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उत्तराखण्ड

शहर में की पेयजल में कटौती तो पानी से लबालब हुई नैनी झील

नैनीताल: सरोवर नगरी की जीवनदायिनी और देश विदेश के पर्यटकों की आकर्षण का केंद्र नैनी झील इस बार लबालब है। पिछले साल फरवरी में ही जलस्तर माइनस में पहुंचने से झील का दीदार करने आए पर्यटकों को निराशा हाथ लगी थी। इस बार पेयजल आपूर्ति में कटौती करके प्रशासन ने झील के सौंदर्य को बचाए रखने की कवायद की तो उसका असर भी नजर आ गया है। पिछले दो साल से मई के जलस्तर के तुलना करें तो इस बार करीब साढ़े छह फीट अधिक पानी है। आमतौर पर अप्रैल-मई में स्तर माइनस में रिकार्ड होता रहा है।

झील के कैचमेंट क्षेत्र में अतिक्रमण, झील में गिरने वाले नालों को पाट दिए जाने, प्राकृतिक जलस्रोत सूखने, साल दर साल पानी की खपत बढ़ने से झील का जलस्तर कम होता जा रहा है। पेयजल के लिए भी शहर इसी झील पर निर्भर है।

ऐसे में झील के अस्तित्व  व सौंदर्य को बनाए रखने के लिए इस बार रोजाना आठ लाख लीटर पानी मोटर के जरिए फिल्टरेशन पंपों तक पहुंचाया जा रहा है। जबकि पिछले साल सामान्य दिनों में 14 लाख लीटर व पर्यटन सीजन में 18 लाख लीटर प्रति दिन सप्लाई किया जाता था। इसी कारण पिछले दो साल से झील का पानी फरवरी-मार्च से ही घटने लगा था।

सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता मदन मोहन जोशी के अनुसार झील जब छलकने के स्तर तक पहुंच जाती है तो यह 90 फिट की गहराई लिए होती है। वहीं जब झील में 78 फिट तक पानी रहता है तो इसे शून्य लेवल माना जाता है। इस साल सात मई को यह स्थिति रही। जबकि पिछले दो वर्षों में फरवरी व मार्च में ही लेवल शून्य से भी नीचे आ गया था। इस बार स्थिति बेहतर है।

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Ghanshyam Chandra Joshi

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