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उत्तराखण्ड

कोट और देवल में फूलों व सब्जियों की खेती से बदलेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था- जिलाधिकारी

लिलियम उत्पादकों के लिए कोल्ड स्टोरेज, परिवहन एवं विपणन सुविधाएं विकसित करने के दिए निर्देश

आधुनिक खेती, भंडारण और बाजार से जुड़ेंगे किसान, आय बढ़ाने पर प्रशासन का फोकस

पौड़ी। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने गुरुवार को विकासखंड कोट के अंतर्गत कोट एवं देवल गांव का भ्रमण कर पॉलीहाउस आधारित खेती, सब्जी उत्पादन तथा लिलियम पुष्प उत्पादन गतिविधियों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं एवं उत्पादन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी ली तथा अधिकारियों को किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में पारंपरिक खेती के साथ-साथ उच्च मूल्य वाली फसलों, पुष्प उत्पादन और संरक्षित खेती (पॉलीहाउस) को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नयी दिशा दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि उत्पादन, भंडारण और विपणन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करके स्थानीय किसानों की आर्थिक रूप से अधिक सशक्त किया जा रहा हुआ, जिससे युवाओं के लिए भी स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

कोट गांव में निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने पॉलीहाउस में उगायी जा रही विभिन्न सब्जियों एवं लिलियम पुष्प उत्पादन का अवलोकन किया। उन्होंने किसानों को पारंपरिक कृषि के साथ मशरूम उत्पादन, औषधीय एवं सुगंधित पौधों तथा अन्य लाभकारी फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि कृषि में विविधीकरण से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।

जिलाधिकारी ने किसानों से उनके उत्पादन, वार्षिक आय, बाजार व्यवस्था एवं खेती से जुड़ी चुनौतियों की जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के लिए विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

जिलाधिकारी से संवाद में महिलाओं ने बताया कि कोल्ड स्टोरेज की सुविधा उपलब्ध होने से उनके फूल लंबे समय तक सुरक्षित रह सकेंगे और उन्हें बाजार में उचित समय पर बेहतर कीमत पर बेचने का अवसर मिलेगा। इस पर जिलाधिकारी ने बीडीओ को निर्देश दिए कि लिलियम पुष्पों के सुरक्षित भंडारण के लिए क्षेत्र में उपलब्ध किसी अनुपयोगी सरकारी भवन का चिन्हीकरण किया जाए, ताकि वहां कोल्ड स्टोरेज विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया जा सके। उन्होंने कहा कि कोल्ड स्टोरेज की सुविधा उपलब्ध होने से किसानों को अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।

किसानों ने बताया कि परिवहन के सीमित साधनों के कारण उत्पादों को समय पर बाजार तक पहुंचाने में कठिनाई होती है। उन्होंने कहा कि यदि समूह आधारित यूटिलिटी वाहन की व्यवस्था उपलब्ध हो जाती है तो उत्पादों को स्थानीय बाजारों के साथ-साथ बड़े व्यापारिक केंद्रों तक आसानी से पहुंचाया जा सकेगा। इससे परिवहन लागत कम होगी, उत्पादों की गुणवत्ता बनी रहेगी तथा किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। इस पर जिलाधिकारी ने क्षेत्रीय कृषि एवं पुष्प उत्पादों के विपणन को सुदृढ़ बनाने के लिए किसानों के उपयोग हेतु यूटिलिटी वाहन उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्पादन के साथ-साथ बाजार तक समय पर पहुंच भी किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इसके उपरांत जिलाधिकारी देवल गांव पहुंचीं, जहां उन्होंने प्रगतिशील कृषक नरेश द्वारा संचालित पॉलीहाउस, सब्जी उत्पादन एवं लिलियम खेती का निरीक्षण किया। उन्होंने खेती में अपनायी जा रही आधुनिक तकनीकों की सराहना करते हुए अन्य किसानों को भी ऐसे नवाचारों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने किसानों को सब्जी उत्पादन के साथ-साथ पुष्प उत्पादन, मशरूम, फलोत्पादन एवं अन्य आयवर्धक गतिविधियों को अपनाने की सलाह दी।

जिलाधिकारी ने उद्यान एवं कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि क्षेत्र के दस प्रमुख कृषि एवं उद्यानिकी उत्पादों की विस्तृत बुकलेट तैयार की जाए, जिसमें उत्पादों की विशेषताएं, उत्पादन क्षमता, बाजार संभावनाएं एवं ब्रांडिंग संबंधी जानकारी शामिल हो। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों की पहचान और प्रचार-प्रसार बढ़ने से किसानों को व्यापक बाजार उपलब्ध होगा। साथ ही उन्होंने क्षेत्र में अन्य पॉलीहाउस भी विकसित करने के निर्देश दिए।

जल संरक्षण को कृषि विकास का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए जिलाधिकारी ने वाटर हार्वेस्टिंग टैंक निर्माण के प्रस्तावों को जिला योजना में शामिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्षा जल संरक्षण से सिंचाई सुविधाएं मजबूत होंगी तथा किसानों को वर्षभर खेती करने में सहायता मिलेगी। देवल गांव में जिलाधिकारी ने लिलियम उत्पादन से जुड़ी महिला कृषकों से भी संवाद किया। उन्होंने महिलाओं की समस्याएं सुनीं तथा सिंचाई, पेयजल और विपणन से संबंधित आवश्यकताओं की जानकारी ली। जिलाधिकारी ने कहा कि महिला स्वयं सहायता समूहों और महिला कृषकों को कृषि एवं उद्यानिकी गतिविधियों से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है।

जिलाधिकारी ने उद्यान विभाग को निर्देश दिए कि सब्जी, लहसुन, लिलियम तथा अन्य स्थानीय कृषि उत्पादों के लिए बेहतर विपणन तंत्र विकसित किया जाए, जिससे किसानों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि आधुनिक खेती, वैज्ञानिक भंडारण, प्रभावी विपणन व्यवस्था तथा मूल्य संवर्धन के माध्यम से पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि को लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा सकता है।

इस अवसर पर जिला उद्यान अधिकारी मनोरंजन भंडारी, बीडीओ अमित बिजल्वाण, नायब तहसीलदार झबर सिंह असवाल, सहायक कृषि अधिकारी अमित पंत, कानूनगो संजय सिंह नेगी सहित अन्य अधिकारी एवं स्थानीय कृषक उपस्थित रहे।

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Ghanshyam Chandra

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