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उत्तराखण्ड

600 रुपये के लिए इस तरह से दांव पर लगा देतें हैं मुसाफिरों की जिंदगी

देहरादून: प्रदेश में लगातार सड़क दुर्घटनाएं यूं ही नहीं हो रहीं। वाहन अनफिट, ओवरस्पीड या ओवरलोड होना तो अकसर वजह होती ही है, लेकिन एक बड़ी वजह चालकों की नादानी भी है। निजी बस या टैक्सी-मैक्सी में चालकों के भरोसे पर हम सुरक्षित सफर की उम्मीद तो करते हैं लेकिन यही चालक महज 600 रुपये बचाने के लिए अपने संग सैकड़ों जान दांव पर लगा देते हैं। दो दिन की इस दिहाड़ी की खातिर चालक रिफ्रेशर कोर्स करना नहीं चाहते। जिसमें सुरक्षित व कुशल वाहन संचालन के टिप्स दिए जाते हैं। जुगाड़बाजी कर वह ड्राइविंग लाइसेंस नवीनीकृत कराने के लिए रिफ्रेशर कोर्स का सर्टिफिकेट हासिल तो कर लेते हैं, लेकिन उनकी यही नादानी सूबे में हर वर्ष सैकड़ों जिंदगी लील लेती है।

पर्वतीय प्रदेश होने के नाते उत्तराखंड में वाहन चालकों को और भी कुशल होने की जरूरत है, लेकिन यहां के चालक इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते। व्यवसायिक वाहनों खासतौर से सवारी वाहन चलाने वालों का तो भगवान ही मालिक है। वाहन संचालन के दौरान सुरक्षित नियम-कायदों का पालन यह चालक नहीं करते। यही वजह रही कि प्रदेश में हादसों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। बात 2016 की करें तो प्रदेश में 1591 हादसों में 962 लोगों की जिंदगी खत्म हो गई और 1736 गंभीर तौर पर जख्मी हुए।

वर्ष 2017 में 1603 हादसों में 942 लोगों की जान गई जबकि 1631 जख्मी हो गए। इस वर्ष जनवरी से अब तक लगभग 600 से ज्यादा हादसों में 450 से ज्यादा जिंदगी जा चुकी है। बावजूद इसके चालक कुशल वाहन संचालन के टिप्स लेने को राजी नहीं हैं। व्यवसायिक वाहन चालकों के लिए दो दिन का रिफ्रेशर कोर्स अनिवार्य है। जिसमें ड्राइविंग स्कूल में प्रशिक्षण दिया जाता है।

पहले कुशल प्रशिक्षक लेक्चर देते हैं, फिर प्रोजेक्टर पर वाहन संचालन के तौर-तरीके सिखाए जाते हैं। मशीनों के जरिए सिखाया जाता है कि कब-क्या करना है। दुर्घटनाएं रोकने में ये कोर्स काफी अहम माना जाता है। देहरादून संभाग के अंतर्गत चार जिलों देहरादून, हरिद्वार, टिहरी व उत्तरकाशी का ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल झाझरा (दून) में है।

निजी ट्रेनिंग स्कूलों का फर्जीवाड़ा बंद 

सरकार द्वारा पीपीपी मोड में संचालित किया जा रहा इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइिवंग एंड ट्रेनिंग रिसर्च (आइडीटीआर) खुलने के बाद गढ़वाल मंडल में निजी ट्रेनिंग स्कूलों के फर्जीवाड़े पर रोक लगी। पहले चालक इन निजी स्कूलों से रिफ्रेशर कोर्स के फर्जी सर्टिफिकेट बना लाते थे लेकिन चार साल पहले शासन ने इन स्कूलों पर रोक लगा दी, लेकिन जुगाड़बाजों ने यहां भी फर्जीवाड़ा कर डाला। आइडीटीआर के फर्जी प्रमाण-पत्र बना देहरादून आरटीओ दफ्तर से 650 से ज्यादा डीएल जारी करा लिए। इस मामले में जांच विचाराधीन है।

प्रदेश में दुर्घटना का आंकड़ा 

वर्ष 2017 में हुई मौतें 

जनपद,              हादसे,   मौत,   घायल

देहरादून,             342,    143,   254

हरिद्वार,            333,     194,   256

नैनीताल,            226,     112,  177

उधमसिंहनगर,    362,      251,  262

उत्तरकाशी,          35,       75,    72

टिहरी,                 113,      51,    238

चमोली,                51,       20,    146

रुद्रप्रयाग,              22,       11,     55

पौड़ी,                    38,        22,    56

अल्मोड़ा,              11,         05,    11

पिथौरागढ़,            32,         37,   52

चंपावत,                26,        17,   38

बागेश्वर,               12,         04,  14

योग,                    1603,     942, 1631

परिवहन विभाग के अपर आयुक्त सुनीता सिंह का कहना है कि व्यवसायिक वाहन चालक रिफ्रेशर कोर्स की अहमियत नहीं समझते। कोर्स करने से उन्हें ही फायदा होगा। हादसे कम होंगे व सफर सुरक्षित होगा। मगर चालकों को तो उनकी दो दिन की दिहाड़ी से मतलब होता है। दो दिन का कोर्स करेंगे तो मालिक दो दिन की दिहाड़ी नहीं देगा। चालकों की ये नादानी सैकड़ों जान दांव पर लगा देती है।

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Ghanshyam Chandra Joshi

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