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उत्तराखण्ड

निजी स्कूलों ने ज्यादा फीस ली तो होगा दो लाख जुर्माना

देहरादून: राज्य के निजी स्कूल खुद मनमाने तरीके से शुल्क निर्धारित नहीं कर सकेंगे। शुल्क का निर्धारण जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति करेगी। निजी स्कूलों ने निर्धारित से ज्यादा शुल्क वसूला, पाबंदी के बावजूद किताबें-स्टेशनरी तय दुकानों से खरीदने को छात्रों पर दबाव बनाया अथवा किसी तरह की व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की तो उन्हें जुर्माना भुगतना पड़ेगा। ज्यादा शुल्क वसूली समेत अन्य शर्तों का एक बार उल्लंघन किया तो एक लाख रुपये और दो बार उल्लंघन करने पर दो लाख रुपये जुर्माना भरना पड़ेगा। दो से ज्यादा या बार-बार उल्लंघन की स्थिति में स्कूल की मान्यता या अनापत्ति प्रमाणपत्र निरस्त किया जाएगा। अहम बात ये भी है कि निजी स्कूल संचालकों को उल्लंघन के मामले में जेल नहीं जाना पड़ेगा। पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में तैयार फीस एक्ट के मसौदे में निजी स्कूल संचालकों के जेल जाने का प्रावधान भी किया गया था।

पड़ोसी राज्य उत्तरप्रदेश फीस एक्ट लागू करने में बाजी मार चुका है, वहीं उत्तराखंड सरकार इस मामले में फूंक-फूंककर कदम आगे बढ़ा रही है। पब्लिक व निजी स्कूलों में फीस की मनमानी पर अंकुश लगाने को राज्य में अशासकीय स्ववित्तपोषित शिक्षण संस्थान शुल्क नियंत्रण एवं शिकायत निवारण अधिनियम के मसौदे को तकरीबन अंतिम रूप दे दिया गया है। प्रस्तावित अधिनियम के मसौदे में राज्य सरकार ने निजी स्कूल संचालकों की आपत्ति को तवज्जो दी है। पिछली सरकार में तैयार किए गए अधिनियम के मसौदे में ज्यादा शुल्क वसूली और व्यावसायिक गतिविधियों को गंभीर अपराधों की श्रेणी के समकक्ष रखा गया था। निजी स्कूल संचालकों ने इस पर सख्त आपत्ति जताई थी। नए अधिनियम के मसौदे में जेल जाने के प्रावधान को शामिल नहीं किया गया है। सरकार ने राज्य में पहले से मौजूद एजुकेशन हब और इसे विकसित करने की संभावनाओं को ध्यान में रखकर यह मसौदा तैयार किया है।

इसमें यह स्पष्ट किया है कि निजी स्कूल मनमर्जी से शुल्क बढ़ा नहीं सकेंगे। जिलास्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय समिति यह कार्य करेगी। समिति में जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी और शिक्षक अभिभावक संघ का प्रतिनिधि शामिल होगा। इस प्रतिनिधि के चयन के लिए जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी 200 अभिभावकों की सूची जिलाधिकारी को सौंपेंगे। इसके अलावा एक चार सदस्यीय राज्यस्तरीय समिति भी होगी। यह समिति जिलास्तरीय समिति के फैसले को लेकर अभिभावक या स्कूल के स्तर पर आपत्ति अथवा शिकायत की सुनवाई करेगी। इस समिति के अध्यक्ष शिक्षा सचिव अथवा शिक्षा निदेशक होंगे। सदस्यों में निदेशक या अपर निदेशक स्तर एक अधिकारी, एक शिक्षाविद और एक वित्त सेवाओं का एक निदेशक स्तर का अधिकारी शामिल होगा।

उत्तराखंड के लिए इस प्रस्तावित एक्ट के मसौदे को तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, उत्तर प्रदेश की व्यवस्थाओं का अध्ययन करने के बाद अंतिम रूप दिया गया है। राज्य सरकार ने निजी स्कूलों की श्रेणियां तय की हैं। ये श्रेणियां स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं, शिक्षकों की शैक्षिक योग्यता और उनको दिए जाने वाले वेतनमान के आधार पर तय की जाएंगी।

निजी स्कूलों के लिए ये होगा अनिवार्य 

-शुल्क किसी भी सूरत में कैश नहीं लिया जाएगा

-स्कूल में किताबें-स्टेशनरी बेचने या तय दुकानों से खरीदने का दबाव बनाने पर पाबंदी

-संबंधित बोर्ड से अनुमोदित पाठ्यपुस्तकों के अलावा अन्य पुस्तकें खरीदने को बाध्य नहीं कर सकेंगे

-निजी स्कूलों में शिक्षकों के ट्यूशन पर रोक

-स्कूल छोड़ने पर माइग्रेशन सर्टिफिकेट देने में बाधा नहीं, कोई शुल्क नहीं

-पाठ्यपुस्तकें हर वर्ष या बार-बार नहीं बदली जा सकेंगी

-हर वर्ष नहीं बढ़ाया जा सकेगा शुल्क, शुल्क बढ़ाने की वजह का करना होगा खुलासा

-शिक्षकों के वेतन-भत्ते, भवन, खेल मैदान, बिजली व पानी कर, लाइब्रेरी, लैबोरेट्री समेत करीब 23 मानकों तय होगा शुल्क, स्कूलों की करीब नौ श्रेणियां तय

इन्हें मिल सकेगी फीस निर्धारण से छूट

-पूरी तरह आवासीय इंटरनेशनल बोर्ड या अन्य बोर्ड से मान्यताप्राप्त संस्थाएं

-मान्यताप्राप्त प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल जो पीटीए की सहमति से 5000 रुपये प्रवेश शुल्क और 500 रुपये फीस ले रहे हैं

-उत्तराखंड बोर्ड, संस्कृत शिक्षा परिषद से मान्यताप्राप्त विद्यालय के पीटीए की सहमति से 500 रुपये की सीमा तक शुल्क लेने वाले विद्यालय।

शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय का कहना है कि निजी स्कूलों को फीस लेने में मनमानी नहीं करने दी जाएगी। नए फीस एक्ट के ड्राफ्ट में स्कूलों में सुविधाओं की उपलब्धता के आधार पर श्रेणियां तय की गई हैं। सरकार मनमानी पर नियंत्रण चाहती है, किसी को अनावश्यक भयभीत करने का इरादा नहीं है।

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Ghanshyam Chandra

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