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तीन दिवसीय प्रतिष्ठित उत्सव ऑक्टेवव-2022 का समापन

महाभारतकालीन समय से रहे हैं उत्तर-पूर्वी राज्यों से हमारे संबंध : महाराज

आकाश ज्ञान वाटिका, 23 मई 2022, सोमवार, श्रीनगर (उत्तराखंड)। हमारा देश एक राष्ट्र, एक ध्वज और एक आत्मा है। प्रतिष्ठित उत्सव ऑक्टेव-2022 जिस धरती पर हो रहा है, यही वह स्थान है जहाँ से पाण्डव स्वर्गारोहण और केदारनाथ गए थे। इस आयोजन के माध्यम से जो झलक दिखलायी गई वह हमारी महाभारत कालीन संस्कृति से मिलती है।

उक्त बात प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला द्वारा रामलीला मैदान में आयोजित तीन दिवसीय प्रतिष्ठित उत्सव ऑक्टेव-2022 के समापन अवसर उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के कलाकारों और दर्शकों को बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित करते हुए कही।

प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि उत्तर-पूर्वी राज्यों से हमारा महाभारतकाल से संबंध रहा है। रुकमणी देवी जिनका विवाह भगवान श्रीकृष्ण से हुआ वह अरूणाचल प्रदेश से थीं, अर्जुन का विवाह मणीपुर के राजा की बेटी चित्रांगदा से हुआ, भीम का विवाह नागालैण्ड की जनजाति की हिडम्बा से और दुर्योधन का विवाह असम, गुवाहाटी के राजा की पुत्री भानुमति से हुआ था। इतना ही नहीं असम की गार्गी जनजाति के लोग स्वयं को रामायणकालीन बॉली और सुग्रीव के वंशज मानते हैं।

संस्कृति मंत्री महाराज ने कहा कि हमारा उत्तर-पूर्वी राज्यों से गहरा आध्यत्मिक जुड़ाव भी है। असम में माँ कामाख्या देवी और त्रिपुरा में माँ त्रिपुर सुंदरी बालाजी हमारी आस्था एवं श्रद्धा की शक्ति के केंद्र हैं। ऑक्टेव-2022 में आठ राज्य के कलाकारों ने जो सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी हैं वह महाभारतकालीन संस्कृति से मिलती हैं।

संस्कृति मंत्री ने ऑक्टेव-2022 के लिए संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समय समय पर इस प्रकार के आयोजन देश के हर हिस्से में आयोजित होने चाहिए ताकि हम सभी एक दूसरे की संस्कृति से रूबरू हो सकें।

रामलीला मैदान में तीन दिवसीय उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित उत्सव ऑक्टेव-2022 के समापन के अवसर पर असम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मेघालय, मिजोरम, मणिपुर और सिक्किम के कलाकारों की प्रस्तुतियों से प्रभावित होकर संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज, उनकी पुत्रवधु आराध्या ने सांस्कृतिक दल के प्रमुख को सम्मानित भी किया।

आयोजन में उत्तर पूर्वी राज्यों के लगभग 250 कलाकारों अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी। असम के कलाकारों ने बीहू नृत्य, बरडोई शिकला, मणिपुर के कलाकारों ने पुंग चोलम और ढोल चोलम, लाई हरूबा और थांगटा, त्रिपुरा के कलाकारों ने होजागिरी, संगराई मोग, सिक्किम के कलाकारों ने सिंघी छम्म, तमांग सेलो, नागालैण्ड के युद्ध नृत्य, एफिलो कुघू, मुगियंता, अरूणाचल प्रदेश के कलाकारों ने रिकम्पाद, ब्रोजाई, मेघालय के का शाद मस्तीह/होको मेघालय, वांगला और मिजोरम के कलाकारों ने सोलकिया आदि नृत्य एवं प्रस्तुतियाँ दी।

इस मौके पर बतौर विशिष्ट अतिथि पौडी सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत सहित उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, एवं संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार की निदेशक श्रीमती दीपिका पोखरना, गढ़वाली गायक नत्थीलाल नौटियार, कार्यक्रम संयोजक राकेश भट्ट, जगजीत सिंह एवं जनरेल सिंह सहित बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद थे।

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Ghanshyam Chandra

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