प्रहरी हिमालय

आकाश ज्ञान वाटिका, बुधवार, 9 सितम्बर, 2026, देहरादून।
हिमालय भारत का सिरमौर और सामरिक प्रहरी है,
आर्थिक, भौगोलिक,आध्यात्मिक,जलवायु का आधार है।
हिमालय प्रतिज्ञा का, जोर हो रहा है,
हिमालय बचाओ का, शोर हो रहा है।
सभा, गोष्ठियों की, चहुँदिसि भरमार है,
हिमालय की समस्या समाधान की, मौखिक बौछार है।
क्या हो रहा है, क्या नहीं होना चाहिए, सब जानते हैं,
प्रतिक्षण हिमालय की बदलती दशा, सब पहचानते हैं।
हिमालयी जलवायु परिवर्तन से, सभी भिज्ञ हैं,
ग्लेशियरीय हलचल से सभी विज्ञ है।
प्राकृतिक विभिषिकाओं से जन मानस त्रस्त हैं,
चिरकालीन परंपरायें, सभ्यता, संस्कृति, संस्कार सब ध्वस्त हैं।
विकास की होड़ में विनाश हो रहा है,
फलस्वरुप पर्वतराज अपनी नैसर्गिकता खो रहा है।
समय की पुकार है, सचेत हो जाओ,
भविष्य की पीढीयों हेतु, हिमालय बचाओ।
जमघट, प्लास्टिक, कचरे को करो नियंत्रित,
जिससे न हो कभी जल,वायु, ताप, मृदा प्रदूषित।
होटल, बाँध, सड़क, सुरंगों का गहन आँकलन हों,
समुचित तकनीकी निर्माण, नियोजन हेतु नियम सख्त हों।
प्राकृतिक सीमा,जैव विविधता, अभयारण्य बचायें,
औषधीय वनस्पति, जड़ी- बूटियाँ उगाऐं।
जंगल, वन्यजीव, तीर्थ, सामरिक सीमा बचायें,
वृक्षारोपण की अधिकता से भू-क्षरण रूकवायें।
पर्वतीय श्रृंखलाओं का प्रदूषण हटायें,
नदी स्वच्छता, संरक्षण, हेतु प्रतिबद्धता बढ़ायें।
प्राकृतिक सम्पदाओं का करें ना दोहन,
विश्व के जन-जन को जागरुक करें हम।

सुरक्षित हिमालय हेतु,
कर्तव्यों पर हो सतर्कता का आवरण,
उद्देश्यपूर्ण होगा शोभन तभी,
“हिमालय बचाओ प्रतिज्ञा” का प्रण।
साभार : शोभा पांडे “शोभन” देहरादून
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