Breaking News :
>>‘टीएमसी को खत्म करना है तो पहले मुझे मारना होगा’- ममता बनर्जी>>दांत दर्द से हैं परेशान? जानिए घर पर राहत पाने के आसान और असरदार उपाय>>शिक्षा विभाग की डिजिटल शिक्षक प्रशिक्षण पहल ने वैश्विक मंच पर फहराया परचम>>देहरादून महायोजना-2041 : जनता की आवाज़ से आकार ले रहा देहरादून का भविष्य>>देहरादून में 10 जुलाई को सभी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र रहेंगे बंद>>कांवड़ मेला-2026 की तैयारियां तेज, ऋषिकेश में पुलिस और अन्य सम्बन्धित विभागों की समन्वय बैठक>>लगातार बारिश पर जिलाधिकारी का त्वरित एक्शन, आपदा परिचालन केंद्र से संभाली कमान>>कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने घट्टी गोला क्षेत्र के संपर्क मार्ग का स्थलीय निरीक्षण कर लिया व्यवस्थाओं का जायजा>>‘ड्यून 3’ का धमाकेदार ट्रेलर रिलीज, सत्ता और युद्ध की नई जंग शुरू>>मानसून के दौरान बांधों एवं बैराजों से जुड़ी सूचनाओं की होगी रियल टाइम निगरानी>>पूर्व सैनिकों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सरकार की प्राथमिकता- गणेश जोशी>>महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने नारी पुनर्वास केंद्र की व्यवस्थाओं का लिया जायजा>>तीसरे दिन भी जारी रहा देहरादून महायोजना-2041 पर जनसंवाद>>एमडीडीए का अवैध निर्माणों पर बड़ा प्रहार, अवैध प्लॉटिंग ध्वस्त, तीन निर्माण सील>>खेल रत्न, द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए 24 जुलाई तक करें आवेदन- रेखा आर्या>>मुख्यमंत्री ने नीति आयोग की टीम के साथ राज्य के विकास के विभिन्न विषयों पर की विस्तृत चर्चा>>सतपुली, स्यूंसी झील निर्माण से पैदा होंगे आजीविका के नए अवसर- महाराज>>देहरादून में 11 जुलाई से सजेगा ‘लोक संवर्धन पर्व’, जुटेंगे देशभर के अल्पसंख्यक हुनरमंद>>मुख्यमंत्री धामी ने श्रीराम कथा के समापन समारोह में लिया भाग>>सस्पेंस और मर्डर मिस्ट्री से भरपूर ‘रहूं मैं तेरे रूबरू’ का ट्रेलर हुआ रिलीज
उत्तराखण्डताज़ा खबरें

राज्य आंदोलनकारी भावना पांडे ने राज्य स्थापना दिवस पर कचहरी परिसर में उत्तराखंड के शहीदों को दी श्रद्धांजलि

आकाश ज्ञान वाटिका, 9 नवम्बर 2021, मंगलवार, देहरादून। देहरादून। उत्तराखंड को पृथक राज्य के रूप में अस्तित्व में आये 21 वर्ष का समय व्यतीत हो चुका है किन्तु आज भी हमें अपने सपनों का उत्तराखंड नहीं मिल पाया है। ये कहना है उत्तराखंड की राज्य आंदोलनकारी बेटी एवँ जनता कैनिबेट पार्टी की केंद्रीय अध्यक्ष भावना पांडे का।

राज्य आंदोलनकारी भावना पांडे ने मंगलवार को राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर कचहरी परिसर देहरादून में शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर शहीद राज्य आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर मीडिया को जारी अपने एक बयान में भावना पांडे ने कहा कि अपने बीते 21 सालों के इतिहास में उत्तराखंड ने अनेकों उतार-चढ़ाव देखे हैं। जिस राज्य के गठन के लिए हजारों लोगों ने लाठी डंडे खाए, दर्जनों लोगों ने अपनी शहादत दी व कई परिवार उजड़ गए, उस राज्य में आन्दोलनकारियों और शहीदों के सपने आज भी साकार नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों एवँ अमर शहीदों के सपनों के उत्तराखण्ड को बनाने में राज्य की सरकारों ने कितने सार्थक कदम उठाए और आज उत्तराखण्ड राज्य कहां खड़ा है ये किसी से भी छिपा नहीं है।

 

राज्य आंदोलनकारी भावना पांडे ने कहा कि उत्तर प्रदेश से विभाजित होकर उत्तराखंड राज्य बना। राज्य बनाने के पीछे का मकसद यही था कि छोटा प्रदेश होगा। इस छोटे प्रदेश में विकास की गंगा बहेगी। स्थानीय लोग सरकार चलाएंगे। आम जनता की पहुंच सरकार तक होगी। किसी भी समस्या का त्वरित निदान होगा। क्षेत्रीय विकास की अवधारणा साकार होगी। पलायन और बेरोजगारी रुकेगी। युवाओं को अपने घर के नजदीक रोजगार मिलेगा। पहाड़ों पर मूलभूत सुविधाएं पहुंचेगी। स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, बिजली पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए लोगों को सरकार का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा। अपनी सरकार अपने लोगों का दुख-दर्द गहराई से और नजदीकी से समझेगी किन्तु ऐसा हो न सका।

उन्होंने कहा, ‘विकास को लेकर अब तक सरकारों ने कुछ प्रयास भी किए लेकिन बावजूद इसके उत्तराखंड के अभी भी बहुत से ऐसे इलाके हैं जहां पर मूलभूत सुविधाओं को आजतक पहुंचाया नहीं जा सका है। फलस्वरूप पलायन जारी है और गांव के गांव खाली हो रहे हैं। प्रदेशवासियों को राज्य गठन के 21 साल बाद भी स्थाई राजधानी की दरकार है। अभी भी उत्तराखंड को स्थाई राजधानी नहीं मिल पाई है। अब तक की सरकारों ने उत्तराखंड के विकास के लिए काम कम और बातें ज्यादा की हैं, लेकिन बीते 21 साल का एक लंबा वक्त गुजरने के बावजूद आंदोलनकारियों के नजरिये से उत्तराखंड का कोई खास विकास नहीं हुआ है।’

आंदोलनकारी भावना पांडे के अनुसार उत्तर प्रदेश के समय में जिस गति से उत्तराखंड चल रहा था लगभग वही रेंगती गति अभी भी जारी है। कांग्रेस और बीजेपी दोनों राष्ट्रीय पार्टियों को जनता ने उत्तराखंड में सरकार चलाने का दायित्व दिया। दोनों ही दलों की सरकारों ने आम जनता के हितों को दरकिनार करते हुए केवल अपने लोगों को फायदा पहुंचाने का काम किया। यही वजह है कि आज भी शहीदों के सपनों का उत्तराखंड नहीं बन पाया है। राज्य गठन के 21 साल बाद भी उत्तराखंड वो छाप नहीं छोड़ पाया जिसके लिए बड़े आंदोलन के बाद उत्तराखण्ड राज्य बना था। उत्तराखंड वासियों और राज्य आंदोलनकारियों को आज भी अपने सपनों के उत्तराखंड का इंतजार है।

Loading

error: Content is protected !!