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धार्मिक

रोशनी एवं प्रसन्नता के पर्व दीपावली का तीसरा दिन – माँ लक्ष्‍मी की की पूजा

आकाश ज्ञान वाटिका। रविवार, २७ अक्टूबर। आज रोशनी एवं प्रसन्नता के पर्व दीपावली का तीसरा दिन है। जैसा कि हम जानते हैं दीपावली दीपावली पर्वों का समूह है। दीपावली त्यौंहार के दौरान अलग-अलग प्रकार के पूजन किये जाते हैं। दीपावली से दो दिन पूर्व धनतेरस का त्योहार आता है। धनतेरस के अगले दिन नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली होती है। इस दिन यम पूजा हेतु दीपक जलाए जाते हैं। नरक चतुर्दशी के अगले दिन दीपावली आती है। इस दिन घरों में सुबह से ही तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं। बाज़ारों में खील-बताशे, मिठाइयाँ, खांड़ के खिलौने, लक्ष्मी-गणेश आदि की मूर्तियाँ बिकने लगती हैं। स्थान-स्थान पर आतिशबाजी और पटाखों की दूकानें सजी होती हैं। सुबह से ही लोग रिश्तेदारों, मित्रों, सगे-संबंधियों के घर मिठाइयाँ व उपहार बाँटने लगते हैं। दीपावली की शाम लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा की जाती है। पूजा के बाद लोग अपने-अपने घरों के बाहर दीपक व मोमबत्तियाँ जलाकर रखते हैं। चारों ओर चमकते दीपक अत्यंत सुंदर दिखाई देते हैं। रंग-बिरंगे बिजली के बल्बों से बाज़ार व गलियाँ जगमगा उठते हैं। बच्चे तरह-तरह के पटाखों व आतिशबाज़ियों का आनंद लेते हैं।

दीवाली के दिन विशेष रूप से मां लक्ष्‍मी की पूजा की जाती है  मान्‍यता है कि इस दिन लक्ष्‍मी पूजन करने से मां प्रसन्न होती हैं और घर पर उनका वास होता है। वैसे तो दीवाली पर मां लक्ष्‍मी की षोडशोपचार यानी कि 16 तरीके से पूजा करने का विधान है। हिन्‍दू पंचांग के अनुसार दीपावली कार्तिक मास के कृष्‍ण पक्ष की अमावस्‍या को मनाई जाती है। दीवाली हर साल अक्‍टूबर या नवंबर महीने में आती है। इस बार दीवाली 27 अक्‍टूबर को है।
दिवाली के दिन घर की अच्छी तरह से सफाई करें। विशेषकर मुख्य द्वार को बहुत अच्छी तरह से साफ करें। इसके बाद मुख्य द्वार पर हल्दी का जल छिड़कें। भगवान गणेश को दूब-घास और मां लक्ष्मी को कमल का पुष्प चढ़ाना चाहिए। ये वस्तुएं दोनों देवी-देवता को अत्याधिक प्रिय हैं। घर के बाहर रंगोली अवश्य बनाएं। रंगोली को शुभ माना जाता है।

दीपावली पूजन:

दीवाली के दिन सुबह उठकर सबसे पहले घर की अच्‍छे से साफ सफाई करें तत्पश्चात स्‍नान कर स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करें। सुबह के समय घर के मंदिर में दीपक जलाएं और नियमित पूजा करें। शाम के समय सुंदर और स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करें। इसके बाद पूजा से पहले पूरे घर में गंगाजल छिड़क कर शुद्धिकरण करें तथा एक कलश स्‍थापित करें। कलश के बगल में चौकी के ऊपर हल्‍दी से एक कमल बनाएं और उसके ऊपर देवी लक्ष्‍मी की प्रतिमा रखें। मां लक्ष्‍मी की प्रतिमा के सामने कुछ सिक्‍के भी रखें तथा इसके बाद मां लक्ष्‍मी के दाहिने ओर गणेशजी की प्रतिमा रखें। अब एक थाली में हल्‍दी, कुमकुम और चावल के दानें रखें और उनके साथ दीपक जलाकर रखें। इसके बाद सबसे पहले कलश को तिलक लगाकर पूजा की शुरुआत करें। हाथ में फूल और चावल लेकर मां लक्ष्‍मी का ध्‍यान करें। अब भगवान गणेश और मां लक्ष्‍मी की प्रतिमा पर फूल और अक्षत चढ़ाएं। इसके बाद उनकी प्रतिमा को चौकी से उठाकर एक थाली में रखें और पंचामृत से स्‍नान कराएं। अब दोनों प्रतिमाओं को साफ पानी से स्‍नान कराएं और उन्‍हें पोंछकर वापस चौकी पर रख दें। अब लक्ष्‍मी-गणेश की प्रतिमा को टीका लगाएं तथा दोनों को माला चढ़ाएं, साथ ही बेल पत्र और गेंदे का फूल अर्पित कर धूप जलाएं। भगवान गणेश और मां लक्ष्‍मी को नारियल, धनिया के बीज, जीरा और खीले चढ़ाएं एवं प्रतिमा के सामने खीले-खिलौने, बताशे, मिठाइयां फल, पैसे और सोने के आभूषण रखें। अब पूरे परिवार के साथ मिलकर मां लक्ष्‍मी की आरती उतारें तथा आरती के बाद मंदिर में रखे दीपकों को घर के अलग-अलग स्‍थानों पर ले जाकर रख दें।

 

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Ghanshyam Chandra

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