मन की बात में पीएम मोदी ने की जनजाति की संस्कृति की तारीफ

आकाश ज्ञान वाटिका। उत्तराखंड की पांचो जनजातियों की बात पीएम नरेंद्र मोदी के मन की बात में आने से उत्साहित सोच संस्था ने बोली को लिपिवद्द करने की बात कही। इसके लिए मोदी से मिलने के लिए पांच जनजातियों का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली जाकर बातचीत करेगा । जनजाति संस्कृति के संरक्षण के लिए समर्पित संस्था सोसायटी फार एक्सन इन हिमालया के अध्यक्ष जगत मर्तोलिया ने कहा कि देश के प्रत्येक राज्य में जनजातियों के कल्चर को संरक्षित करने के लिए उनकी बोली की लिपि बनाने के लिए सरकारो ने विशेष प्रयास किए है। कार्यशाला में विभिन्न पहूलुओं पर गहनता से बातचीत हुई । कहा कि मन की आवाज में जनजाति की संस्कृति की तारीफ पीएम मोदी ने किया था, उससे एक बार फिर जनजाति की विशिष्ट सभ्यता चर्चा में आ गयी है । रं जनजाति, शौका, बरपटिया, वनराजि, थारु, बुक्सा, तोल्छा, मार्छा, खप्पा, डुण्डा की जनजाति की बोली में अतंर है। इसको लिपि देने की आवश्यक्ता है.अभी केवल रंजनजाति की बोली की ही लिपि बनी है, जिसको भी सरकार से मान्यता नहीं मिली है. जनजाति समुदाय के भीतर हिंदी, कुमांऊनी, गढ़वाली बोली ने जिस ढंग से पैर पसारने के साथ ही पैठ जमानी शुरु की है, जनजाति बोली को बोलचाल में सिमटाने का कार्य किया है. इसलिए मोदी जी मन की बात में जनजातियों की तारीफ करने के बाद इसको बचाने की कवायद तेज हो गई है । मर्तोलिया ने कहा कि हम इस दिशा में ईमानदारी से काम कर रहे है, आने वाले समय में इसके बेहतर परिणाम सामने आएंगे।आज समिति की यहां हुई उच्च स्तरीय कार्यशाला में इन निर्णयों पर मुहर लगाई गई। कार्यशाला में हर बिन्दू पर बात की गई। बैठक में डां. दीप्ति धामी, पुष्पा, कुदंन, सुनीता, रेखा मल, राधा कुटियाल,हेमा जौनसारी, कमला राणा, राजा बुक्सा, धन रजवार आदि ने विचार रखे।
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