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कृष्ण भक्ति में सराबोर हुआ श्री सनातन धर्म मंदिर, छठी उत्सव में गूँजे राधे-राधे और हरे कृष्ण के जयकारे

आकाश ज्ञान वाटिका, बुधवार, 9 सितम्बर, 2026, देहरादून। नेहरू कॉलोनी स्थित श्री सनातन धर्म मंदिर में जन्माष्टमी के पावन अवसर पर आयोजित भगवान श्रीकृष्ण के छठी उत्सव में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। मंदिर परिसर में ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं वृंदावन की भक्ति धरा पर उतर आई हो। चारों ओर भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति के स्वर गूँज रहे थे और श्रद्धालु प्रेम, आस्था एवं समर्पण में डूबे नजर आए।

धार्मिक कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत किए गए मधुर भजनों ने वातावरण को पूरी तरह कृष्णमय कर दिया। ‘मेरी विनती यही है राधा रानी’, ‘कन्हैया तू काला क्यों’, ‘है श्याम तेरी मुरली’ तथा ‘हरे राम हरे कृष्णा’ जैसे लोकप्रिय भजनों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। जैसे-जैसे भक्ति गीतों के स्वर ऊंचे होते गए, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं की आँखों में भक्ति के आँसू और हृदय में श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम और गहरा होता गया।

भजनों के बीच मंदिर परिसर ‘जय श्रीकृष्ण’, ‘राधे-राधे’ और ‘हरे कृष्ण-हरे राम’ के जयघोष से गूँज उठा। वातावरण में गूँजती घंटियों, भजनों और जयकारों ने ऐसा आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया, जिसमें उपस्थित प्रत्येक श्रद्धालु स्वयं को भगवान की भक्ति के निकट अनुभव कर रहा था।

छठी उत्सव के अवसर पर श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना की तथा परिवार और समाज के सुख, शांति, समृद्धि एवं मंगल की कामना की। श्रद्धालुओं का कहना था कि श्रीकृष्ण केवल एक आराध्य देव नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाले महान मार्गदर्शक भी हैं। उनका संदेश मनुष्य को कठिन परिस्थितियों में भी धर्म, सत्य, कर्म और कर्तव्य के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है।

भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें यह संदेश देता है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, मनुष्य को अपने कर्तव्य से विमुख नहीं होना चाहिए। ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’ का संदेश आज भी जीवन के संघर्षों में आशा और साहस का प्रकाश देता है। यही कारण है कि कृष्ण भक्ति केवल पूजा तक सीमित नहीं रहती, बल्कि मनुष्य के भीतर सकारात्मक सोच, प्रेम, करुणा और आत्मविश्वास का संचार करती है।

छठी उत्सव में श्रद्धालुओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने धार्मिक आयोजन को यादगार बना दिया। बुजुर्गों से लेकर युवाओं और महिलाओं तक सभी ने भक्ति भाव से कार्यक्रम में सहभागिता की। श्रद्धालुओं के चेहरों पर दिखाई दे रही प्रसन्नता और आत्मिक शांति इस बात का प्रमाण थी कि जहां श्रीकृष्ण का नाम होता है, वहाँ निराशा का अंधकार अधिक देर टिक नहीं सकता।

इस अवसर पर शिवकुमार तोमर, एसके सिंह, प्रदीप शर्मा, प्रदीप सुदी, हरीश निगोलिया, राजन गुप्ता, शमशेर दत्त, वीके छतवाल, चंद्रकांता, सुनीता, अलका, नीलम वाधवा, किरण, शानू, करिश्मा, एसके त्यागी, बिजेंदर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

श्री सनातन धर्म मंदिर में आयोजित यह छठी उत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भक्ति, संस्कार, संस्कृति और सामाजिक एकता का सुंदर संदेश बनकर सामने आया। भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में समर्पित इस आयोजन ने एक बार फिर यह अनुभूति कराई कि जब हृदय में श्रद्धा हो और अधरों पर कृष्ण का नाम, तो जीवन का हर क्षण उत्सव बन जाता है।

श्री राधे-राधे की मधुर पुकार,
श्री कृष्ण नाम का हो संसार।
धर्म, कर्म और प्रेम का संदेश,
यही कान्हा का है जीवन-सार।

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Ghanshyam Chandra

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