‘राष्ट्रीय प्रेस दिवस’ के अवसर पर ‘बढ़ती भ्रामक सूचनाओं के बीच प्रेस की विश्वसनीयता का संरक्षण’ थीम पर आयोजित की गयी विचार गोष्ठी

भ्रामक समाचार पत्रकारिता पर एक संकट है, किन्तु इसका समाधान भी हमें स्वयं ही ढूंँढना है : डॉ० वी.डी. शर्मा
किसी भी समाचार को तथ्यों की जाँच-पड़ताल व पुष्टि उपरान्त ही प्रसारित करना चाहिए : घनश्याम चन्द्र जोशी
आकाश ज्ञान वाटिका, रविवार, 16 नवम्बर 2025, देहरादून। रविवार, 16 नवम्बर को ‘राष्ट्रीय प्रेस दिवस’ के अवसर पर जिला सूचना कार्यालय, देहरादून में वरिष्ठ पत्रकर वीडी शर्मा की अध्यक्षता में “बढ़ती भ्रामक सूचनाओं के बीच प्रेस की विश्वसनीयता का संरक्षण” थीम पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का संचालन अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी रवेन्द्र सिंह ने किया।

विचार गोष्ठी कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार डाॅ. वी.डी. शर्मा ने कहा कि भ्रामक समाचार पत्रकारिता पर एक संकट है, किन्तु इसका समाधान भी हमें स्वयं ही ढूंँढना है। उन्होंने पत्रकारिता के मानक तय करने पर बल दिया। साथ ही पत्रकारगणों को भी तथ्य की पड़ताल कर खबर प्रकाशित व प्रसारित करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि पहले समाचार की सत्यता को परखते हुए, पुष्टि उपरान्त ही प्रसारित किया जाये, ताकि समाज को भ्रामक खबरों से बचाया जाए। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि डिजिटल माध्यमों के तेजी से विस्तार के साथ फेक न्यूज, आधी-अधूरी सूचनायें एवं दुष्प्रचार जैसी चुनौतियाँ तेजी से बढ़ी हैं, जिनसे न केवल समाज भ्रमित होता है बल्कि मीडिया की विश्वसनीयता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए पत्रकारिता के इस संवेदनशील दौर में तथ्य-जाँच, स्रोतों की पुष्टि, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और नैतिक पत्रकारिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
वरिष्ठ पत्रकार घनश्याम चन्द्र जोशी ने भारतीय प्रेस परिषद के इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रेस को भ्रामकता से बचाना भी हम पत्रकारों का ही दायित्व है। एआई औार सोशल मीडिया के इस दौर में भ्रामक समाचारों के प्रकाशन/प्रसारण में वृद्वि हुई है। किसी भी समाचार को तथ्यों की जाँच-पड़ताल व पुष्टि उपरान्त ही प्रसारित करना चाहिए, जिसकी बड़ी जिम्मेदारी पत्रकारों की है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों द्वारा प्रेस की विश्वसनीयता को बढ़ाने के लिए जन- सम्पर्क एवं जन-संवाद के माध्यम से भी तथ्यों की जाँच की जानी चाहिए।
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार अशोक शर्मा, अनिल मित्तल, आलोक शर्मा, सुभाष कुमार, अर्जुन भण्डारी, विनित गुप्ता, बसंत पंत, नवीन जोशी, जगमोहन मौर्य, हरप्रीत, प्रशांत चैधरी आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी रवेन्द्र सिंह, वरिष्ठ पत्रकार घनश्याम चन्द्र जोशी, अशोक शर्मा, अनिल मित्तल, आलोक शर्मा, सुभाष कुमार, अर्जुन भण्डारी, विनित गुप्ता, बसंत पंत, नवीन जोशी, जगमोहन मौर्य, हरप्रीत, प्रशांत चौधरी, नवीन जोशी, जसंवत सिंह, संगीता बुटोला, पिटर जोन, सहायक लेखाकार अंजली, कनिष्ट सहायक इन्द्रेश कोठारी, पंकज आर्य, मुकुल, रितेश आदि उपस्थित रहे।
जानिए, कब से और क्यों मनाया जाता है “राष्ट्रीय प्रेस दिवस”
स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरान्त देश में प्रेस की स्थिति, उसकी चुनौतियाँ और सामाजिक व राष्ट्रीय भूमिका को स्पष्ट करने के उद्देश्य से 23 सितंबर 1952 को न्यायमूर्ति जी.एस. राजाध्याक्ष की अध्यक्षता में प्रथम प्रेस आयोग गठन किया गया, इसलिए प्रथम प्रेस आयोग को “राजाध्याक्ष आयोग” भी कहा जाता है।
इस आयोग का मुख्य उद्देश्य भारतीय प्रेस की कार्यप्रणाली, स्वामित्व संरचना, आर्थिक स्थिति और पत्रकारिता के नैतिक मानदंडों का अध्ययन करना था। आयोग ने प्रेस की आज़ादी को सुरक्षित रखने पर विशेष बल दिया। इसके अतिरिक्त आयोग ने समाचार पत्रों में एकाधिकार को रोकने और पत्रकारिता में जिम्मेदारी सुनिश्चित करने हेतु कई सुझाव दिए। दो साल तक गहन अध्यन करने के उपरान्त आयोग ने 14 जुलाई 1954 को अपनी पहली रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसकी प्रमुख सिफारिस थी, ‘भारतीय प्रेस परिषद (Press Council of India)’ की स्थापना करना ताकि प्रेस की स्वतंत्रता को संरक्षित रखते हुए उसके मानदंडों और मर्यादाओं का पालन सुनिश्चित किया जा सके।प्रथम प्रेस आयोग ने प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा एवं पत्रकारिता के उच्च आदर्श कायम करने के उद्देश्य से जिस ‘भारतीय प्रेस परिषद’ की परिकल्पना की थी उसका गठन 4 जुलाई 2025 को किया गया, जिसने 16 नवंबर 1966 से अपना विधिवत कार्य करना प्रारम्भ किया। तब से ही प्रेस की स्वतंत्रता और जिम्मेदारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से देश में प्रतिवर्ष 16 नवम्बर को ‘राष्ट्रीय प्रेस दिवस’ मनाया जाता है। इस दिन देशभर में संगोष्ठियाँ, सेमिनार और विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जिनमें पत्रकारिता की चुनौतियों और भविष्य की दिशा पर विचार किया जाता है।
राष्ट्रीय प्रेस दिवस 2025 की आधिकारिक थीम है: “बढ़ती भ्रामक सूचनाओं के बीच प्रेस की विश्वसनीयता का संरक्षण (Safeguarding Press Credibility Amidst Rising Misinformation)”
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