राष्ट्रीय जल सर्वेक्षण कार्यालय में पूर्व नौसैनिकों के लिए आयोजित किया गया पहला ‘समन्वय’ कार्यक्रम

पूर्व सैनिकों की चिकित्सा, पुनः रोजगार और वीर नारियों के कल्याण पर हुआ व्यापक मंथन
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर से अब तक 1900 से अधिक पूर्व नौसैनिक वेटरन सेलर्स फोरम (VSF) से जुड़ चुके हैं : अध्यक्ष, एन.एफ. चैप्टर
आकाश ज्ञान वाटिका, बुधवार, 22 जुलाई 2026, देहरादून। भारतीय नौसेना द्वारा अपने सेवानिवृत्त अधिकारियों एवं नाविकों के साथ सतत संवाद और समन्वय को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए राष्ट्रीय जल सर्वेक्षण कार्यालय (NATIONAL HYDROGRAPHIC OFFICE, NHO) देहरादून में वेटरन सेलर्स फोरम (Veteran Sailors Forum – VSF) के तत्वावधान में पहली ‘समन्वय’ (Samanvaya) संवाद बैठक का सफल आयोजन किया गया। इस अवसर पर उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू-कश्मीर सहित उत्तर भारत के विभिन्न क्षेत्रों में निवास कर रहे लगभग 50 पूर्व नौसैनिक अधिकारियों एवं नाविकों (Sailors) ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय नौसेना और उसके पूर्व सैनिकों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करना, उनकी समस्याओं को सुनना, विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देना तथा उनके सुझावों के आधार पर भविष्य की कार्ययोजना तैयार करना था। कार्यक्रम में उपस्थित सभी पूर्व सैनिकों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे नौसेना परिवार को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
कार्यक्रम का शुभारंभ रियर एडमिरल विनय बधवार (सेवानिवृत्त), अध्यक्ष, एन.एफ. चैप्टर के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने सभी पूर्व नौसैनिक अधिकारियों एवं नाविकों का अभिनंदन करते हुए कहा कि भारतीय नौसेना अपने सेवानिवृत्त कर्मियों को सदैव अपने परिवार का अभिन्न अंग मानती है। सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद भी नौसेना अपने पूर्व सैनिकों के कल्याण, सम्मान और समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर प्रयासरत है।

रियर एडमिरल बधवार (से.नि.) ने बताया कि उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर से अब तक 1900 से अधिक पूर्व नौसैनिक वेटरन सेलर्स फोरम (VSF) से जुड़ चुके हैं। यह संख्या लगातार बढ़ रही है, जो इस मंच के प्रति पूर्व सैनिकों के विश्वास और इसकी उपयोगिता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के संवाद कार्यक्रमों से पूर्व सैनिकों की समस्याओं को समझने और उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय नौसेना का उद्देश्य केवल सेवा अवधि तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवानिवृत्ति के बाद भी प्रत्येक सेवानिवृत्ति के बाद भी पूर्व नौसैनिकों एवं उनके परिवारों के साथ मजबूत, आत्मीय और विश्वासपूर्ण संबंध बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी भावना के साथ ‘समन्वय’ कार्यक्रम की शुरुआत की गई है ताकि पूर्व सैनिकों को एक ऐसा साझा मंच उपलब्ध कराया जा सके, जहाँ वे अपनी समस्यायें, सुझाव और अनुभव खुलकर साझा कर सकें।
कार्यक्रम के दौरान कैप्टन अमित पुरी, कमांड रेजिमेंटल सिस्टम ऑफिसर (CSRO – NORTH) ने विस्तृत प्रस्तुति देते हुए पूर्व सैनिकों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं, सुविधाओं और सहायता प्रणालियों की जानकारी दी। उन्होंने एक संवादात्मक सत्र का संचालन भी किया, जिसमें प्रतिभागियों ने अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर अपने प्रश्न रखे और सुझाव साझा किए।

इस दौरान विशेष रूप से भूतपूर्व सैनिकों की चिकित्सा सुविधाओं एवं एक्स-सर्विसमैन कॉन्ट्रिब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ECHS) से संबंधित मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने विभिन्न क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, उपचार प्रक्रिया, अस्पतालों में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों तथा स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली समस्याओं को साझा किया। अधिकारियों ने इन समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया तथा स्वास्थ्य सेवाओं तक सुगम पहुँच सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
बैठक में सेवानिवृत्त नौसैनिकों के पुनः रोजगार (री-एम्प्लॉयमेंट) के विषय पर भी गंभीर चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान समय में अनेक पूर्व सैनिक अपने अनुभव और कौशल के आधार पर विभिन्न सरकारी एवं निजी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। इस दिशा में उन्हें रोजगार संबंधी अवसर उपलब्ध कराने, कौशल विकास और करियर मार्गदर्शन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि सेवानिवृत्ति के बाद भी वे सम्मानजनक रोजगार प्राप्त कर सकें।
कार्यक्रम में वीर नारियों अर्थात दिवंगत नौसैनिकों की पत्नियों एवं उनके परिवारों के कल्याण पर भी विशेष बल दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि भारतीय नौसेना अपने शहीद एवं दिवंगत कर्मियों के परिवारों के प्रति पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य करती है। उनकी सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक समस्याओं के समाधान के लिए विभिन्न सहायता तंत्र विकसित किए गए हैं तथा भविष्य में इन्हें और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

संवाद सत्र के दौरान पूर्व सैनिकों ने पेंशन, चिकित्सा, दस्तावेजी प्रक्रियाओं, कल्याणकारी योजनाओं, संचार व्यवस्था तथा स्थानीय स्तर पर आने वाली विभिन्न चुनौतियों पर भी अपने विचार रखे। अधिकारियों ने सभी सुझावों और समस्याओं को गंभीरता से सुना तथा उन्हें संबंधित स्तर पर पहुँचाकर समाधान की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में एक ओपन फोरम आयोजित किया गया, जिसमें सभी प्रतिभागियों को स्वतंत्र रूप से अपने विचार रखने का अवसर मिला। पूर्व नौसैनिकों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के नियमित संवाद कार्यक्रमों से उनकी समस्याओं के समाधान में तेजी आएगी तथा नौसेना और पूर्व सैनिकों के बीच संबंध और अधिक मजबूत होंगे। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

‘समन्वय’ कार्यक्रम का समापन भारतीय नौसेना और उसके पूर्व सैनिकों के बीच विश्वास, सहयोग और आत्मीयता की भावना को और अधिक सुदृढ़ करने के संकल्प के साथ हुआ। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि भारतीय नौसेना अपने पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है तथा उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रत्येक स्तर पर प्रयास करती रहेगी।
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