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उत्तराखण्ड

रेशम फेडरेशन को ‘दून सिल्क’ से बड़ी कामयाबी, कमाया ₹1 करोड़ का शुद्ध लाभ

व्यावसायिक गतिविधियों में ‘कम्प्लीट वैल्यू चेन’ मॉडल से मिला नया आयाम

सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के नेतृत्व में ‘फार्म टू फेब्रिक’ और ‘वेस्ट से बेस्ट’ योजना से मिली रफ्तार

देहरादून। उत्तराखंड कोऑपरेटिव रेशम फेडरेशन में ‘कम्प्लीट वैल्यू चेन’ प्रणाली लागू होने से फेडरेशन की व्यावसायिक गतिविधियों में भारी सुधार देखने को मिला। फेडरेशन के द्वारा रेशम उत्पादन, धागा निर्माण, डिजाइनिंग, पैकेजिंग और विपणन पर फोकस करते हुये वित्तीय वर्ष 2024-25 में ‘दून सिल्क’ ब्रांड नाम से 2.34 करोड़ के रेशमी उत्पाद और धागों का विक्रय किया। जिससे फेडरेशन ने एक करोड़ से अधिक का शुद्ध लाभ कमाया, जो कि रेशम फेडरेशन की बड़ी उपलब्धि है।

सूबे के सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन के चलते उत्तराखंड कोऑपरेटिव रेशम फेडरेशन आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। रेशम फेडरेशन में कम्प्लीट वैल्यू चेन प्रणाली लागू होने से फेडरेशन की व्यावसायिक गतिविधियों को बल मिला, जिससे रेशमी उत्पादों के निर्माण व विक्रय में खासी वृद्धि हुई। इसके अलावा कम्प्लीट वैल्यू चेन के जरिये धागा निर्माण, डिजाइनिंग, पैकेजिंग और विपणन आदि क्षेत्रों पर भी फोकस किया गया। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि फेडरेशन के तहत विगत वर्ष 1500 किलो रेशम धागा का उत्पादन किया गया। इसके साथ ही बुनकरों, टिविस्टरों व समूहों द्वारा बड़े पैमाने पर रेशम वस्त्रों का उत्पादन किया गया। जिन्हें फेडरेशन ने अपने ब्रांड ‘दून सिल्क’ के रिटेल काउंटरों पर बेचा गया। विभाग के मुताबिक पिछले वित्तीष वर्ष में फेरडेशन द्वारा लगभग 2.34 करोड़ के रेशमी उत्पाद व धागों का विक्रय किया गया, जिससे फेडरेशन ने एक करोड़ से अधिक का मुनाफा कमाया, जो कि फेडरेशन की बड़ी उपलब्धि है।

विभागीय अधिकारियों के मुताबिक फेडरेशन के माध्यम से प्रदेशभर में 6500 से अधिक शहतूती रेशन कीटपालक कीटपालन का काम कर रहे हैं, जिसमें से फेडरेशन के प्राथमिक सहाकारी समितियों के 80 फीसदी कीटपालकों के द्वारा प्रतिवर्ष 3 लाख किलो रेशम कोया उत्पादित किया जा रहा है। कम्प्लीट वेल्यू चेन प्रणाली के तहत सेलाकुई ग्रोथ सेंटर में कीटपालकों से क्रय कोया से रेशमी धागों का उत्पादन कर स्थानीय बुनकरों के माध्यम से हैण्डलूम, पावरलूम व अन्य बुनाई विधाओं से विभिन्न प्रकार के रेशमी वस्त्रों का उत्पादन किया जाता है, जिन्हें फेडरेशन के द्वारा दून सिल्क ब्रांड नाम से बाजार में बेचा जा रहा है। वर्तमान में फेडरेशन के तहत 5501 लाभार्थी काम कर रहे हैं, जिसमें 5030 कीटपालक, 286 बुनकर, 12 उत्पाद फिनिशिंग, 24 धागा उत्पादक, 38 सहकारी समितियां, 13 स्वयं सहायता समूह और 98 यार्न बैंक लाभान्वित बुनकर शामिल है। जिनके माध्यम से फेडरेशन उच्च गुणवत्ता के रेशमी धागे और रेशम वस्त्रों का उत्पादन किया जा रहा है।

फार्म टू फेब्रिक परियोजना

इस योजना के तहत फेडरेशन द्वारा जनपद देहरादून व हरिद्वार में 200 लाभार्थियों का चयन किया गया है। परियोजना के तहत शहतूती वृ़क्षारोपण से लेकर रेशम वस्त्रों का उत्पादन तक लाभार्थियों को सम्मिलित किया गया है। जिसमें लाभार्थियों को कीटपालन गृह निर्माण हेतु शत-प्रतिशत सब्सिडी के रूप में 1.12 लाख की धनराशि दी जा रही है, साथ ही वृ़क्षारोपण हेतु 300 पौध निःशुल्क उपलब्ध कराये जा रहे हैं। साथ ही चयनित लाभार्थियों को शतप्रतिशत आवश्यक कीटपालन उपकरण भी उपलब्ध कराये जा रहे हैं। इस योजना का मकसद शहतूती वृक्षों का रोपण कर रेशम उत्पादन को बढ़ावा देना है।

वेस्ट से बेस्ट योजना

इस योजना के तहत धागाकरण के उपरांत खराब रेशम कोयों की खपत सुनिश्चित करना है और कटघई के माध्यम से हैण्ड स्पन धागे का उत्पादन करना है। जिससे एक ओर जहां फेडरेशन के उत्पादन प्रक्रिया में अनुपयोगी खराब रेशम कोयों को उपयोग में लाया जायेगा वहीं दूसरी ओर जनजातीय समुदायों की महिलाओं को रोजगार भी प्राप्त होगा। इससे प्राप्त होने वाले धागे से बने मफलर एवं मिश्रित शॉल का उत्पादन किया जायेगा, जिसकी बाजार में भारी डिमांड है।

बयान-

उत्तराखंड कोऑपरेटिव रेशम फेडरेशन में कम्पलीट वेल्यू चेन प्रणाली लागू करने से फेडरेशन की व्यावसायिक गतिविधियां तेजी से बढ़ी है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में फेडरेशन द्वारा 2.34 करोड़ के रेशमी उत्पाद बेचे गये, जिससे फेडरेशन को एक करोड़ से अधिक का शुद्ध मुनाफा हुआ। यह उपलब्धि सहकारिता प्रणालियों को सशक्त बनाने को राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। – डॉ. धन सिंह रावत, सहकारिता मंत्री, उत्तराखंड।

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Ghanshyam Chandra

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