Breaking News :
>>ग्राफिक एरा ग्लोबल स्कूल की अभिनव पहल : भविष्य की शिक्षा के लिए शिक्षकों को AI से कर रहा सशक्त>>हिमालय डिजिटल मीडिया एसोसिएशन ने सूचना विभाग की विज्ञापन दरों को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप संशोधित करने की उठाई माँग>>राष्ट्रीय खेल दिवस पर उत्तराखण्ड को मिलेगी खेल विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक सौगात : रेखा आर्या>>उत्तराखंड में विंटर टूरिज्म को मिलेगी नई उड़ान, नए पर्यटन डेस्टिनेशन विकसित करने पर जोर>>श्रीनगर बस अड्डे का 31 अगस्त तक होगा हस्तांतरण, डीएम ने विकास परियोजनाओं में तेजी के दिए निर्देश>>श्रीनगर बस अड्डे का 31 अगस्त तक होगा हस्तांतरण, डीएम ने विकास परियोजनाओं में तेजी के दिए निर्देश>>नन्हे-मुन्ने बच्चों संग कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने मनाया रक्षाबंधन>>मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन से मिले विश्व बैंक के अधिकारी>>मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी में नया रिकॉर्ड, 2.35 लाख से ज्यादा खिलाड़ियों ने कराया पंजीकरण>>मुख्यमंत्री धामी ने पाँच वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित विशेष एल्बम गीत का किया विमोचन>>कम खाना खाने के बावजूद क्यों बढ़ता है वजन? रोटी नहीं, ये आदतें हो सकती हैं जिम्मेदार>>आंध्र प्रदेश में दर्दनाक सड़क हादसा, बस-ऑटो की टक्कर में 7 लोगों की मौत, कई घायल>>मुख्यमंत्री के निर्देशों पर श्रीनगर व कोटद्वार में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई>>प्रेमनगर क्षेत्र में आबकारी विभाग की छापेमारी, 19 पेटी शराब बरामद>>‘जीवन भीमा योजना’ का ट्रेलर रिलीज, डबल रोल में नजर आएंगे अरशद वारसी>>मनोज झा और विमल पुरवाल की माताओं के निधन पर सीएम धामी ने जताया शोक>>मानसून में बढ़ा ‘स्वाइन फ्लू’ का खतरा, IMA ने जारी की एडवाइजरी; बिना सलाह दवा न लेने की अपील>>सीएम धामी के पांच साल के कार्यकाल की उपलब्धियों पर विशेष एल्बम गीत का विमोचन>>गर्दन का दर्द समझकर न करें नजरअंदाज, लंबे स्क्रीन टाइम से बढ़ सकती है सर्वाइकल की समस्या>>टपकेश्वर महादेव की शोभायात्रा में शामिल हुए सीएम धामी, प्रदेश की खुशहाली के लिए की प्रार्थना
उत्तराखण्ड

उत्तराखंड को वैज्ञानिकों की चेतावनी, अनदेखी पड़ सकती है भारी

देहरादून: केदारनाथ जैसी त्रासदी झेलने के बावजूद उत्तराखंड की सरकारें सबक लेने को तैयार नहीं हैं। वैज्ञानिक संस्थानों की रिपोर्ट को या तो दरकिनार किया जा रहा है अथवा सवालों के साथ वापस भेजा जा रहा है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी कि प्राकृतिक आपदा की दृष्टि से संवेदनशील राज्य में यह अनदेखी भारी पड़ सकती है।

वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान में उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) के सेमिनार में सरकार की उपेक्षा से आहत वैज्ञानिकों की पीड़ा छलक उठी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 में केदारनाथ आपदा के ठीक बाद वाडिया, केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान और राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों की संयुक्त टीम ने जान जोखिम में डाल केदारनाथ के आसपास के क्षेत्र के साथ ही चौराबाड़ी झील का सर्वेक्षण किया था।

यह चौराबाड़ी झील ही थी, जिसके फटने से इतनी बड़ी तबाही हुई। अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने यहां उपकरण भी स्थापित किए और कई माह क्षेत्र में बिताए। बताया गया कि इस अध्ययन पर दो करोड़ रुपये खर्च हुए। इसके बाद केदारनाथ धाम की सुरक्षा को लेकर बिंदुवार रिपोर्ट तैयार शासन को भेजी गई, लेकिन विडंबना यह कि रिपोर्ट सवालों के साथ लौटा दी गई।

सेमिनार में मेगसेसे और गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध पर्यावरणविद् चंडी प्रसाद भट्ट ने भी वैज्ञानिकों की पीड़ा से खुद को जोड़ते हुए कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने वर्ष 1999 से 2000 तक उत्तराखंड के भूस्खलन संभावित इलाकों का अध्ययन किया था। अध्ययन में ऋषिकेश से लेकर गंगोत्री के अलावा यमुनोत्री, बदरीनाथ और केदारनाथ को भी शामिल किया गया था। वर्ष 2001 में इसकी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी गई। रिपोर्ट में आपदा से होने वाले संभावित नुकसान भी आकलन किया गया था। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट भी अफसरों ने दबाए रखी।

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों की रिपोर्ट की अनदेखी का नतीजा यह रहा कि पिथौरागढ के मालपा, रुद्रप्रयाग के ऊखीमठ और उत्तरकाशी के वरुणावत में आई आपदाओं में व्यापक पैमाने पर नुकसान हुआ। भट्ट ने कहा कि आपदा रोकना मुमकिन नहीं है, लेकिन इससे होने वाले जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि  अब ऐसी रिपोर्टों की अनदेखी नहीं की जाएगी। सेमिनार में उपस्थित उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने वैज्ञानिक रिपोर्ट की अनदेखी गंभीर मसला है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ऐसी रिपोर्टों का सरकार संज्ञान लेगी।

कम बर्फबारी से ग्लेशियरों पर संकट 

प्रसिद्ध पर्यावरणविद चंडी प्रसाद भट्ट ने कहा कि इस साल बारिश और बर्फबारी न होने से ग्लेशियरों पर संकट मंडरा रहा है। तापमान बढऩे के साथ ही ग्लेशियरों पर जमा पुरानी बर्फ पिघलने लगेगी। इससे भविष्य में जल संकट और गहराएगा। उन्होंने कहा कि इस बदलाव का असर हिमालय के साथ ही समुद्री तटीय इलाकों पर भी पड़ेगा।

Loading

Ghanshyam Chandra

AKASH GYAN VATIKA (www.akashgyanvatika.com) is one of the leading and fastest growing web News Portal which provides latest information about the Political, Social Activities, Environmental, entertainment, sports, General Awareness etc. I, GHANSHYAM CHANDRA, EDITOR, AKASH GYAN VATIKA provide News and Articles about the abovementioned subject and also provide latest/current state/national/international News on various subject.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!