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मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के संयुक्त सम्मेलन का प्रधानमंत्री मोदी ने किया उद्घाटन

“आजादी के इन 75 सालों ने जुडिशरी और एग्जीक्यूटिव, दोनों के ही रोल्स और रिस्पांसिबिलिटीज को निरंतर स्पष्ट किया है। जहां जब भी जरूरी हुआ, देश को दिशा देने के लिए ये रिलेशन लगातार इवॉल्व हुआ है”

“हम किस तरह अपने जुडिशल सिस्टम को इतना समर्थ बनाएँ कि वो 2047 के भारत की आकांक्षाओं को पूरा कर सके, उन पर खरा उतर सके, ये प्रश्न आज हमारी प्राथमिकता होना चाहिए”


“अमृत काल में हमारी दृष्टि एक ऐसी न्यायिक व्यवस्था की होनी चाहिए, जिसमें आसान न्याय, त्वरित न्याय और सभी के लिए न्याय हो”


“भारत सरकार भी जुडिशल सिस्टम में टेक्नोलॉजी की संभावनाओं को डिजिटल इंडिया मिशन का एक जरूरी हिस्सा मानती है”


“कोर्ट में स्थानीय भाषाओं को प्रोत्साहन देने की जरूरत है। इससे देश के सामान्य नागरिकों का न्याय प्रणाली में भरोसा बढ़ेगा, वो उससे जुड़ा हुआ महसूस करेंगे”


“आज देश में करीब साढ़े तीन लाख प्रिजनर्स ऐसे हैं, जो अंडर-ट्रायल हैं और जेल में हैं। इनमें से अधिकांश लोग गरीब या सामान्य परिवारों से हैं”


“मैं सभी मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से अपील करूंगा कि वे इन्हें प्राथमिकता दें”


“हमारी समृद्ध कानूनी विशेषज्ञता के साथ, हम मध्यस्थता द्वारा समाधान के क्षेत्र में एक विश्व गुरु बन सकते हैं। हम पूरी दुनिया के सामने एक मॉडल पेश कर सकते हैं”

साभार : प्रधानमंत्री कार्यालय

आकाश ज्ञान वाटिका, 30 अप्रैल 2022, शनिवार, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  ने आज मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के संयुक्त सम्मेलन का उद्घाटन किया। पीएम ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव में न्यायपालिका और सरकार का दायित्व अब बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि 2047 में जब देश आजादी के 100 साल पूरा करेगा तब हम कैसा देश चाहते हैं, हम किस तरह अपने न्याय व्यवस्था को इतना समर्थ बनाएं कि वो 2047 के भारत की आकांक्षाओं को पूरा कर सके, उन पर खरा उतर सके, ये प्रश्न आज हमारी प्राथमिकता होना चाहिए।

प्रधानमंत्री के साथ भारत के मुख्य न्यायाधीश  न्यायमूर्ति एनवी रमना और केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। वहीं सभी 25 हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी इस सम्मेलन में भाग लिया। प्रधानमंत्री ने इस दौरान कहा कि राज्य के मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों का ये संयुक्त सम्मेलन हमारी संवैधानिक खूबसूरती का सजीव चित्रण है। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि इस अवसर पर मैं आप सबके साथ कुछ समय बिता पाया हूं।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि हमारे देश में जहां एक ओर ज्यूडिशरी की भूमिका संविधान संरक्षक की है, वहीं लेजिस्लेचर नागरिकों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि संविधान की इन दो धाराओं का ये संगम, ये संतुलन देश में प्रभावी और समयबद्ध न्याय व्यवस्था का रोडमैप तैयार करेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 2015 में हमने करीब 1800 ऐसे कानूनों को चिन्हित किया था जो अप्रासंगिक हो चुके थे। उन्होंने कहा कि इनमें से केंद्र ने 1450 कानूनों को खत्म कर लोगों को राहत दी है। लेकिन राज्यों की तरफ से केवल 75 कानून ही खत्म किए गए हैं। 

कोर्ट में स्थानीय भाषाओं के इस्तेमाल पर जोर देते हुए पीएम ने कहा कि हमें स्थानीय भाषाओं को प्रोत्साहन देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल देश के सामान्य नागरिकों का न्याय प्रणाली में भरोसा बढ़ेगा बल्कि वे सभी उससे जुड़ा हुआ महसूस कर पाएंगे।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए CJI एनवी रमना ने कहा कि ‘लक्ष्मण रेखा’ का ध्यान सबको रखना चाहिए, अगर कुछ भी कानून के अनुसार हो तो न्यायपालिका कभी भी शासन के रास्ते में नहीं आएगी। यदि नगरपालिकाएं, ग्राम पंचायतें कर्तव्यों का पालन करती हैं, यदि पुलिस ठीक से जांच करती है और अवैध हिरासत की यातना समाप्त होती है, तो लोगों को अदालतों की ओर देखने की जरूरत नहीं होगी। 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि हमारी सरकार सबका साथ सबका विकास के साथ सबको न्याय दिलाने के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने इसी के साथ सभी राज्यों से आए मुख्यमंत्रियों और सभी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से कार्यक्रम में आने के लिए धन्यवाद देते हुए कहा, आप सबके साथ मिलकर काम करने से ही आम लोगों को न्याय मिलने की संभावना बढ़ सकती है।

6 साल बात आयोजित हो रहे इस सम्मेलन में कार्यपालिका और न्यायपालिका के लिए न्याय के सरल वितरण के लिए रूपरेखा तैयार करने और न्याय प्रणाली के सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक कदमों पर चर्चा हो रही है। इसके साथ ही न्यायपालिका से जुड़ी इमारतों के लिए ‘नेशनल ज्यूडिशियल इंफ्रास्ट्रक्चर अथारिटी आफ इंडिया’ के गठन का मुद्दा भी इसमें उठ सकता है।

विदित रहे कि पहला मुख्य न्यायाधीशों का सम्मेलन नवंबर 1953 में आयोजित किया गया था और अब तक 38 ऐसे सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं। पिछला सम्मेलन वर्ष 2016 में आयोजित किया गया था। वहीं मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलन और मुख्यमंत्रियों और मुख्य न्यायाधीशों के संयुक्त सम्मेलन दोनों को सीजेआई रमण की पहल पर अब छह साल के अंतराल के बाद आयोजित किया जा रहा है।

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Ghanshyam Chandra

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