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उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सरकार ने महिलाओं को भूमिधरी अधिकार देकर दिया बड़ा तोहफा, देवभूमि की आधी आबादी को मिला महत्वपूर्ण हक

आकाश ज्ञान वाटिका, 20 फरवरी 2021, शनिवार, देहरादून। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की घोषणा के क्रम में कैबिनेट ने महिलाओं को भूमिधरी अधिकार देने के लिए जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम में संशोधन को हरी झंडी दी है।

[box type=”shadow” ]महत्वपूर्ण फैसले

  • महिलाओं को भूमिधरी अधिकार देने के लिए जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम में संशोधन को हरी झंडी दी है।
  • आशा कार्यकर्त्‍ताओं को पांच साल के मानधन की बकाया 25 हजार की राशि उनके खातों में हस्तांतरित
  • आशा कार्यकर्त्‍ताओं के मानदेय को सालाना पांच हजार से बढ़ाकर 18 हजार किया गया।
  • देहरादून के थानो, कोटीमयचक और नैनीताल के कोटाबाग के साथ ही उत्तरकाशी व रुद्रप्रयाग जिलों में महिलाओं एलईडी लाइट निर्माण का प्रशिक्षण
  • पिरुल एकत्रीकरण पर प्रति किलो साढ़े तीन रुपये की दर से भुगतान।
  • हर जिले में स्थापित महिला शक्ति केंद्रों के जरिये हर ब्लाक में तीन-तीन कार्मिक तैनात
  • पीड़ि‍त महिलाओं की मदद को खोले गए वन स्टाप सेंटर। इनमें वर्किंग वूमन हास्टल स्थापित[/box]

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से पहले देवभूमि उत्तराखंड में आधी आबादी को बड़ा हक मिल गया है। सरकार ने महिलाओं को भूमिधरी अधिकार देकर उन्हें बड़ा तोहफा दिया है। अब संक्रमणीय अधिकार वाले पुरुष भूमिधर के जीवनकाल में उसकी पत्नी अपने पति के अंश में सहखातेदार के रूप में दर्ज होगी।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि अधिनियम में किए गए इस संशोधन से मातृशक्ति की सामाजिक व आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। महिलाएं अब भूमि पर ऋण लेकर अपना व्यवसाय शुरू कर सकेंगी। उन्हें खेती, उद्योग आदि के लिए भी बैंक से ऋण लेने में आसानी रहेगी। यह ऐतिहासिक फैसला महिला सशक्तीकरण की दिशा में देशभर के लिए नजीर बन सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला स्वावलंबन के लिए उठाए गए कदमों के सकारात्मक परिणाम आए हैं। महिला स्वयं सहायता समूहों को पांच लाख रुपये तक ब्याजमुक्त ऋण मुहैया कराया जा रहा है, जिससे महिला उद्यमिता को बढ़ावा मिला है। न्याय पंचायत स्तर पर बन रहे रूरल ग्रोथ सेंटर महिलाओं के कौशल विकास और उनकी आर्थिकी सुधारने में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। अब तक मंजूर 104 ग्रोथ सेंटरों में से 72 कार्यरूप में परिणत हो चुके हैं। इन सेंटरों से करीब 30 हजार लोग लाभान्वित हो रहे हैं। ग्रोथ सेंटरों में छह करोड़ से अधिक की बिक्री हुई और 60 लाख का मुनाफा हुआ है। उन्होंने कहा कि देवीभोग प्रसाद योजना में केदारनाथ में महिलाओं ने एक करोड़ से अधिक का प्रसाद बेचा। 625 मंदिरों में भी यह योजना लागू की जा रही है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 2.5 लाख महिलाओं को 31691 स्वयं सहायता समूहों में संगठित किया जा चुका है। राज्य आजीविका मिशन में चालू वित्तीय वर्ष में 20 विकासखंडों में 20 हजार महिलाओं का चयन कर उनके कौशल विकास में वृद्धि की गई।

[box type=”shadow” ]मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्थागत प्रसव, मातृत्व मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर, बालिका लिंगानुपात, टीकाकरण समेत स्वास्थ्य सूचकों में राज्य में सुधार हुआ है। संस्थागत प्रसव 50 फीसद से बढ़कर 71 फीसद हो गया है। मातृत्व मृत्यु दर भी 285 से घटकर 99 प्रति लाख जीवित जन्म के स्तर पर आ गई है। शिशु मृत्यु दर भी 38 से घटकर 31 प्रति हजार हो गई है। लिंगानुपात में राज्य देश के टाप-10 राज्यों में शामिल है। छह जिले टाप-30 में आए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्पर्श सेनेटरी नेपकिन यूनिट सोच में बदलाव लाने को मददगार साबित हो रही है। बाजार की तुलना में सस्ते नेपकिन मिलने से महिलाओं व बालिकाओं में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ी है। गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं व बच्चों के लिए टेकहोम राशन की व्यवस्था की गई है।[/box]

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Ghanshyam Chandra

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