आचार्य श्री 108 सौरभसागर जी महामुनिराज के पावन सान्निध्य में हुआ नवदिवसीय जिनेन्द्र महाअर्चना का शुभारंभ

आकाश ज्ञान वाटिका, गुरुवार, 25 सितम्बर 2025, देहरादून। देवभूमि उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून स्थित धर्मनगरी माजरा में सकल दिगम्बर जैन समाज, देहरादून, 31वॉ श्री पुष्प वर्षा योग समिति 2025 एवं श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर, माजरा के संयुक्त तत्वावधान में नवदिवसीय जिनेन्द्र महाअर्चना का शुभारंभ आचार्य श्री 108 सौरभसागर जी महामुनिराज (संस्कार प्रणेता, ज्ञानयोगी एवं जीवन आशा हॉस्पिटल प्रेरणास्रोत) के पावन सान्निध्य में हुआ।

इस अवसर पर श्री जिन सहस्रनाम महामंडल विधान बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ प्रारंभ हुआ। अभिषेक, शांति धारा एवं नित्य नियम पूजन के उपरांत विधान आरंभ हुआ। विधानाचार्य संदीप जैन “सजल” (हस्तिनापुर) के मार्गदर्शन एवं इंदौर के संगीतकार विक्की एण्ड पार्टी, भोपाल की संगीतमय प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को आनंदित किया।
इस अवसर पर आचार्य श्री सौरभ सागर जी ने अपने प्रवचन में कहा कि जिन सहस्रनाम विधान एक जैन पूजा विधि है जिसमें जिन (परम पावन तीर्थंकरों) के 1008 नामों के स्तोत्र का पाठ और पूजा की जाती है। इसमें सामान्यतः जिन प्रतिमाओं का अभिषेक और शांति धारा, देवताओं को अर्घ्य देना, और ‘ॐ ह्रीं अर्हं’ से शुरू होने वाले नामों का समुच्चय जाप्य किया जाता है। यह विधि भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए की जाती है, और इसके कुछ स्वरूपों में १०१ उपवास भी शामिल हो सकते हैं। इस विधि से भक्त निज गुण संपत्तियों को प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। इसका सांस्कृतिक महत्व यह जैन समाज में भक्ति और सामुदायिक जुड़ाव को बढ़ाता है, जहाँ विभिन्न समाज के प्रतिष्ठित लोग इसमें शामिल होते हैं।
ये सकारात्मक वातावरण विधान के दौरान भक्त और समाज में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का वातावरण बनता है।
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए मीडिया कोऑर्डिनेटर मधु जैन ने बताया कि आचार्य श्री सौरभ सागर जी महामुनिराज की आहार चर्या श्री अमित जैन ,दीपा जैन द्वारा की गई जिसमें सभी भक्तों द्वारा महाराज श्री को आहार ग्रहण कराया गया।

संध्याकालीन बेला में माजरा मन्दिर में संगीतमय गुरुभक्ति ओर महाआरती की गई। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भक्ति कर आनंद उठाया।
इस अवसर पर समाज के गणमान्य उपस्थित रहे।
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