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इतिहास के पन्नों में दर्ज हुआ उत्तराखंड की वंदना कटारिया का नाम, टोक्यो ओलंपिक में लगाया हैट्रिक

आकाश ज्ञान वाटिका, 31 जुलाई 2021, शनिवार, देहरादून। टोक्यो ओलंपिक में हैट्रिक लगाने वाली उत्तराखंड की वंदना कटारिया का नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। हरिद्वार की वंदना ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ करो या मरो के मैच में एक के बाद एक तीन गोल कर टीम को जीत दिलाई। ओलंपिक में हैट्रिक करने वाली वंदना भारत की पहली महिला खिलाड़ी हैं। हाकी इंडिया ने भी वंदना को ट्वीट कर उनकी इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है। वंदना की इस सफलता पर उनके घर में जश्न का माहौल है।

पिता के अंतिम दर्शनों के लिए भी नहीं पहुंच पाई थी वंदना

पिता की मौत के बाद भी बंगलुरू में टोक्यो ओलिंपिक की तैयारियों में जुटी वंदना कटारिया ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हुए मैच में शानदार प्रदर्शन कर पिता को श्रद्धांजलि दी है। वंदना का सपना ओलिंपिक में मेडल जीतकर पिता को श्रद्धांजलि देना है। वंदना के पिता की 30 मई को हृदयगति रुकने से निधन हो गया था।

हाकी के सफर में वंदना को मिला माता-पिता का साथ

वंदना कटारिया का परिवार हरिद्वार के रोशनाबाद में रहता है। हरिद्वार भेल से सेवानिवृत्त के बाद वंदना के पिता ने रोशनाबाद में दूध का व्यवसाय शुरू किया था। उनकी सरपरस्ती में वंदना कटारिया ने रोशनाबाद से अपनी हाकी की यात्रा शुरू की। उस वक्त गांव में वंदना के इस कदम को लेकर स्थानीय लोगों ने परिवार के साथ उनका भी मजाक उड़ाया था। पिता नाहर सिंह और माता सोरण देवी ने इसकी परवाह न करते हुए वंदना के सपने को साकार करने के लिए हर कदम पर उसकी सहायता की।

हाकी किट और स्टिक खरीदने में भी आती थी दिक्कत

दैनिक जागरण से पूर्व में हुई बातचीत में वंदना ने बताया था कि हरिद्वार के रोशनाबाद से उनकी हाकी की शुरुआत हुई। इसके बाद वह हरिद्वार में ही हाकी का प्रशिक्षण लेने लगी। प्रोफेशनल तौर पर मेरठ से उनकी हाकी की शुरुआत हुई। इसके बाद वह लखनऊ स्पोर्ट्स हास्टल पहुंची। घर की आर्थिक हालत ठीक न होने के कारण उन्हें अच्छी किट और हाकी स्टिक खरीदने में दिक्कत होती थी। कई ऐसे भी मौके आए जब हास्टल की छुट्टियों में साथी खिलाड़ी घर चले जाते थे, लेकिन पैसे न होने के कारण वह घर नहीं जा पाती थीं। ऐसे में कोच पूनम लता राज और विष्णुप्रकाश शर्मा से उन्हें काफी मदद मिली।

पिता की इच्छा थी कि वंदना जीते ओलिंपिक में स्वर्ण

वंदना के पिता की इच्छा थी कि बेटी ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता टीम का हिस्सा बनें। पिता के इस सपने को साकार करने के लिए भारतीय टीम के कैंप में वंदना ने अपनी तैयारियों के लिए जी-जान एक कर दी थी। तैयारियों के दौरान पिता की मृत्यु का समाचार उसे मिला। असमंजस की स्थिति यह कि एक तरफ मन कह रहा था कि पिता के अंतिम दर्शन के साथ अंतिम विदाई देने को घर जाना है, दूसरी तरफ पिता के सपने को साकार करने की ख्वाहिश। ऐसे समय में वंदना के भाई पंकज व मां सोरण देवी ने संबल प्रदान किया। मां सोरण देवी का कहना है कि हमने वंदना से कहा कि जिस उद्देश्य की कामना को लेकर मेहनत कर रही हो पहले उसे पूरा करो, पिता का आशीर्वाद सदैव तुम्हारे साथ रहेगा।

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Ghanshyam Chandra

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