उत्तराखंड सामाजिक सम्मान सेवा ट्रस्ट द्वारा लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी को ‘देवभूमि विभूति सम्मान’ से किया गया सम्मानित

उत्तराखंड की समृद्ध लोक धरोहर को जीवित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है : लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी
ट्रस्ट का उद्देश्य समाज के उन व्यक्तित्वों को सम्मानित करना है, जिन्होंने अपने कार्यों से समाज, संस्कृति और राष्ट्र को गौरवान्वित किया है : राजू वर्मा, अध्यक्ष, उत्तराखंड सामाजिक सम्मान सेवा ट्रस्ट
आकाश ज्ञान वाटिका, रविवार, 18 जनवरी 2026, देहरादून। उत्तराखंड की लोक संस्कृति और संगीत को नई पहचान दिलाने वाले सुप्रसिद्ध गढ़वाली लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी को उत्तराखंड सामाजिक सम्मान सेवा ट्रस्ट द्वारा “देवभूमि विभूति सम्मान” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान कार्यक्रम रविवार, 18 जनवरी को लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी के निवास स्थान पर सादगीपूर्ण एवं गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया, जिसमें ट्रस्ट के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम के दौरान उत्तराखंड सामाजिक सम्मान सेवा ट्रस्ट की ओर से लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी को सम्मान पत्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर उनके दीर्घकालीन सांस्कृतिक योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया गया। ट्रस्ट पदाधिकारियों ने कहा कि नेगी उत्तराखंड की लोक संस्कृति के ऐसे सशक्त हस्ताक्षर हैं, जिन्होंने अपने गीतों और संगीत के माध्यम से पहाड़ के जीवन, संघर्ष, संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों को स्वर दिया है। उन्होंने कहा कि लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी ने गढ़वाली संगीत, संस्कृति और परंपराओं को केवल उत्तराखंड तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि देश-विदेश तक पहुँचाकर देवभूमि की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को मजबूती प्रदान की है। उनके गीतों में उत्तराखंड की मिट्टी की सुगंध, लोकजीवन की सच्चाई और सामाजिक चेतना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। यही कारण है कि उनके गीत हर वर्ग और हर पीढ़ी में समान रूप से लोकप्रिय हैं।
सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी ने उत्तराखंड सामाजिक सम्मान सेवा ट्रस्ट का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति और लोक संगीत का सम्मान है। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि आज के आधुनिक और वैश्विक दौर में हमें अपनी बोली-भाषा, संस्कृति, रीति-रिवाज और परंपराओं को भूलना नहीं चाहिए, बल्कि उनसे जुड़े रहना चाहिए। इन्हीं से हमारी पहचान बनती है और समाज की मौलिकता सुरक्षित रहती है।
उन्होंने कहा कि लोक संस्कृति किसी भी समाज की आत्मा होती है। यदि युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से कट जाती है, तो समाज अपनी पहचान खो देता है। इसलिए आवश्यक है कि युवा अपनी मातृभाषा का सम्मान करें, लोकगीतों और लोकपरंपराओं को समझें तथा उन्हें आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभायें। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की समृद्ध लोक धरोहर को जीवित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर उत्तराखंड सामाजिक सम्मान सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष राजू वर्मा ने कहा कि नरेंद्र सिंह नेगी जैसे कलाकार किसी एक क्षेत्र या समय के नहीं होते, बल्कि वे पूरी संस्कृति के प्रतिनिधि होते हैं। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का उद्देश्य समाज के उन व्यक्तित्वों को सम्मानित करना है, जिन्होंने अपने कार्यों से समाज, संस्कृति और राष्ट्र को गौरवान्वित किया है।
महासचिव राकेश शर्मा ने कहा कि गढ़वाली लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों ने उत्तराखंड के सामाजिक मुद्दों, पलायन, पीड़ा, प्रेम और संघर्ष को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया है।
कार्यक्रम का समापन सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ। उपस्थित सभी सदस्यों ने यह संकल्प लिया कि उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, भाषा और परंपराओं के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर प्रयास किए जायेंगे।
सम्मान कार्यक्रम में अध्यक्ष राजू वर्मा, महासचिव राकेश शर्मा, उपाध्यक्ष राकेश कुमार भट्ट, कोषाध्यक्ष रूद्र पाल सिंह व मंगल आदि अन्य सदस्यगण उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में नरेंद्र सिंह नेगी के योगदान को देवभूमि उत्तराखंड के लिए गौरव का विषय बताया और उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।
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