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कूर्मांचल सांस्कृतिक एवं कल्याण परिषद का होली मिलन : होली का रंगारंग उत्सव, संस्कृति और परंपरा का दिखा अद्भुत संगम

कार्यक्रम के दौरान “घुघुति” पत्रिका तथा वार्षिक कैलेंडर का किया गया विमोचन

आकाश ज्ञान वाटिका, रविवार, 22 फ़रवरी 2026, देहरादून। देहरादून स्थित ओएनजीसी सामुदायिक केंद्र में आज, रविवार, 22 फ़रवरी को केंद्रीय कूर्मांचल परिषद द्वारा आयोजित सामूहिक होली मिलन कार्यक्रम उत्साह, उल्लास और सांस्कृतिक गरिमा के साथ भव्य रूप से संपन्न हुआ। यह आयोजन केवल रंगों का उत्सव नहीं रहा बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और सामूहिक एकता का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने जहाँ एक ओर होली के सतरंगी रंगों का आनंद लिया, वहीं दूसरी ओर अपनी जड़ों से जुड़ने का सशक्त अनुभव भी प्राप्त किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसमें संरक्षक आर.एस. परिहार, केंद्रीय अध्यक्ष कमल रजवार, महासचिव गोविंद पांडे, विशिष्ट अतिथि आदित्य चौहान, आचार्य विपिन जोशी, गंभीर सिंह रावत तथा नंदन सिंह बिष्ट ने संयुक्त रूप से सहभागिता की। दीप प्रज्ज्वलन के साथ ही पूरे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा और उत्सव का भाव प्रवाहित हो गया।

कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना से हुई, जिसने वातावरण को आध्यात्मिकता से भर दिया। इसके बाद लोकगायक मनोज सामंत ने कुमाऊँ की परंपरागत होली “कै ले बाँधी चीर” गीत प्रस्तुत किया, जो चीर बंधन की प्राचीन परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है। इस प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमूह को कुमाऊँ अंचल की पारंपरिक होली की अनुभूति कराई।

वाटिका नृत्य अकादमी के बच्चों द्वारा “श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी” गीत पर दी गई प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया। बच्चों की मासूमियत, आत्मविश्वास और भाव-भंगिमाओं ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसी क्रम में कांडली शाखा की महिलाओं ने “उठ मिल हो भरत रघुवर आए” गीत पर बैठक होली प्रस्तुत की, जिसने कार्यक्रम में भक्ति और परंपरा का सुंदर संगम प्रस्तुत किया।
स्मॉल बेल अकादमी, वाटिका नृत्य अकादमी तथा स्वामी वीणा महाराज म्यूजिक एंड डांस अकादमी के विद्यार्थियों ने विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इन प्रस्तुतियों में शास्त्रीयता और लोक तत्वों का संतुलित मेल देखने को मिला।

नत्थनपुर शाखा की महिलाओं ने “हिमाली हवा सुरुरु” गीत पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया, जबकि श्रीमती अलका रावत ने अपनी दो बेटियों के साथ कुमाऊँनी गीतों पर शानदार प्रस्तुति देकर दर्शकों की खूब सराहना प्राप्त की। सुनीता देवी द्वारा प्रस्तुत न्यौली गीत ने लोकसंगीत की गहराई और भावनात्मकता को मंच पर जीवंत कर दिया।
धरमपुर शाखा की महिलाओं ने “चलो होली में मनाए आए, राधा रूठ गई” गीत पर बैठक होली प्रस्तुत कर पारंपरिक शैली को जीवंत किया। वहीं राहुल द्वारा प्रस्तुत मुरली वादन ने वातावरण को मधुरता से भर दिया।

इंदिरा नगर शाखा की महिलाओं ने “आओ बृजराज खेले होली” गीत पर सुंदर प्रस्तुति दी, जिसमें हेमा बिष्ट ने भगवान श्रीकृष्ण का रूप धारण कर दर्शकों का मन मोह लिया। उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम में भक्ति और सौंदर्य का अनूठा समावेश किया।

प्रेमनगर शाखा की टीम द्वारा प्रस्तुत सामूहिक खड़ी होली “शिव दर्शन दे दो जटाधारी” कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रही। इस प्रस्तुति में भोलेनाथ के रूप में भूपाल सिंह नेगी ने दर्शकों की विशेष प्रशंसा प्राप्त की। खड़ी होली की ऐसी धूम मची कि पूरा वातावरण कुमाऊँ के किसी गाँव की होली जैसा प्रतीत होने लगा।

