Breaking News :
>>श्रीनगर में मुख्यमंत्री के स्वागत को सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब, करोड़ों के विकास कार्यों की सौगात>>मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड पुलिस के नवीन गौरव चिह्नों का किया अनावरण>>यूक्रेन को मिलेंगी 500 पैट्रियट मिसाइलें, जेलेंस्की ने अमेरिका से की जल्द आपूर्ति की मांग>>मुख्यमंत्री ने देहरादून में ‘रन फॉर यूनिटी’ कार्यक्रम में किया प्रतिभाग>>काशी को मिली तीन नई रेल सेवाओं की सौगात, दिल्ली से प्रयागराज तक सफर होगा आसान>>मनीषा भांबरी ने रचा इतिहास, विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण पदक>>बॉक्स ऑफिस पर ‘जेलर 2’ का दबदबा कायम, जानें उड़ता तीर, प्रहार और दृश्यम 3 का हाल>>कम उम्र में बढ़ रहा डायबिटीज का खतरा, नींद की कमी से लेकर तनाव तक ये आदतें बढ़ा सकती हैं ब्लड शुगर>>उत्तराखंड में राष्ट्रीय महिला आयोग ने लिया वर्ष 2030 तक ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ के निर्माण का सामूहिक संकल्प>>एमडीडीए का अवैध निर्माणों पर बड़ा प्रहार, सात स्थानों पर सीलिंग>>उत्तराखंड पुलिस के 8 उपनिरीक्षक बने दलनायक, पुलिस मुख्यालय ने जारी किए पदोन्नति आदेश>>मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिक्षाविद् ललित मोहन जोशी को प्रदान किया ‘देवभूमि विकास सम्मान 2026’>>कुंभ-2027 के लिए एनवायरमेंट बाबा ने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को दिया आमंत्रण>>13 नवंबर को होगा तृतीय प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन, देश-विदेश में रह रहे प्रवासियों को मिलेगा अपनी मातृभूमि से जुड़ने का मंच>>चमोली हेलीकॉप्टर हादसे पर मुख्यमंत्री धामी ने जताया गहरा शोक, दुर्घटना की जांच के दिए निर्देश>>श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के खेलोत्सव-2026 में खिलाड़ियों ने दिखाया दमखम, शतरंज, टेबल टेनिस और बैडमिंटन में रोमांचक मुकाबले>>मंत्री डाॅ. रावत ने किया ऑनलाइन प्लेसमेंट सेल व ट्रेनिंग सेंटर का लोकार्पण>>श्रद्धा कपूर की ‘ईठा’ का ट्रेलर हुआ रिलीज, विठाबाई की जिंदगी को पर्दे पर उतारेंगी अभिनेत्री>>एसटीपी निर्माण एवं प्रस्तावित कार्यों में तेजी लाने के निर्देश, 04 नवम्बर को जनपद में आयोजित होगा गंगा उत्सव>>जनता का विश्वास मेरी सबसे बड़ी पूंजी, हर चुनौती के बावजूद सोमेश्वर के विकास के लिए करती रहूंगी कार्य- रेखा आर्या
उत्तराखण्ड

इस खूनी ट्रैक पर 34 साल में 27 हाथी गंवा चुके जान

रायवाला, देहरादून : राजाजी टाइगर रिजर्व से गुजर रहा हरिद्वार-देहरादून रेलवे ट्रैक न सिर्फ हाथियों के स्वच्छंद विचरण में बाधक बन रहा, बल्कि उनकी जान पर भी भारी पड़ रहा है। 34 साल पहले अस्तित्व में आए राजाजी नेशनल पार्क से गुजर रहे इस रेल ट्रैक पर अब तक ट्रेन से टकराकर 27 हाथियों की जान जा चुकी है। एलीफेंट टास्क फोर्स (ईटीएफ) के आंकड़ों पर गौर करें तो हाथियों की मौत के मामले में उत्तराखंड पूरे देश में तीसरे नंबर पर है।

