Breaking News :
>>सैनिक परिवारों को उच्च शिक्षा की सौगात>>न्यूज़ पोर्टल के विज्ञापन रेट पर पुनर्विचार की माँग, संचालकों ने महानिदेशक सूचना से लगाई गुहार>>उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने उठाया डिजिटल मीडिया की विज्ञापन दरों का मुद्दा>>बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण पर एमडीडीए की कार्रवाई, दो प्लेटफार्म सील>>राखी लेकर एसएसपी दून से मिलने पहुंचीं नन्हीं बालिकाएं, बांधी राखी और लिया सुरक्षा का भरोसा>>राज्य सहकारी नीति-2026 को कैबिनेट से मिली मंजूरी>>मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में रक्षाबंधन व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग का विशेष अभियान>>आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और बाजार मूल्यों की नियमित निगरानी करें अधिकारी- मुख्यमंत्री>>मानसून समाप्त होते ही प्रदेशभर में सड़क मरम्मत और सुधार कार्य युद्धस्तर पर शुरू किए जाएं- मुख्यमंत्री>>पटना में BPSC परीक्षा को लेकर जोरदार प्रदर्शन, सरकार से बातचीत की मांग पर अड़े अभ्यर्थी>>सशक्त बहना उत्सव में दिखा सरकार और मातृशक्ति के बीच विश्वास और आत्मीयता का रिश्ता>>सहसपुर में फिर शुरू होगी बंद पड़ी सिलाई यूनिट, ग्रामीण महिलाओं को मिलेंगे रोजगार के नए अवसर>>इमरान हाशमी की ‘गन मास्टर जी 9’ का टीजर जारी>>एनीमिया में किशमिश कितनी फायदेमंद? जानिए कब डाइट से मिलेगा लाभ और कब जरूरी है इलाज>>मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने पर जोर, डीएम ने ईआरओ और बीएलओ को दिए सख्त निर्देश>>त्योहारी सीजन में मिलावटखोरी पर प्रशासन सख्त, मिठाई की दुकानों और डेयरी पर ताबड़तोड़ छापेमारी>>उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट, देहरादून समेत चार जिलों में येलो अलर्ट>>लापरवाह अफसरों की तय होगी जिम्मेदारी, सीईओ ने SIR की समीक्षा में दिए सख्त निर्देश>>धामी सरकार का विकास पर फोकस, मास्टर प्लान से अवैध निर्माण तक आवास विभाग की समीक्षा>>नवीन आढ़त बाजार का निर्माण पूरा, सितंबर तक प्लॉट आवंटन के निर्देश
उत्तराखण्डताज़ा खबरेंसामाजिक गतिविधियाँ

विरासत आर्ट एंड हेरिटेज फेस्टिवल 2022 के १२वां दिन : ’सीट एंड ड्रा आर्ट कंपटीशन’ के साथ हुई शुरुआत

ध्रुपद और शास्त्रीय बांसुरी वादन के धुन से विरासत के लोग हुए सराबोर

आकाश ज्ञान वाटिका, मंगलवार, 26 अप्रैल, 2022, देहरादून। विरासत आर्ट एंड हेरिटेज फेस्टिवल-2022 के बारहवें दिन की शुरुआत डॉ० बी.आर. अंबेडकर स्टेडियम (कौलागढ़ रोड) देहरादून में “सीट एंड ड्रा आर्ट कंपटीशन” के साथ हुई। आज इसमें देहरादून के 15 स्कूलों के 178 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। सीट एंड ड्रा आर्ट कंपटीशन के अंतर्गत बच्चों को ’हमारी विरासत’ एक टॉपिक दिया गया, जिसमें उनको हमारी विरासत और धरोहर के उपर एक ड्रॉइंग बनाना था और इस दौरान छात्र विरासत में कही भी बैठ कर यह काम कर सकते थे। सभी बच्चों को एक धंटे 30 मिनट का समय दिया गया था। इस आर्ट कंपटीशन का परिणाम 28 अप्रैल को धोषित किया जाएगा।

सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ एवं अनुज प्रताप सिंह द्वारा ध्रुपद प्रस्तुत किया गया। अनुज प्रताप सिंह ने राग चंद्रकौं “चलो सखी ब्रज बें धूम माछी“ की प्रस्तुति दी। इसके बाद राग मलकाउन्स, “शंकर गिरिजापति पार्वती पाटेश्वर“ प्रस्तुत किया। उनके साथ आदित्य दीप, आदित्य शर्मा और सुनील भदौरिया (तानपुरा) पर थे। अनुज प्रताप सिंह अपने गुरुजी के साथ पहले विरासत में अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं और पुनः इस बार विरासत में अपनी प्रस्तुति देने में उन्हें बहुत प्रसन्नता हो रही है।

