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उत्तराखण्ड

बांध बनेगा उत्तराखंड में, क्षतिपूर्ति को दूसरे राज्यों में उगाएंगे जंगल

देहरादून : इसे विडंबना नहीं कहें तो फिर क्या कहें, देश को स्वच्छ पर्यावरण उपलब्ध कराने के लिए वनावरण को संजोने वाले उत्तराखंड के पास अब और वन लगाने के लिए भूमि नहीं बची है। आलम यह है कि देश के तकरीबन पांच राज्यों को सिंचाई व बिजली का लाभ देने के लिए भारत-नेपाल सीमा पर प्रस्तावित पंचेश्वर बांध की जद में आने वाले पेड़ों की प्रतिपूर्ति के लिए अब उत्तराखंड को अन्य राज्यों में जमीन तलाशनी पड़ रही है। इसके लिए उत्तर प्रदेश से लेकर कर्नाटक तक से संपर्क साधा जा रहा है।

उत्तराखंड और नेपाल के बीच शारदा नदी (नेपाल में महाकाली) पर 40 हजार करोड़ की लागत से पंचेश्वर बांध परियोजना प्रस्तावित है। इस परियोजना में उत्तराखंड के तीन जिलों पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और चंपावत के 130 गांव प्रभावित हो रहे हैं।

परियोजना की जद में उत्तराखंड क्षेत्र की 9100 हेक्टेयर जमीन आ रही है। इस भूमि पर बड़ी संख्या में पेड़ लगे हैं। विकास के लिए इन पेड़ों की बलि तय है। नियमानुसार इस परियोजना के जितने क्षेत्रफल से पेड़ कटेंगे, उतने ही क्षेत्रफल पर पेड़ उगाए भी जाने हैं। अमूमन राज्य की योजनाओं के लिए दोगुनी भूमि देनी होती है, चूंकि पंचेश्वर परियोजना अंतर्राष्ट्रीय परियोजना है, इसके लिए क्षेत्रफल समान रखा गया है।

अभी इसका सर्वे किया जा रहा है कि इसमें कितने क्षेत्रफल में पेड़ों का कटान किया जाना है। चारधाम मार्ग परियोजना में ही 50 हजार से अधिक पेड़ कटने हैं, ऐसे में माना जा रहा है कि पंचेश्वर में यह आंकड़ा इससे दोगुना हो सकता है। इतनी संख्या में पेड़ों की नए पौध को उगाने के लिए काफी जमीन चाहिए। यह क्षेत्र सैकड़ों एकड़ का होगा।

अब क्योंकि उत्तराखंड का 71.05 प्रतिशत क्षेत्र वन भूभाग है, ऐसे में प्रदेश के पास इतनी जमीन नहीं कि वह इन पेड़ों की प्रतिपूर्ति के लिए किसी जिले में जमीन उपलब्ध करा सके। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार कई प्रदेशों से भूमि उपलब्धता के संबंध में वार्ता कर रही है। अभी तक प्रदेश सरकार उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और कर्नाटक तक से इस सिलसिले में बात कर चुकी है, लेकिन कोई अंतिम फैसला नहीं हो पाया है

अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री ओमप्रकाश का कहना है कि भूमि के लिए कई राज्यों से बात की जा रही है। उन्होंने कहा कि इससे सबसे अधिक फायदा उत्तर प्रदेश को हो रहा है तो वहां भूमि मिलने की संभावना सबसे अधिक है। हालांकि, अभी सर्वे चल रहा है कि कितने पेड़ इस परियोजना की जद में आएंगे और कितनी जमीन चाहिए होगी।

पंचेश्वर परियोजना पर एक नजर

-भारत और नेपाल सीमा पर शारदा नदी पर बनाया जाना है बांध।

-बांध से 4800 मेगावाट बिजली मिलनी की संभावना।

-40 हजार करोड़ है परियोजना की लागत।

-उत्तराखंड में 9100 हेक्टेयर भूमि का होगा अधिग्रहण।

-भारत में 2,59,000 हेक्टेयर भूमि पर होगी सिंचाई।

 

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Ghanshyam Chandra

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