ईटीएफ के आंकड़े बताते हैं कि उत्तराखंड में सर्वाधिक हाथियों की मौत हरिद्वार-देहरादून रेलवे ट्रैक पर ही हुई। इनमें मोतीचूर व कांसरो, दो ऐसी जगह हैं, जहां सबसे अधिक हादसे हुए। यहां 15 अक्टूबर 2016 को एक व 14 जनवरी 2013 को दो हाथियों की मौत ट्रेन से टकराने पर हुई।

अब पहले 17 फरवरी 2017 और फिर 20 फरवरी को हुए हादसे ने तो सुरक्षा इंतजामों की कलई खोलकर रख दी है। हकीकत यह है कि इस रेलवे ट्रैक पर हाथियों की सुरक्षा के इंतजाम नदारद हैं। जबकि, केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के माध्यम से ईटीएफ राज्य सरकार को रेलवे ट्रैक पर सुरक्षा के कई सुझाव दे चुका है।

इनमें पार्क क्षेत्र में रेलवे ट्रैक के इर्द-गिर्द अनिवार्य गश्त, साफ-सफाई, कॉरीडोर क्षेत्र में साइन बोर्ड, ट्रेन की गति 30 किमी प्रति घंटा समेत कई सुझाव शामिल हैं। यही नहीं, हरिद्वार-देहरादून रेलवे लाइन के विद्युतीकरण से पहले हाथियों की सुरक्षा के मद्देनजर सभी उपाय किए जाने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जबकि, सुरक्षा को सभी इंतजाम करने की जिम्मेदारी पार्क प्रशासन की है।

लोको पायलट के लिए चुनौती

जिस ट्रेन की चपेट में आने से हाथी की मौत होती है, वन विभाग उसके चालक के खिलाफ वन्य जीव अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज करा देता है। जंगल से गुजर रहे रेलवे ट्रैक पर कई जगह घुमाव हैं, इस कारण दूर से हाथी नजर नहीं आता। हाथी के अचानक ट्रैक पर आ जाने से तत्काल ब्रेक लगाना रेलवे सेफ्टी नियमों के अनुरूप नहीं है। इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन लगभग 50 मीटर की दूरी पर रुकती है। 30 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने पर भी यह समस्या रहती है।

खुली गश्त की पोल, वायरलेस ठप 

30 दिन के अंतराल में दो हाथियों की मौत ने ट्रैक पर नियमित गश्त और सुरक्षा इंतजाम की पोल खोल दी है। जनवरी 2013 में ट्रेन से कटकर एक साथ दो हाथियों की मौत के बाद रेलवे और वन विभाग के बीच सामंजस्य बनाने पर सहमति बनी। इसके तहत वन विभाग की ओर से मोतीचूर, रायवाला और कांसरो रेलवे स्टेशन पर वायरलेस सेट लगाए गए, ताकि ट्रैक पर हाथी के होने की स्थिति में सूचना दी जा सके। लेकिन, हकीकत देखिए कि ये वायरलेस लगने के एक साल बाद ही बंद हो गए।

डब्ल्यूटीआइ भी संभाल रही जिम्मा 

रेल ट्रैक पर हाथियों की सुरक्षा का जिम्मा वन विभाग के अलावा डब्ल्यूटीआइ भी संभाल रही है। पेट्रोलिंग हेड दिनेश पांडे ने बताया कि मोतीचूर से रायवाला के बीच संस्था के चार कर्मचारी नियमित गश्त करते हैं। लेकिन, वन विभाग के कर्मचारी मौके पर नहीं होते।

वहीं, पार्क के पूर्व डायरेक्ट के निर्देश पर रायवाला से कांसरो के बीच जिम्मेदारी डब्ल्यूटीआइ से हटा दी गई है। इस ट्रैक पर सिर्फ वन विभाग के पास ही सुरक्षा की जिम्मेदारी है और इसी ट्रैक पर हादसे भी हो रहे हैं।

Loading

Ghanshyam Chandra

AKASH GYAN VATIKA (www.akashgyanvatika.com) is one of the leading and fastest growing web News Portal which provides latest information about the Political, Social Activities, Environmental, entertainment, sports, General Awareness etc. I, GHANSHYAM CHANDRA, EDITOR, AKASH GYAN VATIKA provide News and Articles about the abovementioned subject and also provide latest/current state/national/international News on various subject.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!