देशविज्ञान एवं प्राद्यौगिकी

चंद्रयान – २ अभियान सफलता की ओर आगे बढ़ा – इसरो ने चंद्रयान – 2 के लैंडर ‘विक्रम’ की लोकेशन पता लगा लिया है

  • इसरो ने चंद्रयान – 2 के लैंडर ‘विक्रम’ की लोकेशन पता लगा लिया है।
  • चंद्रयान – 2 के ऑर्बिटर ने चंद्रमा की सतह पर लैंडर ‘विक्रम’ की थर्मल तस्वीरें ली हैं।
  • अभी तक लैंडर ‘विक्रम’ से संपर्क नहीं स्थापित हो सका है।
  • ‘विक्रम’ ने ‘रफ ब्रेकिंग’ और ‘फाइन ब्रेकिंग’ चरणों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया था।
  • ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ से पहले इसका संपर्क धरती पर मौजूद स्टेशन से टूट गया था।

नई दिल्ली: रविवार, ८ सितम्बर। चंद्रयान – २ अभियान में एक कदम और आगे बढ़ते हुए, चाँद से भारतवर्ष के लिए यह खुशखबरी आयी है कि ‘इसरो ने चंद्रयान – 2 के लैंडर ‘विक्रम’ की चाँद की सतह पर लोकेशन पता लगा लिया है।’ अब चंद्रयान -२ मिशन ९५ फ़ीसदी नहीं बल्कि ९९ फ़ीसदी सफल माना जायेगा।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) चीफ के. सिवन ने कहा है कि ‘इसरो ने चंद्रयान – 2 के लैंडर ‘विक्रम’ की लोकेशन पता लगा ली है। उन्होंने कहा कि चंद्रयान – 2 के ऑर्बिटर ने चंद्रमा की सतह पर लैंडर ‘विक्रम’ की थर्मल तस्वीरें ली हैं । हालांकि इसरो चीफ ने कहा है कि अभी तक लैंडर ‘विक्रम’ से संपर्क नहीं स्थापित हो सका है। संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं, जल्दी ही संपर्क स्थापित किया जाएगा।’ आकाश ज्ञान वाटिका परिवार की ओर से भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान संगठन इसरो के वैज्ञानिकों एवं समस्त भारतवासियों को बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनायें। आज वैज्ञानिकों की श्रेष्ठ बुद्धिमता व लगन के कारण ही हमारा देश विज्ञान एवं तकनिकी के क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देशों की श्रेणी में आता हैं।

 

ज्ञात रहे कि चंद्रयान-२, चंद्रयान-1 के बाद भारत का दूसरा चन्द्र अन्वेषण अभियान है, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान संगठन (इसरो) ने विकसित किया है। अभियान को जीएसएलवी संस्करण 3 प्रक्षेपण यान द्वारा प्रक्षेपित किया गया। इस अभियान में भारत में निर्मित एक चंद्र कक्षयान, एक रोवर एवं एक लैंडर शामिल हैं। इन सब का विकास इसरो द्वारा किया गया है। भारत ने चंद्रयान-2 को 22 जुलाई 2019 को श्रीहरिकोटा रेंज से भारतीय समयानुसार अपराह्न 02:43 बजे सफलता पूर्वक प्रक्षेपित किया। चंद्रयान-2 लैंडर और रोवर ने चंद्रमा पर लगभग 70° दक्षिण के अक्षांश पर स्थित दो क्रेटरों मज़िनस सी और सिमपेलियस एन के बीच एक उच्च मैदान पर उतरने का प्रयास किया । पहिएदार रोवर चंद्र सतह पर चलेगा और जगह का रासायनिक विश्लेषण करेगा। पहिएदार रोवर चन्द्रमा की सतह पर चलेगा तथा वहीं पर विश्लेषण के लिए मिट्टी या चट्टान के नमूनों को एकत्र करेगा। आंकड़ों को चंद्रयान-2 कक्षयान के माध्यम से पृथ्वी पर भेजा जायेगा। लेकिन ‘चंद्रयान-2’ के लैंडर ‘विक्रम’ का चांद पर उतरते समय जमीनी स्टेशन से संपर्क टूट गया था। सपंर्क तब टूटा जब लैंडर चाँद की सतह से 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर था।

Ghanshyam Chandra

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