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मणिपुर हिंसा के बीच इंटरनेट सेवा बहाल, मोबाइल इंटरनेट पर अभी भी है प्रतिबंध, सोशल मीडिया पर भी रोक

आकाश ज्ञान वाटिका, बुधवार, 26 जुलाई 2023, इंफाल। मणिपुर सरकार ने हिंसा के बीच सभी वर्गों के लोगों की मांगों पर विचार करते हुए जातीय हिंसा प्रभावित राज्य में 84 दिनों के बाद इंटरनेट पर प्रतिबंध आंशिक रूप से हटा दिया है। मणिपुर के गृह आयुक्त टी. रंजीत सिंह ने एक आदेश में कहा कि राज्य सरकार ने ब्रॉडबैंड सेवा (इंटरनेट लीज लाइन और फाइबर टू द होम) के मामले में 10 शर्तों को पूरा करने के अधीन सशर्त रूप से उदार तरीके से निलंबन हटाने का विचार किया है, जिसमें यह भी शामिल है कि कनेक्शन केवल स्टेटिक आईपी के माध्यम से होना चाहिए। मोबाइल इंटरनेट पर अभी भी प्रतिबंध है। साथ ही सोशल मीडिया वेबसाइटों तक भी पहुंच नहीं होगी।

आदेश में कहा गया है कि राज्य सरकार ने मोबाइल डेटा सेवा के लिए प्रभावी नियंत्रण और नियामक तंत्र की तैयारी के रूप में मोबाइल इंटरनेट डेटा को निलंबित रखने का फैसला किया है, क्योंकि व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर आदि जैसे विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से गलत सूचना और झूठी अफवाहें फैलने की अभी भी आशंका है।
इसमें कहा गया है कि टैबलेट, कंप्यूटर, मोबाइल फोन आदि जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग करके आंदोलनकारियों और प्रदर्शनकारियों की भीड़ को बढ़ावा देने या संगठित करने के लिए बल्क एसएमएस और अन्य संदेश फैलाए जा सकते हैं, जो आगजनी और बर्बरता और अन्य प्रकार की हिंसक गतिविधियों में शामिल होकर जीवन की हानि या सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिसके लिए नियंत्रण तंत्र अभी भी खराब है।

सिंह ने अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकार ने 3 मई से लगातार बिना किसी ब्रेक के इंटरनेट पर प्रतिबंध के मुद्दों की समीक्षा की है (छूट वाले मामलों को छोडक़र) और आम लोगों की पीड़ा पर विचार किया है, क्योंकि इंटरनेट प्रतिबंध ने महत्वपूर्ण कार्यालयों, संस्थानों, घर से काम करने वाले लोगों के समूह, चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्मों, वकीलों, स्वास्थ्य सुविधाओं, ईंधन भरने वाले केंद्रों, बिजली, मोबाइल रिचार्जिंग, एलपीजी के लिए बुकिंग, शैक्षणिक संस्थानों, कराधान-संबंधित कार्यालयों, अन्य ऑनलाइन आधारित नागरिक केंद्रित सेवाओं आदि को प्रभावित किया है।

अदालत के सूत्रों ने शनिवार को कहा, मणिपुर में इंटरनेट सेवाओं के निलंबन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट, मणिपुर उच्च न्यायालय और मणिपुर मानवाधिकार आयोग (एमएचआरसी) में कई मामले दायर किए गए थे। मणिपुर उच्च न्यायालय ने इस महीने की शुरुआत में राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने के बाद राज्य भर में इंटरनेट लीज लाइन (आईएलएल) के माध्यम से इंटरनेट प्रदान करने पर प्रतिबंध हटाने का निर्देश दिया है कि सभी हितधारकों ने पहले गठित विशेषज्ञ समिति द्वारा दिए गए सुरक्षा उपायों का अनुपालन किया है।

न्यायमूर्ति अहनथेम बिमोल सिंह और न्यायमूर्ति ए. गुणेश्वर शर्मा की खंडपीठ ने 7 जुलाई को एक आदेश में राज्य सरकार को जनता के लिए इंटरनेट सेवाओं तक सीमित पहुंच की सुविधा के लिए राज्य भर में आईएलएल के माध्यम से इंटरनेट प्रदान करने पर प्रतिबंध हटाने और मामले के आधार पर फाइबर टू द होम कनेक्शन (एफटीटीएच) पर विचार करने का निर्देश दिया, बशर्ते विशेषज्ञ समिति द्वारा रिकॉर्ड पर रखे गए सुरक्षा उपायों का अनुपालन किया जाए।

इंटरनेट पहुंच बहाल करने के लिए विशेषज्ञ समिति द्वारा निर्धारित कुछ सुरक्षा उपायों में गति को 10 एमबीपीएस तक सीमित करना, इच्छित उपयोगकर्ताओं से वचन लेना कि वे कुछ भी अवैध नहीं करेंगे, और उपयोगकर्ताओं को संबंधित प्राधिकारी/अधिकारियों द्वारा भौतिक निगरानी के अधीन करना शामिल है।

उच्च न्यायालय के निर्देश मणिपुर में इंटरनेट सेवाओं की बहाली की मांग को लेकर पहले दायर की गई एक जनहित याचिका के बाद आए, जहां 3 मई से गैर-आदिवासी मैतेई और आदिवासी कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा फैलने के बाद से इंटरनेट निलंबन जारी है।

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Ghanshyam Chandra

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