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उत्तराखण्ड

सेब की लाली पर सिस्टम का पीलापन भारी उत्तराखंड में

उत्तराखंड में सेब की लाली पर सिस्टम का पीलापन भारी, पढ़िए पूरी खबर

देहरादून,उत्तराखंड में सेब की लाली पर सिस्टम का ‘पीलापन’ भारी पड़ रहा है। सेब की तुड़ाई शुरू हो चुकी है, लेकिन अभी तक सेब उत्पादकों को न तो खाली पेटियां मिलीं और न सेब का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) ही घोषित हुआ है। नतीजतन, उत्तराखंड का सेब आज भी ‘हिमाचल एप्पल’ की पेटियों में हिमाचल के नाम से बिक रहा है। यही नहीं, मंडियों में भी किसानों को औने-पौने दामों पर सेब बेचने को विवश होना पड़ रहा है।

प्रमुख नकदी फसलों में शुमार होने के बावजूद उत्तराखंड में सेब पिछले 18 साल से सिस्टम की उपेक्षा का दंश झेल रहा है। प्रदेश के 11 जिलों के पर्वतीय इलाकों में 25318 हेक्टेयर क्षेत्र में सेब का उत्पादन होता है, मगर आज तक ब्रांडिंग को गंभीरता से पहल नहीं हो पाई है। हर बार ही सेब उत्पादकों को समय से उत्तराखंड एप्पल के नाम की खाली पेटियां मुहैया कराने की बात होती है, मगर ये शायद ही कभी वक्त पर मिल पाती हों।

इस मर्तबा भी सूरतेहाल कुछ ऐसा ही है। मौसम के साथ देने से इस बार सेब की अच्छी पैदावार है। तुड़ाई भी शुरू हो चुकी है, मगर सेब उत्पादकों को खाली पेटियां उपलब्ध कराने को अभी टेंडर ही हो पाए हैं। हालांकि, सरकार की ओर से भरोसा दिलाया गया था कि सेब उत्पादकों को एक लाख पेटियां मुहैया कराई जाएंगी, मगर ये कब तक मिलेंगी, यह भविष्य के गर्त में छिपा है।

सूरतेहाल किसानों को मजबूरी में हिमाचल से पेटियां मंगानी पड़ रही हैं। आलम ये है कि राज्य से मिलने वाली पेटियों का इंतजार किए बगैर तमाम सेब उत्पादक औने-पौने दामों पर सेब निकाल रहे हैं। साफ है कि अच्छी फसल के बाद भी उन्हें इसका लाभ नहीं मिल पा रहा। ऐसे में सिस्टम की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

एमएसपी भी नहीं घोषित

सरकार ने पिछले वर्ष सी ग्रेड के सेब के लिए आठ रुपये प्रति किलो के हिसाब से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित किया था। इस बार यह अभी तक घोषित नहीं हुआ है। सूत्रों की मानें तो इसे लेकर फाइल शासन में इधर से उधर ही सरक रही है। फैसला कब होगा, इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता।

प्रति पेटी 50 फीसद अनुदान

उत्तराखंड सरकार की ओर से सेब उत्पादकों को मुहैया कराई जाने वाली खाली पेटियों की प्रति पेटी 99.50 रुपये की लागत आती है। इस पर राज्य सरकार 50 फीसद अनुदान देती है। यानी किसान को प्रति पेटी 49.75 रुपये की पड़ती है। दूसरी तरफ, हिमाचल की पेटियां भी करीब- करीब इतने की ही पड़ती हैं और ये वक्त पर मिल जाती हैं।

सुबोध उनियाल (उद्यान मंत्री, उत्तराखंड) का कहना है कि सेब की पैदावार इस बार बहुत अच्छी है। पेटियां उपलब्ध कराने को टेंडर हो चुके हैं और दो सप्ताह के भीतर इन्हें उपलब्ध कराना शुरू कर दिया जाएगा। इस बार एक लाख पेटियां सेब उत्पादकों को दी जाएंगी। राज्य की पेटियां हिमाचल प्रदेश से बेहतर और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होंगी। जहां तक एमएसपी का प्रश्न है तो इसके लिए मंथन चल रहा है और जल्द ही यह घोषित कर दिया जाएगा।

सेब उत्पादक जिले

  • जिला————–क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)
  • उत्तरकाशी————–8955.03
  • देहरादून————–4894.54
  • टिहरी————–3828.27
  • पिथौरागढ़————–1615.00
  • अल्मोड़ा————–1577.00
  • नैनीताल————–1243.32
  • चमोली————–1201.69
  • पौड़ी————–1127.00
  • रुद्रप्रयाग————–413.50
  • चंपावत————–324.00
  • बागेश्वर————–98.45

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Ghanshyam Chandra

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