लक्ष्मी बिष्ट ने अपनी मधुर आवाज़ में “छोड़नी नि लागेनी” गीत प्रस्तुत किया, जिसने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। हाथीबड़कला शाखा द्वारा “राम सीता लखना आई गई वन में” गीत पर चांचरी नृत्य प्रस्तुत किया गया, जबकि माजरा शाखा ने “आज बिरज में होली” गीत पर उत्साहपूर्ण नृत्य कर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
लोकगायक मनोज सामंत ने अपनी सुमधुर आवाज़ में छपेली और चांचरी गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए। उनकी प्रस्तुति ने पारंपरिक लोकसंगीत को आधुनिक मंच पर जीवंत कर दिया।

कार्यक्रम के दौरान “घुघुति” पत्रिका तथा वार्षिक कैलेंडर का विमोचन कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, प्रधान संपादक भारती पांडे, केंद्रीय अध्यक्ष कमल रजवार, महासचिव गोविंद पांडे, राजेंद्र सिंह बिष्ट, उप्रेती सिस्टर ज्योति उप्रेती एवं नीरजा उप्रेती तथा मनमोहन लोहनी द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। यह विमोचन समारोह साहित्य और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया।

सभी शाखाओं को घुघुति पत्रिका एवं कैलेंडर भेंट किए गए, जिससे संगठनात्मक एकता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिला। कांवली शाखा द्वारा “मेरी नथ गढ़ी दे छैला सुनारा” गीत पर सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया गया, जिसने कार्यक्रम में लोकनृत्य की रंगत को और गहरा किया।
उप्रेती सिस्टर, विशेष रूप से ज्योति उप्रेती और नीरजा उप्रेती, पूरे कार्यक्रम में आकर्षण का केंद्र रहीं। उनकी प्रस्तुतियों और सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को विशेष ऊर्जा प्रदान की। सभी प्रतिभागियों को पारितोषिक देकर उनके प्रयासों को सराहा गया।

कार्यक्रम में कोहिनूर आर्ट ज्वैलर्स की ओर से लकी ड्रॉ का आयोजन भी किया गया, जिसमें दो सोने के सिक्कों सहित पाँच अन्य आकर्षक पुरस्कार प्रदान किए गए। इस आयोजन ने कार्यक्रम में उत्साह और रोमांच का नया आयाम जोड़ा।
‘शिवालिक होटल’ के मालिक राजेंद्र सिंह बिष्ट एवं “हमारी पहचान” रंगमंच संस्था के अध्यक्ष कैलाश चंद्र पाठक द्वारा कई कलाकारों को सम्मानित कर उनकी हौसला अफजाई की गई। यह सम्मान कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना।

कार्यक्रम का संचालन बबीता साह लोहनी द्वारा अत्यंत प्रभावशाली और सहज शैली में किया गया। उनकी संवाद शैली और मंच संचालन ने पूरे कार्यक्रम को सुचारु और आकर्षक बनाए रखा।
कार्यक्रम के अंत में पारंपरिक व्यंजनों का आनंद भी लिया गया, जिसमें आलू के गुटके, ककड़ी का रायता, सूजी का हलवा और चाय शामिल थे। इन व्यंजनों ने कुमाऊँ की पारंपरिक स्वाद संस्कृति को भी जीवंत किया।

इस अवसर पर कुर्मांचल परिषद् के संरक्षक आरएस परिहार, उत्तम अधिकारी, विजय बिष्ट, ललित मनराल, हरीश मेहरा, पुष्पा बिष्ट, मंजू देवपा, के.सी. जोशी, हरी सिंह बिष्ट, नवीन तिवारी, वीरेंद्र कांडपाल, ललित जोशी, गंभीर रावत, सुरेंद्र सिंह बिष्ट, शिव प्रसाद मनराल, शांति बिष्ट, हर्ष वर्धन मिश्रा, आर.एस. बिरोरिया सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

अंततः यह होली मिलन समारोह एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ-साथ उत्तराखंड की जीवंत लोकसंस्कृति, सामूहिकता, परंपराओं और सामाजिक समरसता का उत्सव है। इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि जब लोग अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं, तो संस्कृति केवल जीवित ही नहीं रहती, बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी और अधिक सशक्त होकर आगे बढ़ती है।

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Ghanshyam Chandra

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