अनुज प्रताप सिंह

ध्रुपद की उत्पत्ति सामवेद से मानी जाती है। यही कारण है कि इसे समागन के ना म से भी जाना जाता है। ग्वालियर के राजा महाराजा मानसिंह तोमर ने इसे और अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए ध्रुपद का संस्कृत से बृज में अनुवाद किया था। उन्होंने “मानकौतुहल” नाम से पांडुलिपि भी लिखी जिसमें उनके द्वारा रचित कई ध्रुपद शामिल हैं।

अनुज प्रताप सिंह चंबल के बाहर के पहले ध्रुपद कलाकार हैं, उन्होंने अपना पहला संगीत प्रशिक्षण अपने पिता गजेंद्र सिंह कुशवाह, ज्ञान सिंह शाक्य और राम मोहन मिश्रा से प्राप्त किया। 17 साल की उम्र में उनका रुझान ध्रुपद की ओर हो गया और ध्रुपद केंद्र के पहले छात्रवृत्ति बैच में उनका चयन भी हो गया। उन्होंने राजा मानसिंह तोमर संगीत और कला विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश संस्कृति परिषद के तहत ध्रुपद केंद्र ग्वालियर में गुरु शिष्य परंपरा में अभिजीत सुखदाने से ध्रुपद सीखना शुरू किया। अनुज ने एम.ए. संगीत भी ध्रुपद कला रत्न और प्रभाकर वायलिन और वोकल में किया है। वह नियमित रूप से ए.आई.आर. और दूरदर्शन द्वारा रिकॉर्ड किये जाते हैं। उन्होंने तानसेन समारोह जैसे विभिन्न महोत्सवों में अपनी प्रस्तुति दी है, जिसमें ध्रुपद मेला वाराणसी, भवभूति समारोह, राजा छत्रसाल महोत्सव पन्ना शामिल हैं।

रजत प्रसन्ना

सांस्कृतिक कार्यक्रम के अन्य प्रस्तुतियों में रजत प्रसन्ना द्वारा शास्त्रीय बांसुरी वादन प्रस्तुत किया गया। रजत प्रसन्ना द्वारा अलाप जोगझाला, विलंबित एक ताल में, राग श्याम कल्याण एवं राग जोग की प्रस्तुति दी गयी। उसके बाद उन्होंने बनारस के धुन बजाई फिर पीलू के धुन के साथ उन्होंने अपनी प्रस्तुति समाप्त की, उनके साथ तबले पर संगत में शुभ महाराज जी थे।

रजत प्रसन्ना संगीत के बनारस घराने से आते हैं और वे एक भारतीय शास्त्रीय बांसुरी वादक हैं। रजत प्रसन्ना ने भारतीय शास्त्रीय संगीत अपने दादा स्वर्गीय पंडित रघुनाथ प्रसन्ना और पिता रविशंकर प्रसन्ना से सीखा है। वे दूरदर्शन/ऑल इंडिया रेडियो के ‘ए’ ग्रेडे कलाकार हैं और युवा कलाकारों के लिए प्रतिष्ठित सीसीआरटी छात्रवृत्ति के प्राप्तकर्ता भी हैं। वे नवाचार और परंपरा के लिए अपने प्यार के सम्मिश्रण के लिए जाने जाते हैं। रजत प्रसन्ना ने विभिन्न संगीत समारोहों जैसे विश्व बांसुरी उत्सव सहित प्रतिष्ठित स्थानों पर देश भर में व्यापक रूप से अपनी प्रस्तुति दी है जिसमें रासरंग, दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय कला महोत्सव, नीमराना फोर्ट पैलेस, हरिबल्लभ संगीत महासभा के साथ-साथ, वे स्विट्ज़रलैंड में वर्ल्ड इकोनामिक फोरम एवं स्पेन, पुर्तगाल, फ्रांस मॉरीशस और मिस्त्र में भी अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं।

Loading

Ghanshyam Chandra

AKASH GYAN VATIKA (www.akashgyanvatika.com) is one of the leading and fastest growing web News Portal which provides latest information about the Political, Social Activities, Environmental, entertainment, sports, General Awareness etc. I, GHANSHYAM CHANDRA, EDITOR, AKASH GYAN VATIKA provide News and Articles about the abovementioned subject and also provide latest/current state/national/international News on various subject.
error: Content is protected !!