानकों और प्रभावी प्रबंधन प्रणाली के संबंध में प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार अस्पतालों में संक्रमण की रोकथाम मरीजों की सुरक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में आईसीएमआर की इस परियोजना से संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था को जमीनी स्तर तक मजबूत करने में मदद मिलेगी। हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (HIMS), जौलीग्रांट को मिली यह जिम्मेदारी उत्तराखंड में चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में संस्थान की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करती है।
विशेषज्ञों की टीम संभालेगी राष्ट्रीय परियोजना की कमान : इस दो वर्षीय राष्ट्रीय परियोजना का नेतृत्व डॉ. गरिमा मित्तल कर रही हैं। परियोजना को सफल बनाने के लिए डॉ. हेम चंद्र पांडे, डॉ. सोएब अहमद, डॉ. राजेंद्र सिंह, डॉ. अर्पणा सिंह, डॉ. निक्कू यादव, डॉ. नेहा शर्मा, डॉ. दिव्या अंथवाल और श्वेता सामंत सह-अन्वेषक के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे। वहीं, डॉ. ए.के. देवरारी, डॉ. बिंदु डे और डॉ. किरण काटोच अपने अनुभव एवं विशेषज्ञ मार्गदर्शन से परियोजना को दिशा प्रदान करेंगे। विशेषज्ञों की यह समर्पित टीम अस्पतालों में संक्रमण की रोकथाम और मरीजों की सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगी। निश्चित रूप से यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता और सुरक्षा के नए मानक स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगी।
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