श्री शिव महापुराण कथा का भक्तिमय वातावरण में हुआ दिव्य समापन

हवन-पूर्णाहुति के साथ नौ दिवसीय कथा को विश्राम, विशाल भंडारे में श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद
आकाश ज्ञान वाटिका, मंगलवार, 11 अगस्त 2026, देहरादून। पवित्र श्रावण मास के पुण्यदायी अवसर पर श्री सनातन धर्म मंदिर, नेहरू कॉलोनी, देहरादून में आयोजित नौ दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा का विश्राम दिवस अत्यंत श्रद्धा, भक्ति, आध्यात्मिक उल्लास एवं भावपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। नौ दिनों तक मंदिर परिसर में भगवान भोलेनाथ की भक्ति की अविरल धारा बहती रही और समापन दिवस पर हवन-पूर्णाहुति, आरती एवं विशाल भंडारे के साथ इस दिव्य धार्मिक आयोजन को भावपूर्ण विश्राम प्रदान किया गया।
कथा की पावन व्यासपीठ से श्रीधाम वृन्दावन से पधारे पूज्य श्री पवन देव चतुर्वेदी जी महाराज ने भगवान शिव की महिमा का अत्यंत भावपूर्ण एवं भक्तिरस से ओत-प्रोत वर्णन करते हुए नौ दिवसीय कथा को विश्राम प्रदान किया। महाराज श्री ने कहा कि श्री शिव महापुराण केवल एक धार्मिक ग्रंथ या कथा नहीं, बल्कि मानव जीवन को सत्य, धर्म, प्रेम, करुणा, सेवा, त्याग, सदाचार और ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा का मार्ग दिखाने वाला दिव्य प्रकाश है। भगवान शिव की आराधना मनुष्य के भीतर अहंकार का नाश कर विनम्रता, धैर्य और आत्मिक शांति का संचार करती है।

नौ दिनों तक चले इस आध्यात्मिक अनुष्ठान में भगवान शिव की अनंत महिमा, शिवलिंग पूजन का महत्व, माता सती एवं दक्ष यज्ञ का मार्मिक प्रसंग, माता पार्वती की कठोर तपस्या, भगवान शिव एवं माता पार्वती के दिव्य विवाह, श्रीगणेश एवं कार्तिकेय के पावन चरित्र, भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों एवं अवतारों तथा शिवभक्ति से जुड़े अनेक प्रेरणादायी प्रसंगों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया। कथा के प्रत्येक प्रसंग ने श्रद्धालुओं के हृदय को भक्ति और भावनाओं से भर दिया।

कथा श्रवण के दौरान मंदिर परिसर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। भजन, कीर्तन, शंखध्वनि, घंटियों की मधुर ध्वनि और ‘हर-हर महादेव’, ‘बम-बम भोले’ एवं ‘ॐ नमः शिवाय’ के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय बना रहा। ऐसा प्रतीत होता था मानो स्वयं कैलाशपति भगवान शिव की कृपा मंदिर परिसर में साक्षात बरस रही हो। श्रद्धालु भाव-विभोर होकर कथा का श्रवण करते रहे और अनेक भक्तों की आंखों से भक्ति के आँसू छलक उठे।

विश्राम दिवस पर कथा के पश्चात वैदिक मंत्रोच्चारण एवं विधि-विधान के साथ हवन एवं पूर्णाहुति संपन्न हुई। यजमान परिवारों एवं श्रद्धालुओं ने हवन कुंड में श्रद्धापूर्वक आहुतियां अर्पित करते हुए भगवान भोलेनाथ से परिवार, समाज एवं राष्ट्र की सुख-समृद्धि, आरोग्य, शांति और मंगल की प्रार्थना की। वातावरण में गूंजते वैदिक मंत्रों और स्वाहा की पवित्र ध्वनि ने पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
पूर्णाहुति के अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने अपने मन की भावनायें भगवान शिव के चरणों में समर्पित करते हुए प्रार्थना की कि महादेव सभी के जीवन से दुख, संकट और नकारात्मकता का नाश करें तथा प्रत्येक परिवार में सुख, शांति, प्रेम और समृद्धि का वास हो। भक्तों ने यह भी कामना की कि भगवान शिव की कृपा से समाज में सद्भाव, सेवा और सनातन संस्कृति के प्रति श्रद्धा निरंतर बढ़ती रहे।
हवन एवं पूर्णाहुति के उपरांत भगवान भोलेनाथ की भव्य आरती की गई। जैसे ही आरती के दीपों से मंदिर का वातावरण आलोकित हुआ, पूरा परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ के जयघोष से गूँज उठा। श्रद्धालुओं ने आरती में सम्मिलित होकर भगवान शिव के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की और प्रसाद ग्रहण किया।

इसके पश्चात मंदिर परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, भक्तजनों एवं क्षेत्रवासियों ने प्रेमपूर्वक प्रसाद ग्रहण किया। सेवा में जुटे स्वयंसेवकों ने अत्यंत श्रद्धा और समर्पण के साथ भक्तों को प्रसाद वितरित किया। भंडारे का वातावरण भी सेवा, समर्पण और भाईचारे की भावना से ओत-प्रोत रहा।

इस अवसर पर पूज्य महाराज श्री ने श्री सनातन धर्म मंदिर कमेटी, समस्त यजमान परिवारों, आयोजन से जुड़े सेवाभावी कार्यकर्ताओं, संगीत मंडली, कथा आयोजन में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों की सफलता केवल भव्यता में नहीं, बल्कि उससे उत्पन्न होने वाली भक्ति, सेवा, संस्कार और समाज में सकारात्मक ऊर्जा में निहित होती है।
नौ दिवसीय इस पावन आयोजन के समापन पर श्रद्धालुओं के मन में एक ओर कथा पूर्ण होने की संतुष्टि थी, तो दूसरी ओर कथा की मधुर स्मृतियों से बिछड़ने की भावुकता भी दिखाई दी। भक्तों ने भाव-विभोर होकर भगवान शिव से प्रार्थना की कि महादेव की भक्ति की यह ज्योति प्रत्येक हृदय में सदैव प्रज्वलित रहे और शिव महापुराण से प्राप्त ज्ञान एवं संस्कार हमारे जीवन को धर्म, सत्य और सेवा के मार्ग पर निरंतर अग्रसर करते रहें।
अंत में समस्त श्रद्धालुओं ने भगवान आशुतोष के श्रीचरणों में नमन करते हुए सामूहिक रूप से लोककल्याण की प्रार्थना की :
“सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्॥”
हर-हर महादेव !
ॐ नमः शिवाय ! 🙏🔱
![]()